Magh Purnima Katha In Hindi: सनातन धर्म में इस पूर्णिमा का विशेएष महत्व माना जाता है। इसे माघी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि माघ पूर्णिमा पर भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं और अपने भक्तों को अपना आशीर्वाद देते हैं। इस दिन गंगा स्नान करने से पापों से छुटकारा मिलने की मान्यता है। जानिए माघ पूर्णिमा की व्रत कथा।
माघ पूर्णिमा व्रत कथा (Magh Purnima Vrat Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार कांतिका नगर में एक ब्राह्मण रहता था, जिसका नाम धनेश्वर था। वह भिक्षा मांगकर अपना जीवन गुजार रहा था। उसकी कोई संतान नहीं थी। एक दिन भिक्षा मांगने के दौरान लोगों ने ब्राह्मण की पत्नी को बांझ कहकर ताने मारे और उसे भिक्षा देने से मना कर दिया। इस घटना से ब्राह्मण की पत्नी बहुत दुखी हुई। जिसके बाद उसे किसी ने 16 दिन तक मां काली की पूजा करने की सलाह दी। ब्राह्मण दंपत्ति ने 16 दिनों तक मां काली का पूजन किया। दंपत्ति की पूजा से प्रसन्न होकर 16वें दिन मां काली साक्षात प्रकट हुईं और उसे गर्भवती होने का वरदान दिया। इसके साथ ही मां काली ने उस ब्राह्मणी से हर पूर्णिमा के दिन एक दीपक जलाने को कहा और धीरे-धीरे हर पूर्णिमा पर दीपक की संख्या बढ़ा देने की बात कही। साथ ही दोनों पति-पत्नी को मिलकर पूर्णिमा का व्रत रखने को भी कहा।
मां काली के कहे अनुसार ब्राह्मण पति पत्नी ने पूर्णिमा को दीपक जलाने शुरू कर दिए और व्रत रखा। जल्द ही ब्राह्मणी गर्भवती हो गई। कुछ समय बाद ब्राह्मणी ने एक पुत्र को जन्म दिया। दोनों ने अपने पुत्र का नाम देवदास रखा। लेकिन देवदास की उम्र अधिक नहीं थी। देवदास के बड़े होने पर उसे मामा के साथ पढ़ने के लिए काशी भेजा दिया गया। काशी में दुर्घटनावश धोखे से उसका विवाह हो गया। कुछ समय बाद काल उसके प्राण लेने आया, लेकिन उस दिन पूर्णिमा थी और ब्राह्मण दंपति ने उस दिन भी अपने पुत्र के लिए व्रत रखा था। जिसके चलते काल ब्राह्मण के पुत्र का कुछ नहीं बिगाड़ पाया। इस तरह पूर्णिमा के दिन व्रत करने से श्रद्धालुओं को सभी कष्टों और संकटों से मुक्ति मिलती है।
