Labh Panchami Vrat Katha: 26 अक्टूबर 2025 को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को लाभ पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व छठ पूजा के खरना के साथ मनाया जाता है। इस दिन पूजन करने से माता लक्ष्मी और भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह पर्व गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में अधिकतर मनाया जाता है। व्यापारी लोग इस दिन से नए बही खाते की शुरुआत करते हैं।
क्या है लाभ पंचमी का महत्व?
लाभ पंचमी का सौभाग्य पंचमी और ज्ञान पंचमी आदि कई नामों से जाना जाता है। इस दिन दीपावली उत्सव का समापन होता है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से जीवन में आर्थिक स्थिरता और बाधा मुक्ति मिलती है। वहीं, जैन समुदाय के लोग इस दिन ज्ञान पंचमी का पर्व मनाते हैं। वहां पर इस दिन पुस्तकों का पूजा किया जाता है। यह भी माना जाता है कि लाभ पंचमी के दिन व्रत कथा को पढ़ने या सुनने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
लाभ पंचमी की कथा
प्राचीन काल में एक धनी व्यापारी था, जिसका नाम सौभाग्यदत्त था। वह अपने व्यापार में अत्यंत सफल था, लेकिन उसका मन हमेशा अधूरा रहता था, क्योंकि वह केवल भौतिक सुखों में डूबा रहता था और आध्यात्मिक ज्ञान से अनजान था। एक दिन उसकी मुलाकात एक जैन मुनि से हुई, जिन्होंने उसे जैन धर्म की शिक्षाओं और पंचम तीर्थंकर सुमतिनाथ भगवान की महिमा के बारे में बताया।
मुनि ने सौभाग्यदत्त को समझाया कि सच्चा लाभ केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि आत्मा के ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने से प्राप्त होता है। मुनि ने उसे कार्तिक शुक्ल पंचमी के दिन जैन ग्रंथों का अध्ययन करने, पूजा करने और दान देने की सलाह दी। सौभाग्यदत्त ने मुनि की बात मानी और उस दिन विशेष पूजा-अर्चना की, जैन ग्रंथों का अध्ययन किया और जरूरतमंदों को दान दिया। इसके बाद, सौभाग्यदत्त के जीवन में न केवल व्यापारिक समृद्धि बढ़ी, बल्कि उसे आध्यात्मिक शांति और ज्ञान की प्राप्ति भी हुई। उसने अपने जीवन को जैन धर्म के सिद्धांतों—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह—के अनुसार जीना शुरू किया।
लाभ पंचमी के दिन किए जाते हैं ये कार्य
इस दिन जैन धर्म के लोग जैन मंदिरों में जाकर तीर्थंकरों की पूजा करते हैं। विशेष रूप से भगवान सुमतिनाथ और अन्य तीर्थंकरों की मूर्तियों की पूजा की जाती है। इस दिन जैन धर्म के पवित्र ग्रंथ जैसे कल्पसूत्र, तत्त्वार्थ सूत्र और अन्य ग्रंथों का पाठ किया जाता है। ज्ञान पंचमी के रूप में यह दिन ज्ञान अर्जन के लिए विशेष महत्व रखता है।
वहीं, व्यापारी इस दिन अपने व्यापारिक कार्यों की शुरुआत करते हैं, जैसे नई बही-खातों की पूजा, नए व्यापार की शुरुआत या निवेश आदि करते हैं। मान्यता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्य लाभकारी होते हैं।
इसके साथ ही दान करना इस पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोग जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन दान करते हैं, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है। कुछ लोग इस दिन उपवास रखते हैं और जैन धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हुए संयम का जीवन जीते हैं।
