अध्यात्म

मालामाल कर सकता है इस मंदिर से मिला चांदी का सिक्का, कुबेर के खजाने सी भरती है तिजोरी

Dhanteras 2025: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां से चांदी का सिक्का ले जाने पर आपकी तिजोरी कुबेर के खजाने की तरह भर सकती है। ये हम नहीं, मान्यताएं कहती हैं। जानें इस बारे में।

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मालामाल कर सकता है इस मंदिर से मिला चांदी का सिक्का (Pic: iStock)

Dhanteras 2025: पूरे देश भर में 18 अक्टूबर को कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि में धनतेरस का त्योहार मनाया जाने वाला है। धनतेरस के दिन खासतौर पर भगवान कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा होती है। धनतेरस पर नमक, झाड़ू, साबुत धनिया और झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है, लेकिन हम आपके लिए ऐसे मंदिर की जानकारी लेकर आए हैं, जहां मात्र सिक्का ले जाने से श्रद्धालु मालामाल होता है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम नाम का मंदिर है। इसकी मान्यता है कि इस मंदिर की मिट्टी घर ले जाने पर बरकत आती है।

आर्थिक स्थिति सुधरने की मान्यता

जागेश्वर धाम में कुबेर भगवान एकमुखी शिवलिंग के साथ विराजमान हैं। यहां भगवान शिव और कुबेर दोनों की पूजा होती है। माना जाता है कि अगर किसी का कारोबार ठप पड़ गया है तो इस मंदिर के गर्भगृह की मिट्टी ले जाकर अपनी तिजोरी में रखने से आर्थिक स्थिति सुधरती है और घर में धन-धान्य बना रहता है। भक्त दूर-दूर से यहां मिट्टी लेने के लिए आते हैं।

चांदी का सिक्का

मंदिर की एक और मान्यता है, जिसमें चांदी के सिक्के का इस्तेमाल होता है। कहा जाता है कि आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए या कर्ज से मुक्त होने के लिए चांदी का सिक्का लेकर मंदिर जाएं। वहां मंदिर में मंत्र पढ़कर और सिक्के की पूजा कराकर उसे पीले कपड़े में बांधकर अपने घर ले जाएं तो आर्थिक परेशानी से मुक्ति मिलती है। अपनी मनोकामना को पूरा कराने के लिए यहां कुबेर भगवान को खीर अर्पित की जाती है।

दिवाली और धनतेरस के मौके पर मंदिर में खास पूजा अर्चना होती है। धनतेरस पर एकमुखी शिवलिंग के साथ विराजमान कुबेर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। यहां की मिट्टी अपने घर ले जाने के लिए भक्तों के बीच होड़ लगी रहती है।

कब बना था ये मंदिर

मंदिर की बनावट बहुत पुरानी है। मंदिर के निर्माण को लेकर भी संशय है। कुछ लोगों का कहना है कि मंदिर का निर्माण 7वीं शताब्दी में हुआ, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि मंदिर 9वीं और 14वीं वीं शताब्दी में बना है। मंदिर के सही निर्माण की जानकारी नहीं है। मंदिर प्रांगण में देवी-देवताओं के कई मंदिर मौजूद हैं।

इनपुट - आईएएनएस

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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