अध्यात्म

Kartik Purnima Vrat Katha: कार्तिक पूर्णिमा की कथा से जानिए कैसे भगवान शिव कहलाए त्रिपुरारी

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Nov 8, 2022, 03:19 PM IST

Kartik Purnima Katha: कार्तिक पूर्णिमा का रखा है व्रत तो इस दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा। जानें कैसे भगवान शिव कहलाए त्रिपुरारी।

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Kartik Purnima Vrat Katha: कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा

Kartik Purnima 2022: कार्तिक पूर्णिमा इस बार 8 नवंबर को मनाई जा रही है। इस दिन चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) भी है। मान्यताओं अनुसार इस दिन देवों के देव महादेव ने त्रिपुरासुरों नामक राक्षसों का वध किया था। कहते हैं इस दिन दीप दान और गंगा स्नान करने से सारे पाप कट जाते हैं। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वालों के लिए इस कथा को पढ़ना जरूरी माना जाता है।

कार्तिक पूर्ण कथा (Kartik Purnima Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार तारकासुर नाम का एक राक्षस था। जिसके तीन पुत्र थे जिनका नाम तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली था। भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय जी ने तारकासुर का वध कर दिया जिसे देख उस राक्षस के पुत्र बेहद दुखी हुए। उन्होंने देवताओं से अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। तीनों ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा जी ने उन्हें कहा ऐसा संभव नहीं है इसके अलावा कुछ अलग वरदान मांग लो। यह सुनने के बाद तीनों ने तीन नगरों का निर्माण करवाने के लिए कहा, जिसमें वह बैठकर पूरे पृथ्वी और आकाश का भ्रमण कर सकें। साथ ही उन्होंने कहा कि एक हजार वर्ष बाद जब हम एक जगह पर मिलें तो तीनों नगर मिलकर एक हो जाएं और जो देवी-देवता अपने एक बाण से तीनों नगरों को नष्ट करने की क्षमता रखता हो वही हमारा वध कर सके।

तारकासुर के पुत्रों की मनोकामना ब्रह्मा जी ने पूरी की और उन्हें यह वरदान दे दिया। ब्रह्मा जी ने तीन नगरों का निर्माण करवाया। तारकाक्ष के लिए सोने का, कमलाक्ष के लिए चांदी का और विद्युन्माली के लिए लोहे का नगर बनाया गया। वरदान प्राप्त करने के बाद तीनों लोक में आतंक मचा दिया और स्वर्ग पर भी अधिकार स्थापित करने की कोशिश करने लगे जिससे इंद्रदेव भयभीत होकर भगवान शिव के पास पहुंचे। इंद्रदेव की बात सुनकर महादेव ने एक दिव्य रथ का निर्माण किया और एक बाण में तीनों नगरों को नष्ट कर त्रिपुरासुरों का वध कर दिया। कहते हैं इसके बाद ही भगवान शिव त्रिपुरारी कहलाए।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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