Kalashtami 2026 Date: साल 2026 की पहली कालाष्टमी कब है? 10 या 11 जनवरी, जानिए सही तिथि और मुहूर्त
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 7, 2026, 01:45 PM IST
Kalashtami 2026 Date and Muhurat: हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान भैरव का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि कालाष्टमी पर भगवान भैरव का पूजन करने भय, बाधा और शत्रु का नाश होता है। साल 2026 में पहली कालाष्टमी कब पड़ रही है। इसको लेकर थोड़ा कंफ्यूजन व्याप्त है। आइए जानते हैं कि साल 2026 की पहली कालाष्टमी कब है।
कालाष्टमी कब है?
Kalashtami 2026 Date and Muhurat: कालाष्टमी भगवान कालभैरव की पूजा का विशेष दिन है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को यह व्रत रखा जाता है। इस दिन कालभैरव की पूजा से भय, बाधा, शत्रु और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। साल 2026 की पहली कालाष्टमी को लेकर 10 या 11 जनवरी में कन्फ्यूजन है। साल 2026 की पहली कालाष्टमी माघ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ेगी। यह कब है? आइए पंचांग के आधार पर सही तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि जानते हैं।
2026 की पहली कालाष्टमी की सही तिथि
पंचांग के अनुसार, माघ मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 जनवरी 2026 शनिवार सुबह 8:23 बजे शुरू होकर 11 जनवरी रविवार सुबह 10:20 बजे समाप्त होगी। कालाष्टमी की पूजा रात के समय निशिता काल में शुभ मानी जाती है। इसमें उदया तिथि का नियम नहीं लागू होता है। इस कारण साल 2026 की पहली कालाष्टमी की पूजा 10 जनवरी को ही की जाएगी। इस दिन व्रत और पूजा करना फलदायी रहेगा।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व
कालभैरव भगवान शिव का उग्र रूप हैं। वे समय और न्याय के अधिपति हैं। इनकी पूजा से जीवन के संकट दूर होते हैं। कालसर्प दोष, शनि और राहु के बुरे प्रभाव कम करने के लिए यह व्रत बहुत प्रभावी माना जाता है। नियमित पूजा से मानसिक शांति, आत्मबल और सुरक्षा मिलती है।
क्या है साल 2026 की पहली कालाष्टमी का श्रेष्ठ मुहूर्त?
कालाष्टमी की पूजा रात में निशिता काल में करना सबसे अच्छा है। 10 जनवरी की रात निशिता काल 12:02 से 12:56 बजे तक 11 जनवरी तक रहेगा। इस समय पूजा करने से फल कई गुना बढ़ जाता है।
कालाष्टमी 2026 सरल पूजा विधि
सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। घर में पूजा स्थान पर दीपक जलाएं या कालभैरव मंदिर जाएं। कालभैरव का स्मरण करें। रुद्राक्ष माला से ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ मंत्र का जप करें। धूप, दीप, फूल और फल चढ़ाएं। इस दिन उपवास रखें। रात में जागरण करें। घर में कालभैरव की मूर्ति या चित्र न रखें, मंदिर में पूजा करें। कालभैरव का वाहन कुत्ता है। इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना बहुत शुभ माना जाता है। इससे भगवान भैरव की कृपा जल्दी मिलती है।
इन लोगों को जरूर करनी चाहिए कालाष्टमी पर पूजा?
जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष है, उनके लिए यह व्रत विशेष फायदेमंद है। शनि और राहु के बुरे प्रभाव कम करने के लिए कालभैरव की पूजा करें। इससे जीवन में स्थिरता आती है। 10 जनवरी को कालाष्टमी का व्रत रखें। कालभैरव की कृपा से जीवन के हर संकट दूर होंगे।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।