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Kajari Teej 2025 Date: कजरी तीज कब है 2025 में? जानें कजरी तीज की सही तिथि, पूजा का मुहूर्त और पूजा की संपूर्ण विधि

Kajari Teej 2025 Date, Puja Muhurat, Puja Vidhi: हर साल भाद्रपद यानी कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है। साल 2025 में कजरी तीज कब है? इसकी सही डेट हर कोई सर्च कर रहा है। ऐसे में आपको यहां से कजरी तीज की तिथि के साथ शुभ मुहूर्त भी यहां मिलेगा। साथ ही यहां कजरी तीज व्रत पूजा विधि भी बताई गई है।

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कजरी तीज 2025 तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि (photo source: canva)

Kajari Teej 2025 Date, Puja Muhurat, Puja Vidhi: भाद्रपद 10 अगस्त से शुरू हो रहा है और भाद्रपद में ही कजरी तीज मनाया जाता है। ये हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत-त्योहारों में से एक है। इस व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार कजरी तीज का व्रत पहली बार माता पार्वती ने रखा था। इस व्रत को करने से पति-पत्नी के जीवन में प्रेम और खुशहाली बनी रहती है।अविवाहित लड़कियां भी इस व्रत को करती हैं, जिससे उन्हें मनचाहा वर मिलता है। इस व्रत की महिमा के बारे में कहा जाता है कि इसे करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, संतान का आशीर्वाद मिलता है और खुशहाली आती है।

कजरी तीज कब है 2025 में?

कजरी तीज चूंकि हर साल ही भाद्रपद यानी कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के दिन मनाया जाता है, इसलिए साल 2025 में इसे 12 अगस्त 2025, दिन मंगलवार के दिन मनाया जाएगा।

कजरी तीज पूजा शुभ मुहूर्त-

भाद्रपक्ष के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 11 अगस्त की सुबह 10.33 बजे होगा। जो 12 अगस्त की सुबह 08.40 बजे समाप्त हो जाएगा। हिंदू धर्म में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है इसलिए कजरी तीज 12 अगस्त को ही मनाई जाएगी।

  • ब्रह्म मुहूर्त- 04.23AM से 05.06AM तक
  • विजय मुहूर्त- 02.38PM से 03.31PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त- 07.03PM से 07.25PM तक
  • निशिथ काल मुहूर्त- 12.05PM से 12.48PM तक

कजरी तीज पूजा विधि-

कजरी तीज के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। फिर व्रत का संकल्प लें। हाथ में जल लेकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए व्रत की नीयत करें। एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या फोटो स्थापित करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भस्म और सफेद पुष्प अर्पित करें, और माता पार्वती को कुमकुम, मेहंदी, चूड़ी, सिंदूर, बिंदी और अन्य सुहाग सामग्री चढ़ाएं। धूप और दीप जलाकर पूजा करें, मंत्रों का जाप करें और आरती करें। पूजा के बाद कजरी तीज की व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। कजरी तीज के दिन आपको दिनभर उपवास रखना है। ये व्रत निर्जला या फलाहार हो सकता है। फिर रात में चंद्रमा के उदय पर चंद्र दर्शन करें और अर्घ्य दें। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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