अध्यात्म

मंदिर दर्शन: मंदिरों के शहर में स्थापित है किसे कहते हैं ज्योतिर्लिंगों का राजा, जहां महादेव की पूजा में रखी जाती है तुलसी

Mandir Darshan Part 2: देश में मंदिरों के शहर में जो ज्योतिर्लिंग स्थापित है उसे ज्योतिर्लिंगों का राजा कहा जाता है। इस मंदिर के प्रांगण में 108 शिव मंदिर हैं। भुवनेश्वर के लिंगराज मंदिर में महादेव के साथ ही भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। साथ ही यहां तुलसी भी महादेव की पूजा में रखी जाती है। जानें इस बारे में।

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भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर (Pic: iStock)

Mandir Darshan Part 2: सावन का पावन महीना चल रहा है। ऐसे में देवों के देव महादेव का आशीर्वाद पाने के लिए शिवालयों में भक्तों की रोज लंबी कतार लग रही है। वहीं, शिव के प्रमुख धाम जिन्हें ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है, यहां पहुंचने वाले शिवभक्तों की संख्या में भी खासी वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में इस पावन महीने में हम आपको शिव के एक ऐसे धाम के बारे में बताएंगे जिन्हें ज्योतिर्लिंगों के राजा के रूप में पूजा जाता है। इसके साथ ही यह दुनिया का एकमात्र मंदिर है, जहां महादेव को तुलसी दल अर्पित किया जाता है।

ऐसे तो महादेव की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग वर्जित है। लेकिन यह मात्र एक ऐसा मंदिर है, जहां महादेव को तुलसी का दल भी भोग लगाया जाता है। ज्योतिर्लिंग के राजा के रूप में पूजे जाने वाले महादेव का यह मंदिर ओडिशा में स्थित है और इसे भगवान लिंगराज का मंदिर कहा जाता है।

IANS की एक खबर के मुताबिक, लिंगराज शब्द का अर्थ है "लिंगम के राजा", जो द्वादश ज्योतिर्लिंग के राजा हैं। ऐसे में ज्योतिर्लिंग के राजा के रूप में यहां इनकी पूजा भी होती है, इन्हें 'त्रिभुवनेश्वर' भी कहा जाता है और इसी से इस शहर का नाम भुवनेश्वर पड़ा, ऐसा माना जाता है। इस मंदिर का प्रांगण इतना विशाल है कि इसमें छोटे-बड़े 150 मंदिर हैं। लिंगराज मंदिर के इस विशाल प्रांगण में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग के मंदिर के साथ ही भगवान शिव के कुल 108 मंदिर स्थित हैं।

मंदिरों के शहर में स्थित

भुवनेश्वर, जिसे भारत का मंदिर शहर भी कहा जाता है, में स्थित लिंगराज मंदिर यहां का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है। इस मंदिर की स्थापना के बारे में कहा जाता है कि 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच इसका निर्माण कराया गया था। यहां लिंग रूप में भगवान हरिहर विराजते हैं। हरि का मतलब है विष्णु और हर का मतलब शिव, ऐसे में यहां महादेव के साथ ही भगवान विष्णु की भी पूजा होती है।

मंदिर के प्रांगण में एक छोटा सा कुआं है, जिसे मरीची कुंड कहा जाता है। इसको लेकर मान्यता है कि जिस महिला को संतान से जुड़ी परेशानियां हैं, वह यहां स्नान करे तो उन्हें परेशानियों से मुक्ति मिलती है और संतान की प्राप्ति होती है।

तुलसी दल भी पूजा में शामिल

IANS के मुताबिक, इस मंदिर के बारे में इतिहास में वर्णित है कि इसका निर्माण सोमवंशी राजा ययाति प्रथम ने करवाया था। इस लिंगराज मंदिर की महत्ता के पीछे की वजह है कि यहां विराजे लिंगराज स्वयंभू हैं। यह दुनिया का अकेला मंदिर है, जहां भगवान शिव को बेलपत्र के साथ तुलसी दल भी अर्पित किया जाता है। इसका कारण यह है कि यहां भगवान शिव और विष्णु एक साथ विराजते हैं।

मंदिर में लिंगराज के रूप में विराजित स्वयंभू शिवलिंग का आकार बेहद खास है। इसका व्यास 8 फुट और ऊंचाई 8 इंच है। इस मंदिर में गैर हिंदुओं का गर्भगृह में प्रवेश वर्जित है। इस भव्य प्राचीन संरचना की झलक पाने हेतु परिसर के बाहर एक मंच बनाया गया है।

क्या कहते हैं पुराण

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस मंदिर का वर्णन ब्रह्म पुराण के साथ स्कंद पुराण और कपिला संहिता में मिलता है। इस मंदिर का एक रोचक पहलू यह है कि यह हिंदू धर्म के दो प्रमुख संप्रदायों शैव और वैष्णव के मिलन का प्रतीक है।

लिंगराज मंदिर के पास प्रसिद्ध मुक्तेश्वर मंदिर, राजरानी मंदिर, अनंत वासुदेव मंदिर, ब्रह्मेश्वर मंदिर और परशुरामेश्वर मंदिर स्थित हैं। ये सभी मंदिर हिंदू धर्म के लिए पवित्र हैं और अपनी मनमोहक वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं। लिंगराज मंदिर की ऊंचाई 180 फीट है, जो भगवान जगन्नाथ के मंदिर से भी ज्यादा ऊंचा है। इसे 1984 से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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