अध्यात्म

जून 2026 में संक्रांति कब है: मिथुन संक्रांति 2026 की डेट, पुण्य काल की अवधि- क्या रहेगा संक्रांति का क्षण

June 2026 Sankranti Date: जून में मिथुन संक्रांति 2026 कब है। नोट करें मिथुन संक्रांति 2026 की डेट, मिथुन संक्रांति 2026 पुण्य काल की अवधि और मिथुन संक्रांति 2026 का क्षण कितने बजे होगा।

Image

जून 2026 में संक्रांति किस तारीख को आएगी

June 2026 Sankranti Date: सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो उस दिन को संक्रांति कहा जाता है। जून महीने में सूर्य वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेगा, जिसे मिथुन संक्रांति कहा जाता है। सनातन परंपरा में प्रत्येक संक्रांति का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि यह केवल ज्योतिषीय परिवर्तन नहीं बल्कि ऊर्जा और ऋतु परिवर्तन का भी संकेत माना जाता है। वर्ष 2026 में मिथुन संक्रांति 15 जून, सोमवार को पड़ रही है।

मिथुन संक्रांति 2026 का शुभ समय

पंचांग के अनुसार मिथुन संक्रांति का क्षण 15 जून 2026 को दोपहर 12:59 बजे होगा। इसी समय सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे।

  • मिथुन संक्रांति पुण्य काल: दोपहर 12:59 बजे से शाम 7:20 बजे तक
  • अवधि: 6 घंटे 21 मिनट
  • मिथुन संक्रांति महा पुण्य काल: दोपहर 12:59 बजे से 3:19 बजे तक
  • अवधि: 2 घंटे 20 मिनट

धार्मिक मान्यता है कि संक्रांति के दिन पुण्य काल और विशेष रूप से महा पुण्य काल में किए गए स्नान, दान और जप का फल कई गुना बढ़ जाता है।

क्यों महत्वपूर्ण मानी जाती है मिथुन संक्रांति

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, ऊर्जा, नेतृत्व और जीवन शक्ति का कारक माना गया है। माना जाता है कि सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश संचार, ज्ञान, शिक्षा, व्यापार और विचारों के आदान-प्रदान से जुड़े क्षेत्रों को प्रभावित करता है। मिथुन राशि का स्वामी बुध ग्रह है, जो बुद्धि और संवाद का प्रतिनिधित्व करता है।

इसी कारण इस संक्रांति को नई योजनाओं पर विचार करने, अध्ययन से जुड़े कार्यों को गति देने और मानसिक स्पष्टता प्राप्त करने के लिए भी शुभ माना जाता है। हालांकि किसी बड़े शुभ कार्य के लिए केवल संक्रांति का दिन नहीं, बल्कि व्यक्तिगत कुंडली और मुहूर्त का भी विचार किया जाता है।

संक्रांति के दिन क्या करना चाहिए

सनातन परंपरा में संक्रांति के दिन सुबह स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है। इसके बाद आदित्य हृदय स्तोत्र, गायत्री मंत्र या सूर्य मंत्र का जाप किया जा सकता है। गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल या जल से संबंधित वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है।

गर्मियों के इस मौसम में जलदान, छाता, मटका, सत्तू, फल और शीतल पेय पदार्थों का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

बदलते मौसम का भी संकेत

मिथुन संक्रांति केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मौसम के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। जून का महीना गर्मी और मानसून के बीच का संक्रमण काल होता है। ऐसे में यह संक्रांति प्रकृति में होने वाले बदलावों का भी संकेत देती है। भारतीय परंपराओं में खगोलीय घटनाओं और प्राकृतिक परिवर्तनों को एक साथ जोड़कर देखा गया है, इसलिए संक्रांति पर्वों का महत्व आज भी बना हुआ है।

अगर आप धार्मिक मान्यताओं में आस्था रखते हैं तो 15 जून 2026 को पड़ने वाली मिथुन संक्रांति के पुण्य काल में स्नान, दान और सूर्य उपासना कर सकते हैं।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

और पढ़ें
End of Article