30 या 31 जनवरी? कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत, जानिए जनवरी के आखिरी प्रदोष व्रत की सही तिथि और पूजन विधि व मुहूर्त
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 29, 2026, 02:33 PM IST
January Ka Antim Pradosh Vrat Kab hai: जनवरी माह में तीन प्रदोष पड़ रहे हैं। इसमें आखिरी प्रदोष की डेट को लेकर थोड़ा असमंजस है। इसका मेन कारण है कि त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी को शुरू होगी और 31 जनवरी तक रहेगी। दरअसल 31 जनवरी को सूर्योदय के समय त्रयोदशी तिथि व्याप्त रहेगी। आइए जानते हैं कि प्रदोष व्रत कब रखा जाना सही रहेगा?
प्रदोष व्रत कब है?
January Ka Antim Pradosh Vrat Kab hai: साल 2026 के जनवरी महीने में तीन प्रदोष व्रत रखे जा रहे हैं। इसमें से एक प्रदोष व्रत महीने की शुरुआत और एक महीने के बीच में रखा गया है। अब तीसरा प्रदोष व्रत महीने के अंत में रखा जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करने व उनकी कृपा पाने का आसान तरीका है।
हालांकि जनवरी 2026 का अंतिम प्रदोष व्रत कब रखा जाना सही रहेगा, इसको लेकर असमंजस की स्थिति है। इसका मुख्य कारण त्रयोदशी तिथि का 30 जनवरी को शुरू होकर 31 जनवरी 2026 तक रहना है। आइए जानते हैं कि जनवरी 2026 का अंतिम प्रदोष व्रत किस दिन है, इसकी सही डेट क्या है और प्रदोष की पूजा विधि क्या है?
कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत?
जनवरी 2026 में माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी को सुबह 11 बजकर 09 मिनट से शुरू होकर 31 जनवरी को सुबह 08 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। वहीं, प्रदोष व्रत का संबंध प्रदोष काल यानी शाम के समय सूर्यास्त के बाद होता है। इस कार जिस दिन सूर्यास्त के समय त्रयोदशी तिथि रहती है, उसी दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है।
इसके अनुसार जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। 31 जनवरी को सुबह तिथि समाप्त हो रही है, इसलिए उस दिन प्रदोष व्रत नहीं माना जाएगा। इस कारण 31 जनवरी को पारण किया जाएगा। प्रदोष व्रत में उदया तिथि मान्य नहीं की जाती है। इस व्रत में त्रयोदशी तिथि का प्रदोष काल में होना अनिवार्य माना जाता है।
क्यों खास है जनवरी 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत?
30 जनवरी 2026 को पड़ने वाला प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। शुक्रवार का संबंध मां लक्ष्मी से माना जाता है, वहीं प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। जब शुक्रवार और प्रदोष व्रत का संयोग बनता है, तो यह धन, सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
यही कारण है कि इसे धन प्राप्ति और कर्ज से मुक्ति के लिए भी महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। इसके साथ ही यह जनवरी का तीसरा प्रदोष है। मुख्य रूप से 1 माह में दो ही प्रदोष व्रत आते हैं, लेकिन जनवरी में 3 प्रदोष व्रत का पड़ना बेहद ही खास संयोग है। इसके साथ ही माघ माह के दोनों प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ने के कारण शुक्र प्रदोष व्रत हैं। माघ माह के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 16 जनवरी दिन शुक्रवार को था।
शुक्र प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त
30 जनवरी 2026 को प्रदोष व्रत की पूजा संध्या काल में सूर्यास्त के बाद और रात्रि के प्रारंभिक समय में करना श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन प्रदोष पूजा का शुभ समय शाम 05 बजकर 59 मिनट से रात 08 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इसी समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल मिलता है।
प्रदोष व्रत क्यों रखा जाता है?
प्रदोष व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक विशेष व्रत माना जाता है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव-पार्वती कैलाश पर्वत पर विचरण करते हैं और इस समय की गई पूजा शीघ्र फल देती है। शुक्रवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष रूप से धन, वैभव, ऐश्वर्य और पारिवारिक सुख प्रदान करने वाला माना जाता है। जिन लोगों को आर्थिक परेशानी, आय में रुकावट या जीवन में अस्थिरता महसूस होती है, वे इस व्रत को विशेष श्रद्धा से रखते हैं।
प्रदोष व्रत में शाम की पूजा का महत्व
प्रदोष व्रत की सबसे खास बात यह है कि इसकी पूजा शाम के समय की जाती है। इस दिन सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है और दिनभर संयम रखा जाता है। संध्या काल में सूर्यास्त से पहले या बाद में दोबारा स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर भगवान शिव की पूजा की जाती है।
माना जाता है कि यह समय भगवान शिव की पूजा के लिए परफेक्ट होता है। ऐसा इस कारण होता है क्योंकि मान्यता है कि त्रयोदशी को प्रदोष काल के समय भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर नृत्य करते हैं। एक और कथा के अनुसार भगवान शिव ने इसी समय हलाहल विष पीकर सृष्टि की रक्षा की थी। इसी कारण इस समय पूजन भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा विधि
शुक्र प्रदोष व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके साफ वस्त्र पहनें और मन में व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन उपवास रखें, कुछ लोग फलाहार करते हैं और कुछ निर्जल व्रत भी रखते हैं। शाम के समय दोबारा स्नान कर पूजा स्थान को शुद्ध करें और पूर्व दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव की पूजा करें।
शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का उपयोग किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, चंदन और सफेद फूल अर्पित करें। भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें और शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें। अंत में शिव जी की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
शुक्र प्रदोष व्रत में दान का महत्व
प्रदोष व्रत के दिन दान करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य अनुसार धन का दान करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे शिव जी के साथ-साथ मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है और घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पंचांग और शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।