अध्यात्म

जन्माष्टमी पर माखन-चोरी की परंपरा क्यों मनाई जाती है? जानें क्या है कान्हा के जीवन की ये अनोखी लीला

भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को देश भर में मनाया जाता है। दुनिया भर में बसे सनातनी इस दिन को धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन माखन-चोरी या मक्खन की मटकी फोड़ने का परंपरा भी निभाई जाती है। आइए जानते हैं भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी इस अद्भुत लीला के बारे में...

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Janmashtami 2025 (Photo - Canva)

सनातन धर्म परंपरा में जो कुछ त्यौहार बड़े स्तर पर मनाए जाते हैं जन्माष्टमी उनमें से एक है। ये त्यौहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान श्री हरि के अवतार श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को मथुरा के राजा कंस की कारागार में हुआ था। यही कारण है कि इस दिन को कृष्ण अवतार दिवस के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर लोग इसे जन्माष्टमी भी कहते हैं। इस दिन लोग दिन भर व्रत रखते हुए मध्य रात्रि के समय अर्घ्य देकर अपना व्रत पूरा करते हैं। लेकिन क्या आप इस दिन होने वाली माखन-चोरी की परंपरा के बारे में जानते हैं। आइए आज हम आपको भगवान कृष्ण से जुड़ी इस अनोखी लीला के बारे में बताने जा रहे हैं।

माखन-चोरी का कृष्ण लीला से संबंध

पौराणिक कथाओं की मानें तो भगवान श्रीकृष्ण का बचपन माखन-चोरी की बाल लीलाओं से भरा हुआ है। अपने बचपन में वह गोकुल और वृंदावन में अपने मित्रों के साथ मिलकर गोपियों का माखन चुराते और सबके साथ बांटकर खाते थे। इसे बृजवासी लोग शरारत के रूप में नहीं, बल्कि भगवान की बाल-लीला और प्रेम का प्रतीक मानते हैं।

माखन-चोरी और जन्माष्टमी

मक्खन को शुद्धता और सादगी का प्रतीक माना गया है, यही कारण है कि भगवान कृष्ण के भोग की वस्तुओं में माखन को हमेशा शामिल किया जाता है। माखन का भोग यह साफ दिखाता है कि भगवान को केवल प्रेम आधारित साधारण भोग चाहिए न कि महंगे व्यंजन।

कैसे मनाई जाती है माखन-चोरी की परंपरा

जन्माष्टमी के दिन आज भी माखन-चोरी की परंपरा को बखूबी निभाने का चलन चला आ रहा है। इस दिन सभी कृष्ण मंदिरों में माखन और मिश्री का भोग लगाया जाता है। वहीं कई स्थानों पर दही-हांडी प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती हैं। जो श्री कृष्ण की माखन-चोरी की लीला का प्रतीक है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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