भारत के इन मंदिरों में भगवान नहीं संविधान और देश की होती है पूजा, जानिए लोकेशन, दर्शन टाइम और कब जाना रहेगा सही?
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 26, 2026, 04:45 PM IST
Constitution And Bharat Mata Temple In India: भारत में आस्था धर्म ही नहीं देश और लोकतंत्र के प्रति भी है। यहां केवल भगवान के ही नहीं बल्कि भारत के संविधान और भारत माता के भी मंदिर हैं। जहां हमेशा देश भक्ति की एक अलग ही अलख जगी रहती है। इन मंदिरों में लोग देश भक्ति की कसमें खाते हैं। आइए जानते हैं कि ये मंदिर कहां स्थित हैं और इनकी खासियत क्या है?
भारत माता और संविधान मंदिर
Constitution And Bharat Mata Temple In India: भारत को अक्सर मंदिरों, तीर्थों और धार्मिक स्थलों का देश कहा जाता है, लेकिन भारत की असली पहचान सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है। यह देश अपने संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्रभाव को भी उतनी ही श्रद्धा के साथ पूजता है। यही कारण है कि भारत में कुछ ऐसे अनोखे मंदिर मौजूद हैं, जहां देवी-देवताओं के साथ-साथ भारतीय संविधान और भारत माता की पूजा की जाती है। ये मंदिर यह साबित करते हैं कि भारत में धर्म, राष्ट्र और संविधान एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व पर इन मंदिरों का महत्व और भी बढ़ जाता है, जब लोग केवल तिरंगा ही नहीं, बल्कि संविधान और मातृभूमि के प्रति भी अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

बक्सर का संविधान मंदिर
छत्तीसगढ़ के बस्तर का संविधान मंदिर
छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के भड़ेरेंगा गांव में स्थित संविधान मंदिर भारत का सबसे चर्चित और अनोखा संविधान मंदिर माना जाता है। इस मंदिर की स्थापना वर्ष 1996 में ग्रामीणों की पहल पर की गई थी। यह मंदिर किसी बड़े शहर में नहीं, बल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित है, जो इसे और भी खास बनाता है। यहां भारतीय संविधान को केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि जीवन पथ दिखाने वाले पवित्र ग्रंथ के रूप में देखा जाता है।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गांव के लोग किसी भी नए काम की शुरुआत, सामाजिक निर्णय या विवाद के समाधान से पहले संविधान की शपथ लेते हैं। विवाह, पंचायत निर्णय और सामूहिक आयोजनों में भी संविधान का स्मरण किया जाता है। यह मंदिर लोकतंत्र को जमीन से जोड़ने का अद्भुत उदाहरण है।
- संविधान मंदिर में दर्शन का समय - यह प्रातः 6 बजे से सायं 6 बजे तक माना जाता है।
- कैसे पहुंचें- इस मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको बक्सर के जगदलपुर से कोंडागांव की ओर जानवाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर आड़ेरेंग तक आप अपने निजी वाहन या कोई भी स्थानीय टैक्सी से जान सकते हैं।
- निकटतम रेलवे स्टेशन-इस मंदिर के निकटतम रेलवे स्टेशन जगदलपुर स्टेशन है।
- कब जाएं- यहां आप वैसे तो किसी भी दिन जा सकते हैं, लेकिन 15 अगस्त और 26 जनवरी पर यहां कार्यक्रम होते हैं।
स्थानीय स्तर पर विशेष अवसरों और राष्ट्रीय पर्वों पर यहां विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। 26 जनवरी और 15 अगस्त को यहां संविधान पाठ और सामूहिक शपथ ग्रहण का आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण भाग लेते हैं।
सामाजिक चेतना का केंद्र है यह मंदिर
यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का केंद्र भी है। यहां संविधान के मूल सिद्धांत—समानता, स्वतंत्रता और न्याय को जीवन में उतारने की सीख दी जाती है। खास बात यह है कि आदिवासी समुदाय ने संविधान को अपनी संस्कृति का हिस्सा बना लिया है। यह मंदिर यह संदेश देता है कि संविधान केवल किताब में बंद नियम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली शक्ति है।

केरल का संविधान मंदिर
केरल का संविधान मंदिर
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के कुडाप्पनक्कुन्नु क्षेत्र में स्थित संविधान मंदिर को ‘भारनाघटना क्षेत्रम’ के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की स्थापना अगस्त 2021 में सामाजिक कार्यकर्ता शिवदासन पिल्लई द्वारा की गई थी। यहां भारतीय संविधान की मूल प्रति को कांच के सुरक्षित बॉक्स में स्थापित किया गया है, ताकि लोग उसे सम्मान के साथ देख सकें।
इस मंदिर में संविधान की प्रस्तावना, महत्वपूर्ण अनुच्छेदों और डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर को विशेष स्थान दिया गया है। यहां आने वाले लोग संविधान के मूल्यों के प्रति नमन करते हैं और लोकतंत्र की मजबूती के लिए प्रार्थना करते हैं। यह मंदिर खासतौर पर युवाओं और छात्रों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है।
- संविधान मंदिर में दर्शन का समय- प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक रहता है, हालांकि विशेष आयोजनों के दौरान समय में बदलाव हो सकता है। 26 जनवरी को यहां संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ, चर्चा और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- कैसे पहुंचें- केरल के तिरुवनंतपुरम सेंट्रल रेलवे स्टेशन से इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इस रेलवे स्टेशन से आप टैक्सी कर सकते हैं। वहीं अगर आप सड़क मार्ग से आ रहे हैं तो कुडाप्पनक्कुन्नु क्षेत्र में पहुंचने के बाद आप संविधान मंदिर पहुंच सकते हैं।
- कब जाएं- यहां पर आप कभी भी दर्शन के लिए जा सकते हैं।
केरल का यह संविधान मंदिर यह दिखाता है कि आस्था केवल धार्मिक नहीं होती, बल्कि विचारों और मूल्यों के प्रति भी हो सकती है। यहां पूजा का अर्थ है संविधान को समझना, उसके अधिकारों और कर्तव्यों को अपनाना। यही कारण है कि यह मंदिर भारत के बौद्धिक और लोकतांत्रिक विकास का प्रतीक माना जाता है।

वाराणसी का भारत माता मंदिर
वाराणसी का भारत माता मंदिर
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित भारत माता मंदिर भारत के सबसे अनोखे और ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है। यह मंदिर काशी विद्यापीठ परिसर में स्थित है और इसका निर्माण स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े महान व्यक्तित्व बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने कराया था। इस मंदिर का उद्घाटन महात्मा गांधी ने वर्ष 1936 में किया था, जो इसे ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है।
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां किसी देवी-देवता की मूर्ति नहीं है। मंदिर के गर्भगृह में मकराना संगमरमर से बना अखंड भारत का त्रिआयामी नक्शा स्थापित है। इसमें भारत की नदियां, पर्वत, पठार, समुद्री तट और सीमाएं बेहद सटीक रूप से दर्शाई गई हैं। यह नक्शा भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।
- भारत माता मंदिर में दर्शन का समय- प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक रहता है। 26 जनवरी और 15 अगस्त को यहां विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें देशभक्ति गीत, प्रार्थना और राष्ट्र एकता पर विचार गोष्ठियां शामिल होती हैं।
- कैसे पहुंचें- बनारस रेलवे स्टेशन से आप महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ जाएं। इसी प्रांगण में यह मंदिर स्थित है। यहां आप टैक्सी आदि के माध्यम से पहुंच सकते हैं।
- कब जाएं- यहां पर भी आप कभी भी जा सकते हैं, यहां आपको सांस्कृतिक धरोहर देखने को मिलेगी।
वाराणसी का भारत माता मंदिर यह सिखाता है कि भारत माता की पूजा का अर्थ है देश की भूमि, संस्कृति और विविधता का सम्मान करना। यहां आने वाले श्रद्धालु नक्शे के सामने खड़े होकर पूरे भारत को एक इकाई के रूप में देखने का अनुभव करते हैं।

हरिद्वार का भारत माता मंदिर
हरिद्वार का भारत माता मंदिर
उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित भारत माता मंदिर अपनी भव्य आठ मंजिला संरचना के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर की स्थापना स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि द्वारा कराई गई थी। यह मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाने वाला एक विशाल केंद्र है।
इस मंदिर की अलग-अलग मंजिलों पर शक्ति, विष्णु, ज्ञान, योग और भारत के महान संतों व स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित मंदिर बने हुए हैं। यहां देवी-देवताओं के साथ-साथ महापुरुषों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो यह दर्शाती हैं कि भारत की आत्मा आध्यात्मिकता और बलिदान से बनी है।
- हरिद्वार के भारत माता मंदिर में दर्शन का समय- प्रातः 8 बजे से सायं 5 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहता है। राष्ट्रीय पर्वों पर यहां विशेष पूजा, दीप प्रज्वलन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- कैसे पहुंचें- हरिद्वार पहुंचने के बाद आप स्थानीय ऑटो या टैक्सी से इस मंदिर तक पहुंच सकते हैं। यह हरिद्वार रेलवे स्टेशन से करीब 5 से 7 किमी दूर है।
- कब जाएं- यह मंदिर हर दिन खुला रहता है, लेकिन 15 अगस्त और 26 जनवरी पर यहां विशेष आयोजन होते हैं।
26 जनवरी पर विशेष आयोजन और पूजा
26 जनवरी के दिन संविधान मंदिरों और भारत माता मंदिरों में विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है। इस दिन संविधान मंदिरों में प्रस्तावना का पाठ, शपथ ग्रहण और लोकतांत्रिक मूल्यों पर चर्चा होती है। वहीं भारत माता मंदिरों में राष्ट्र की अखंडता, शांति और समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं।इस दिन का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि यह याद दिलाना होता है कि संविधान और मातृभूमि दोनों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।
राष्ट्र सेवा ही है पूजा
संविधान मंदिर और भारत माता मंदिर मिलकर यह संदेश देते हैं कि भारत की आत्मा उसके संविधान में बसती है और उसकी पहचान उसकी भूमि और संस्कृति से जुड़ी है। ये मंदिर आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाते हैं कि सच्ची देशभक्ति अधिकारों के साथ कर्तव्यों को निभाने में है और राष्ट्र की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।