Holika Pujan Timings (होलिका पूजन का समय): होलिका दहन हिन्दू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो रंगों के त्योहार होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन की कथा का संबंध प्रह्लाद, हिरण्यकश्यप और होलिका से जुड़ा है। इसे फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 02 मार्च की शाम 5 बजकर 45 मिनट से होगी, जिसका समापन 3 मार्च को शाम 5 बजे होगा। आज होलिका दहन मनाया जाएगा तो यहां से आप जान लें कि होलिका की पूजा कितने बजे होगी, आज भद्रा का समय क्या है, ये आप यहां से जान सकते हैं।
होलिका पूजन मुहूर्त 2026-
आज होलिका की पूजा शाम लगभग 06:19 बजे से रात लगभग 08:30 बजे तक की जा सकती है। होलिका की पूजा के लिए लगभग 2 घंटे 11 मिनट का समय मिल रहा है।
कब से कब तक रहेगी भद्रा?
आज भद्रा का प्रांरभ शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगा और अगले दिन यानी 3 मार्च को सुबह 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 2 मार्च की पूरी रात भद्रा का साया रहने वाला है।
होलिका की पूजा में क्या-क्या सामान लगता है?
- नारियल
- दूध
- फूल
- कच्चा सूत
- घी
- चंदन
- अक्षत
- कपूर
- मौसमी फल
- 7 तरह के पकवान
- नई फसल (गेंहू की बालियां)
होलिका पूजा मंत्र-
- ओम होलिकायै नम:
- ओम प्रह्लादाय नम:
- ओम नृसिंहाय नम:
होलिका की पूजा कैसे की जाती है?
होलिका की पूजा करने हुए पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह रखें। नृसिंह भगवान और प्रह्लाद को प्रणाम करें। फिर होलिका में पानी, दूध और घी की कुछ बूंदें डालें। अब चंदन, अक्षत और फूल सहित सभी पूजा की सामग्री अर्पित करें। अब नारियल, मौसमी फल, नई फसल और घर में बने 7 तरह के पकवान चढ़ाएं। होलिका दहन में रखे उपले और लकड़ियों पर घी-कपूर रखें। अब होलिकायै नम: बोलें, प्रणाम करें। तीन फेरे लगाएं और कच्चा सूत लपेटें। जब होलिका दहन हो जाए तो होली की राख माथ पर लगाकर धूलि वंदन करें।
