अध्यात्म

Holika Dahan Vrat Katha: फाल्गुन पूर्णिमा पर जरूर पढ़ें विष्णु भक्त प्रह्लाद की ये पावन कथा

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Mar 7, 2023, 12:27 PM IST

Holika Dahan (Phalgun Purnima) Katha: होलिका दहन और फाल्गुन पूर्णिमा की कथा भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद से जुड़ी है। जानिए होलिका दहन की पावन कथा।

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होलिका दहन व्रत कथा

Holika Dahan (Phalgun Purnima) Katha: फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है। ये त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं अनुसार ये वही दिन है जब हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की थी लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका खुद अग्नि में जल गई थी। यही वजह है कि इस दिन अग्नि देव की भी पूजा की जाती है। जानिए होलिका दहन की कथा।

Phalgun Purnima (Holika Dahan) Katha: फाल्गुन पूर्णिमा और होलिका दहन कथा

नारद पुराण के अनुसार हिरण्यकश्यप नामक एक राक्षस था। वो खुद को ईश्वर से भी बड़ा समझता था और चाहता था कि हर कोई उसकी ही पूजा करे। लेकिन उसका खुद का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप को ये बात बिल्कुल भी पसंद नहीं थी कि उनका पुत्र भगवान विष्णु की भक्ति करें। इसी बात को लेकर उसने अपने पुत्र को भगवान की भक्ति से हटाने के लिए लाख कोशिश की लेकिन भक्त प्रह्लाद प्रभु की भक्ति को नहीं छोड़ पाए।

अपने आप को हारता हुआ देख हिरण्यकश्यप ने अपने ही बेटे को जान से मारने का विचार कर लिया। लेकिन राक्षस हिरण्यकश्यप इसमें भी सफल नहीं हो पाया। बार बार मारने के प्रयास होने पर भी वह प्रभु-कृपा से बचता रहा। इसके बाद अत्याचारी हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से मदद ली जिसे ये वरदान प्राप्त था कि उसे आग कभी जला नहीं सकेगी। प्रह्लााद को गोद में लेकर होलिका चिता पर बैठ गई।

परन्तु होलिका का आग में न जलने का वरदान उस समय समाप्त हो गया जब उसने प्रह्लाद का वध करने का प्रयत्न किया। प्रह्लाद को अग्नि में लेकर बैठी होलिका खुद जलकर भस्म हो गई वहीं भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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