अध्यात्म

हनुमान जी के भजन Lyrics: कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम...हनुमान जन्मोत्सव के भजन यहां देखें

Hanuman Ji Ke Bhajan (हनुमान जी के भजन): आज यानी 12 अप्रैल 2025 को हनुमान जयंती का पावन पर्व है। कहते हैं इस दिन भगवान हनुमान की पूजा करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस शुभ दिन पर देखें हनुमान जी के भजन।

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Hanuman Ji Ke Bhajan

Hanuman Ji Ke Bhajan (हनुमान जी के भजन): भगवान हनुमान के जन्मोत्सव को ही हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। बता दें हनुमान जी का जन्मदिन चैत्र पूर्णिमा को आता है। इस दिन श्रद्धालु बजरंगबली की उपासना करते हैं। बता दें कि हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त हैं और उनकी पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सारे संकट और बाधाओं का निवारण हो जाता है। कहते हैं कि हनुमान जी की पूजा करने से भक्तों को हर भय और पीड़ा से मुक्ति मिलती है। चलिए आपको बताते हैं हनुमान जयंती के भजन।

Hanuman Ji Ke Bhajan (हनुमान जी के भजन)

  • राम के रंग में रंगा हुआ है, अंजनीसुत बजरंग बाला
  • है राम का आज्ञाकारी, है शंकर का अवतारी
  • मेरे सीने में बसे है, जानकी संग राम जी
  • सांवेर की धरती
  • जन जन का उद्धार, करेगी राम कथा
  • मेरे राम दुलारे बजरंगी, तेरा डंका जग में बाज रहा
  • अंजनीसुत केसरी नंदन ने

वीर हनुमाना अति बलवाना - भजन (Veer Hanumana Ati Balwana)

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

जो कोई आवे, अरज लगावे,

सबकी सुनियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

जो कोई आवे, अरज लगावे,

सबकी सुनियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

बजरंग बाला फेरू थारी माला,

संकट हरियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

बजरंग बाला फेरू थारी माला,

संकट हरियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

ना कोई संगी, हाथ की तंगी,

जल्दी हरियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

ना कोई सांगी, हांत की तंगी,

जल्दी हरियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

अर्जी हमारी, मर्ज़ी तुम्हारी,

कृपा करियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

अर्जी हमारी, मर्ज़ी तुम्हारी,

कृपा करियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

रामजी का प्यारा, सिया का दुलारा,

संकट हरियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

रामजी का प्यारा, सिया का दुलारा,

संकट हरियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

वीर हनुमाना अति बलवाना,

राम नाम रसियो रे,

प्रभु मन बसियो रे ।

कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम

कीजो केसरी के लाल मेरा छोटा सा यह काम

मेरी राम जी कह देना जय सियाराम

मैं राम संग जपता तुम्हारा सदा नाम

अपने राम जी से कह देना जय सिया राम

दीन हीन के सहारे महावीर तुम हो

अपने भक्तो की जगाते तकदीर तुम हो

हर दुखिया का हाथ तुम लेते हो थाम

मेरे राम जी से कह देना जय सियाराम

महाबली महायोधा महासंत तुम हो

लाते सूखे हुए बागो में बसंत में तुम हो

तेरी भक्ति से आत्मा को मिलता आराम

मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम

पूरी सदा ही हमारी हर आस करना

बाबा भक्तो को कभी ना निराश करना

दोनों चरण तुम्हारे हैं ‘लख्खा’ के सुखदाम

मेरी राम जी से कह देना जय सियाराम

राम ना मिलेगे हनुमान के बिना - भजन (Bhajan: Ram Na Milege Hanuman Ke Bina)

पार ना लगोगे श्री राम के बिना,

राम ना मिलेगे हनुमान के बिना।

राम ना मिलेगे हनुमान के बिना,

श्री राम ना मिलेंगे हनुमान के बिना।

वेदो ने पुराणो ने कह डाला,

राम जी का साथी बजरंग बाला।

जीये हनुमान नही राम के बिना,

राम भी रहे ना हनुमान के बिना।

जग के जो पालन हारे है,

उन्हे हनुमान बड़े प्यारे है।

कर लो सिफ़ारिश दाम के बिना,

रास्ता ना मिलेगा हनुमान के बिना।

जिनका भरोसा वीर हनुमान,

उनका बिगड़ता नही कोई काम।

लक्खा कहे सुनो हनुमान के बिना,

कुछ ना मिलेगा गुणगान के बिना

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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