Gupt Navratri Navmi 2026: कौन हैं मां मातंगी और कैसा है मां का स्वरूप, गुप्त नवरात्रि की नवमी पर कैसे करें मां मातंगी का पूजन?
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 27, 2026, 07:21 AM IST
Gupt Navratri Navmi 2026: गुप्त नवरात्रि की नवमी को मां मातंगी और मां कमला का पूजन किया जाता है। इसमें मां मातंगी नवमी महाविद्या मानी जाती है। मां का स्वरूप विपत्तियों का नाश करने वाला है। आइए जानते हैं कि इस दिन माता का पूजन कैसे करें और मा मातंगी की उत्पत्ति की पौराणिक कथा क्या है?
मां मातंगी की पूजा कैसे करें
Gupt Navratri Navmi 2026: गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना और महाविद्याओं की उपासना का विशेष पर्व माना जाता है। माघ माह की गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर मां मातंगी और मां कमला की पूजा का खास महत्व होता है। वर्ष 2026 में यह तिथि 27 जनवरी, मंगलवार को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन मां मातंगी की आराधना करने से साधक को वाणी, विद्या और आकर्षण शक्ति की प्राप्ति होती है, वहीं मां कमला की पूजा से धन और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। गुप्त नवरात्रि में की जाने वाली साधना सामान्य नवरात्रि की तुलना में अधिक गूढ़ और प्रभावशाली मानी जाती है।
कौन हैं मां मातंगी?
मां मातंगी दस महाविद्याओं में नवमी महाविद्या हैं। उन्हें तंत्र विद्या, वाणी, संगीत, कला और ज्ञान की देवी माना जाता है। मां मातंगी को सरस्वती का तांत्रिक स्वरूप भी कहा जाता है। वे साधक को वाणी पर नियंत्रण, विचारों में स्पष्टता और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं। शास्त्रों में उन्हें उच्छिष्ट मातंगी या उच्छिष्ट चांडालिनी भी कहा गया है, जो यह दर्शाता है कि वे सामाजिक बंधनों से परे चेतना के उच्च स्तर का प्रतीक हैं।
मां मातंगी का स्वरूप और महत्व
मां मातंगी का स्वरूप अत्यंत रहस्यमय और आकर्षक माना गया है। उनका वर्ण श्याम या हरे रंग का बताया गया है और वे सिंह पर विराजमान होती हैं। उनके हाथों में वीणा, खड्ग, पाश और अंकुश शोभायमान रहते हैं। मां मातंगी का महत्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि वे वाणी और अभिव्यक्ति की देवी हैं। उनकी कृपा से व्यक्ति की बोली में प्रभाव आता है और उसके शब्द लोगों के मन को प्रभावित करने लगते हैं। साधना के मार्ग पर चलने वाले लोगों के लिए मां मातंगी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
मां मातंगी की पूजा विधि
गुप्त नवरात्रि की नवमी पर मां मातंगी की पूजा एकांत और शांत वातावरण में करना श्रेष्ठ माना जाता है। पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और पूजा स्थान को पवित्र किया जाता है। मां मातंगी को हरे रंग के वस्त्र, हरे पुष्प, चावल, गुड़ और फल अर्पित किए जाते हैं। दीपक प्रज्वलित कर ध्यानपूर्वक देवी का स्मरण किया जाता है और मंत्र जाप किया जाता है। तांत्रिक परंपरा में मां मातंगी की पूजा सादगी और नियम पालन के साथ की जाती है। मां की पूजा कठोर है, इस कारण गुरु की आवश्यकता होती है।
मां मातंगी के मंत्र
मां मातंगी की उपासना में मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक मां मातंगी के बीज मंत्र और सामान्य मंत्र का जाप करते हैं। ‘ॐ ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः’ और ‘ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा’ मंत्र का जाप कर सकते हैं। इन मंत्रों का जाप श्रद्धा और एकाग्रता के साथ करने से वाणी सिद्धि, विद्या में वृद्धि और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
मां मातंगी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
27 जनवरी 2026 को मां मातंगी की पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:26 से 06:19 तक रहेगा, जबकि प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 05:52 से 07:12 तक माना गया है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:13 से 12:55 तक रहेगा, जो पूजा और साधना के लिए विशेष रूप से श्रेष्ठ माना जाता है। इसके अलावा विजय मुहूर्त दोपहर 02:21 से 03:04 तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 05:54 से 06:20 तक और सायाह्न सन्ध्या शाम 05:56 से 07:16 तक रहेगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग भी सुबह 11:08 से अगले दिन 28 जनवरी सुबह 07:11 तक रहेगा। निशिता मुहूर्त रात 12:07 से 01:00 तक माना गया है, जो विशेष साधना के लिए उपयुक्त है।
मां मातंगी की पूजा से मिलने वाले लाभ
मां मातंगी की पूजा से साधक को कई प्रकार के आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। उनकी उपासना से वाणी में प्रभाव आता है और व्यक्ति अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर पाता है। विद्यार्थियों और कला क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है। मां मातंगी की कृपा से आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक भय तथा संकोच दूर होता है। तांत्रिक साधना में उनकी उपासना से आकर्षण शक्ति और साधना में सफलता प्राप्त होती है।
मां मातंगी की उत्पत्ति की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां मातंगी की उत्पत्ति की कथा अत्यंत रहस्यमय और गूढ़ मानी जाती है। एक समय की बात है, जब भगवान शिव और मां पार्वती कैलाश पर्वत पर विराजमान थे। उसी दौरान देवताओं और ऋषियों ने उनसे प्रार्थना की कि उन्हें दिव्य ज्ञान और जीवन की उन्नति के लिए विशेष कृपा प्राप्त हो। मां पार्वती ने देवताओं की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उनके लिए दिव्य भोजन की व्यवस्था की। सभी देवताओं ने श्रद्धा के साथ वह भोजन ग्रहण किया, लेकिन भोजन के बाद भी उनमें तृप्ति नहीं हुई और उन्होंने पुनः भोजन की इच्छा प्रकट की।
कहा जाता है कि उस समय मां पार्वती के मुख से एक विशेष शक्ति प्रकट हुई, जो उच्छिष्ट से उत्पन्न हुई थी। यही शक्ति आगे चलकर मां मातंगी के रूप में जानी गई। उच्छिष्ट से उत्पन्न होने के कारण उन्हें उच्छिष्ट मातंगी भी कहा गया। यह कथा इस बात का प्रतीक है कि मां मातंगी सामाजिक और बाहरी शुद्धता के नियमों से परे जाकर चेतना और ज्ञान के उच्च स्तर का प्रतिनिधित्व करती हैं। वे यह संदेश देती हैं कि वास्तविक शुद्धता मन, विचार और चेतना की होती है, न कि केवल बाहरी आडंबर की।
एक अन्य कथा के अनुसार एक बार मतंग मुनि ने माता दुर्गा की गहन तपस्या की। माता दुर्गा उनकी तपस्या से प्रसन्न हुईं और वरदान मांगने को कहा तो तब मतंग मुनि ने कहा कि उनकी पुत्री देवी दुर्गा जैसी हो। माता के आशीर्वाद से उनकी पुत्री हुई, जो मातंगी देवी के नाम जानी गईं। शास्त्रों के अनुसार मां मातंगी दस महाविद्याओं में वह देवी हैं जो समाज के उपेक्षित और हाशिए पर खड़े वर्गों की भी अधिष्ठात्री हैं। वे यह दर्शाती हैं कि ज्ञान और शक्ति किसी जाति, वर्ग या नियम की सीमा में बंधी नहीं होती। मां मातंगी का जन्म और स्वरूप इस बात का प्रतीक है कि जो तिरस्कृत या अशुद्ध समझा जाता है, वही कभी-कभी सबसे गहरे सत्य और ज्ञान का स्रोत बनता है।
इसी कारण तांत्रिक परंपरा में मां मातंगी की उपासना को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। उनकी कथा साधक को यह सिखाती है कि जब व्यक्ति बाहरी दिखावे से ऊपर उठकर आत्मिक शुद्धता और चेतना की ओर बढ़ता है, तभी उसे वास्तविक सिद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। मां मातंगी की उत्पत्ति की यह पौराणिक कथा उन्हें केवल देवी ही नहीं, बल्कि चेतना और वाणी की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित करती है।
गुप्त नवरात्रि में मां मातंगी की विशेष उपासना
गुप्त नवरात्रि में मां मातंगी की उपासना विशेष रूप से तांत्रिक साधकों द्वारा की जाती है। इस दौरान साधक एकांत में रहकर मंत्र जाप, ध्यान और साधना करते हैं। माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में मां मातंगी की पूजा शीघ्र फल देने वाली होती है। इसी दिन मां कमला की पूजा भी की जाती है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं। मां मातंगी और मां कमला की संयुक्त उपासना से साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की उन्नति प्राप्त होती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।