Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि की नवमी पर कैसे करें मां कमला का पूजन, जानिए विधि, मंत्र और शुभ मुहूर्त
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Jan 27, 2026, 07:20 AM IST
Gupt Navratri 2026: 27 जनवरी के दिन माघ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। इस दिन गुप्त नवरात्रि की नवमी मनाई जाती है। इस कारण आज के दिन मां मातंगी और माता कमला का पूजन किया जाता है। मां मातंगी नौवीं और मां कमला दसवीं महाविद्या है। आइए जानते हैं मां कमला का पूजन कैसे करें और आज पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
मां कमला की पूजा कैसे करें
Gupt Navratri 2026: आज 27 जनवरी 2026, माघ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है। इस दिन गुप्त नवरात्रि की नवमी पर मां मातंगी के साथ ही मां कमला का भी पूजन किया जाता है। माता कमला को धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। ये महालक्ष्मी का ही स्वरूप हैं। मां दसवीं महाविद्या हैं। मां के पूजन से न केवल आर्थिक सुरक्षा मिलती है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समग्र समृद्धि भी आती है।
कौन हैं मां कमला?
मां कमला दस महाविद्याओं में से एक हैं और उन्हें लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। उन्हें सौंदर्य, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी कहा जाता है। माता कमला का पूजन करने से जीवन में धन-धान्य की प्राप्ति होती है, घर में सुख-शांति रहती है और व्यक्ति का व्यवसाय या नौकरी में उन्नति होती है। गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर उनका पूजन विशेष महत्व रखता है।
मां कमला का स्वरूप और महत्व
मां कमला का स्वरूप अत्यंत सुंदर और भक्तिमय है। वे कमल के पुष्प पर विराजमान होती हैं और लाल या गुलाबी वस्त्र धारण करती हैं। उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें से दो हाथ वर और अभय मुद्रा में होते हैं और बाकी दो हाथ में कमल का पुष्प और धन का प्रतीक होता है। उनका पूजन करने से आर्थिक समृद्धि, सामाजिक प्रतिष्ठा और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। गुप्त नवरात्रि में उनकी विशेष पूजा से घर-परिवार में सुख-शांति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
मां कमला की पूजा विधि
मां कमला की पूजा करने के लिए सबसे पहले स्वच्छ स्थान पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाकर उनकी प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उनके सामने दीपक और अगरबत्ती प्रज्वलित करें। पूजा में सप्तश्लोकी महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। भक्त संकल्प लेकर माता के सामने कमल के पुष्प, अक्षत, सुपारी और लाल फूल अर्पित करें। पूजा के दौरान ध्यान और मंत्र जाप करना विशेष लाभकारी होता है। शाम को दीपक घुमाकर आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
मां कमला देवी की पूजा के लिए मंत्र
मां कमला के मंत्र का जाप करने से धन-धान्य की प्राप्ति, व्यापार में लाभ और जीवन में स्थिरता आती है। मां के मंत्रों में ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं क्लीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः’, ‘ॐ नमः कमलवासिन्यै स्वाहा’, ‘ॐ श्रीं ह्रीं कमले देव्यै नमः’ आदि हैं। मां की पूजा में इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
मां कमला की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
मां कमला की पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह के ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होता है, जो सुबह 05:26 बजे से 06:19 बजे तक रहता है। इस समय पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है और देवी की कृपा अधिक प्रबल होती है। इसके बाद प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 05:52 बजे से 07:12 बजे तक है, जिसमें भी पूजा करने से घर-परिवार में सुख और समृद्धि बनी रहती है। दोपहर में अभिजीत मुहूर्त 12:13 बजे से 12:55 बजे तक है और यही समय विजय मुहूर्त का भी प्रारंभिक भाग है, जो दोपहर 02:21 बजे से 03:04 बजे तक रहेगा।
शाम के समय गोधूलि मुहूर्त शाम 05:54 बजे से 06:20 बजे तक और सायाह्न सन्ध्या शाम 05:56 बजे से 07:16 बजे तक है, जिसमें मां कमला की उपासना करने से धन-संपत्ति और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 11:08 बजे से अगले दिन 07:11 बजे तक और रवि योग भी उसी अवधि में है, जो पूजा को अत्यंत शुभ बनाते हैं। निशिता मुहूर्त रात 12:07 बजे से 01:00 बजे तक है, जिसमें पूजा करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
मां कमला की पूजा से मिलते हैं ये लाभ
मां कमला की पूजा करने से भक्त को धन-धान्य की प्राप्ति, परिवार में सुख-शांति और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। व्यापारी और नौकरीपेशा लोग अपने व्यवसाय या कार्य में लाभ और सफलता का अनुभव करेंगे। उनके घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह रहता है और आर्थिक संकट दूर होते हैं। गुप्त नवरात्रि के दिन उनकी पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।
मां कमला की उत्पत्ति की पौराणिक कथा
मां कमला देवी को हिन्दू धर्म में महाविद्या कमला या कमलात्मिका कहा जाता है। उनका नाम ‘कमला’ इसलिए पड़ा क्योंकि वह कमल के पुष्प पर विराजमान देवी के रूप में प्रकट होती हैं और कमल के समान शुद्धता, सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक हैं।
पौराणिक और धर्मग्रंथों की परंपरा के अनुसार, महाविद्याओं का स्वरूप स्वयं आदि शक्ति / देवी पाराशक्ति का प्रसार है, जो संसार की विविध आवश्यकताओं, शक्तियों और सृष्टि के रूपों को समाहित करती है। दस महाविद्याओं के अन्तिम स्वरूप के रूप में कमला का स्थान यह दर्शाता है कि आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ भौतिक अस्तित्व और समृद्धि का संतुलन भी देवी के चरणों में है।
पुराणों और तंत्र परंपरा में कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय, जब देवताओं और असुरों ने अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र का मंथन किया, तब चौदह रत्नों सहित देवी लक्ष्मी भी प्रकट हुईं। विष्णु पुराण और भागवत पुराण के वर्णन के अनुसार, समुद्र मंथन से निकलते ही देवी लक्ष्मी ने कमल के पुष्प पर विराजमान हो कर दर्शन दिए, और उसी कारण उन्हें ‘कमला’ कहा गया। मां की पूजा से धन, सौभाग्य, ऐश्वर्य और समृद्धि का वरदान प्राप्त होता है।
महाविद्या कमला का यह रूप लक्ष्मी का तांत्रिक एवं गूढ़ स्वरूप माना जाता है, जो केवल भौतिक धन ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक समृद्धि, मनोबल और जीवन के संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। वे न केवल धन-धान्य और वैभव देती हैं, बल्कि व्यक्ति को अपने कर्म, विचार, और लक्ष्यों में स्पष्टता और शक्ति प्रदान करती हैं।
कई तंत्र ग्रंथों में कमला को आदि शक्ति का पूर्ण अभिव्यक्ति स्वरूप कहा गया है। दस महाविद्याओं की कथा में, देवी पाराशक्ति कई रूपों में प्रकट होती हैं ताकि संसार के हर प्रकार के भौतिक और आध्यात्मिक कार्यों में संतुलन और समता बनी रहे। कमला की उपासना इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि वे विश्व की जीवन-शक्ति, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं, जिनके बिना न जीवन की भौतिक संपदा सम्पूर्ण होती है, न ही व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास होता है।
देवी कमला का वर्णन कई धर्मग्रंथों में मिलता है, लेकिन विशेष रूप से तंत्र और श्रीविद्या परंपरा में उनका वर्णन विस्तार से मिलता है। इस परंपरा के अनुसार, कमला के प्रकट होने का अर्थ है आध्यात्मिक चेतना को भौतिक जीवन के साधनों के साथ संतुलित करना, ताकि व्यक्ति अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता और सिद्धि प्राप्त कर सके।
माना जाता है कि मां कमला की पूजा करने से न केवल धन, योग्यता और श्रेष्ठता प्राप्त होती है, बल्कि व्यक्ति को जीवन के हर क्षेत्र में वास्तविक स्थिरता, आत्मविश्वास और संतोष का अनुभव भी मिलता है। यही कारण है कि गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर मां कमला की उपासना को विशेष लाभकारी और फलदायी माना जाता है।
गुप्त नवरात्रि में मां कमला की विशेष उपासना
गुप्त नवरात्रि की नवमी के दिन मां मातंगी के साथ-साथ मां कमला का पूजन भी किया जाता है। इस दिन देवी के पूजन से घर में धन, ऐश्वर्य और सुख-शांति का प्रवाह बढ़ता है। भक्त देवी के चित्र या प्रतिमा के सामने दीपक प्रज्वलित कर, महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करते हैं और कमल के पुष्प, लाल फूल और प्रसाद अर्पित करते हैं। इस दिन की विशेषता यह है कि देवी के पूजन से सकारात्मक ऊर्जा और आर्थिक समृद्धि दोनों ही मिलती हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।