Gupt Navratri 2026: साल 2026 में गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी 2026 दिन सोमवार से हो रही है। यह नवरात्रि माघ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होंगी और 28 जनवरी 2026, सोमवार को नवमी तिथि के साथ समाप्त होंगी। इस तरह माघ गुप्त नवरात्रि पूरे 9 दिन तक रहेंगी। गुप्त नवरात्रि का समय साधना, मंत्र जाप और तांत्रिक उपासना के लिए बेहद खास माना जाता है, इसलिए इस दौरान देवी शक्ति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
गुप्त नवरात्रि क्यों होती हैं खास?
गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से अलग मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें पूजा-पाठ को गुप्त रूप से किया जाता है। मान्यता है कि इस दौरान की गई साधना सीधे देवी तक पहुंचती है और साधक को मानसिक, आर्थिक और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। गुप्त नवरात्रि में पूजा विशेष रूप से तंत्र साधना, सिद्धि प्राप्ति, ग्रह दोष शांति और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए की जाती हैं। इसी कारण ज्योतिष, तंत्र और साधना मार्ग से जुड़े लोग इन नवरात्रियों को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं।
साल में कितनी नवरात्रि आती हैं और कितनी होती हैं गुप्त?
हिंदू पंचांग के अनुसार साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं। इनमें से दो नवरात्रि गुप्त होती हैं और दो सामान्य या प्रकट नवरात्रि होती है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि प्रकट नवरात्रि होती हैं, जिन्हें आम लोग बड़े स्तर पर मनाते हैं। वहीं माघ और आषाढ़ माह की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, जिनमें पूजा सीमित और साधना प्रधान होती है।
गुप्त नवरात्रि में देवी के किन स्वरूपों की पूजा होती है?
गुप्त नवरात्रि में मुख्य रूप से 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। इनमें काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं। इन देवी स्वरूपों की उपासना से साधक को साहस, आत्मबल, शत्रु बाधा से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। विशेष रूप से देवी काली और बगलामुखी की साधना गुप्त नवरात्रि में अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
गुप्त नवरात्रि का पूजन विधि और विधान
गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा विधि साधक की क्षमता और उद्देश्य के अनुसार होती है। सुबह स्नान के बाद शांत स्थान पर देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीपक जलाया जाता है। इसके बाद मंत्र जाप, ध्यान और साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में व्रत रखना अनिवार्य नहीं होता, लेकिन सात्विक भोजन और संयम का पालन करना जरूरी माना जाता है। इस दिन घट स्थापना भी की जाती है। माना जाता है कि इन दिनों की गई साधना से देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
