अध्यात्म

एक दिन की गोवर्धन परिक्रमा या 84 कोस की ब्रज यात्रा, अधिकमास में किसका क्या है महत्व

ज्येष्ठ अधिकमास यानी पुरुषोत्म मास चल रहा है। इस महीने में व्रज की 84 कोस यात्रा और गोवर्धन परिक्रमा का विशेष महत्व होता है। आइए विस्तार से जानते हैं चौरासी कोस यात्रा और गोवर्धन यात्रा के बारे में विस्तार से।

Image

ब्रज की यात्रा

Braj Yatra: इस समय ज्येष्ठ अधिकमास चल रहा है। अधिकमास (Adhik Maas 2026) को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जिसे सनातन परंपरा में विशेष पुण्यदायी माना गया है। इस पूरे महीने में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की भक्ति का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस दौरान ब्रजभूमि में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। कोई एक दिन में पूरी होने वाली गोवर्धन परिक्रमा करता है, तो कोई कई दिनों तक चलने वाली 84 कोस ब्रज परिक्रमा की महायात्रा पर निकल पड़ता है। इसके साथ ही अक्सर श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठता है कि अधिकमास में गोवर्धन परिक्रमा अधिक फलदायी है या फिर 84 कोस ब्रज परिक्रमा? तो आपको बता दें कि दोनों यात्राओं का अपना अलग महत्व, उद्देश्य और आध्यात्मिक अनुभव है। इन्हें समझे बिना तुलना करना उचित नहीं होगा। तो चलिए विस्तार से जानते हैं गोवर्धन परिक्रमा और ब्रज 84 कोस यात्रा का महत्व।

गोवर्धन परिक्रमा का महत्व

गोवर्धन परिक्रमा उन लोगों के लिए विशेष मानी जाती है जो कम समय में ब्रज की भक्ति का अनुभव करना चाहते हैं। अधिकमास में लाखों श्रद्धालु सुबह से ही राधे-राधे और गिरिराज महाराज की जय के जयकारों के साथ परिक्रमा मार्ग पर निकल पड़ते हैं। इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एक दिन में पूरा किया जा सकता है। कई श्रद्धालु नंगे पैर चलते हैं, कुछ दंडवत परिक्रमा करते हैं और कुछ भजन-कीर्तन करते हुए पूरी यात्रा संपन्न करते हैं। माना जाता है कि गोवर्धन की परिक्रमा करने से भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

ब्रज 84 कोस परिक्रमा

यदि गोवर्धन परिक्रमा भक्ति की एक सुंदर झलक है, तो 84 कोस ब्रज परिक्रमा उस पूरी आध्यात्मिक कथा का विस्तृत अनुभव है। लगभग 252 किलोमीटर में फैली यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि श्रीकृष्ण के सम्पूर्ण ब्रज जीवन को महसूस करने का अवसर है। 84 कोस परिक्रमा में मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, गोकुल, महावन, बलदेव और अन्य अनेक लीलास्थलों का दर्शन कराया जाता है। श्रद्धालु इस यात्रा को 10-15 दिन तक पैदल चलकर इन पवित्र स्थलों की परिक्रमा करते हैं और श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं से जुड़े स्थानों का अनुभव प्राप्त करते हैं।

क्यों कहा जाता है इसे महायात्रा

ब्रज 84 कोस परिक्रमा को महायात्रा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह केवल शरीर की नहीं, बल्कि मन, विचार और आत्मा की भी परीक्षा होती है। कई दिनों तक पैदल चलना, साधारण जीवन जीना, सत्संग सुनना और निरंतर नामस्मरण करना इस यात्रा का हिस्सा है। धार्मिक मान्यता है कि परिक्रमा को करने से 84 लाख योनियों के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए अधिकमास में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस अवधि में की गई परिक्रमा विशेष पुण्य प्रदान करती है।

यदि आपके पास समय कम है और शारीरिक क्षमता सीमित है या आप पहली बार ब्रज आ रहे हैं, तो गोवर्धन परिक्रमा एक बेहतर विकल्प हो सकती है। वहीं यदि आप ब्रज की संपूर्ण आध्यात्मिक परंपरा, संस्कृति और श्रीकृष्ण की लीलाओं को गहराई से अनुभव करना चाहते हैं, तो 84 कोस परिक्रमा एक अविस्मरणीय यात्रा साबित हो सकती है।

धर्मशास्त्रों और संतों की दृष्टि में दोनों यात्राएं अपने-अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं। महत्वपूर्ण यह नहीं कि आपने कितनी दूरी तय की, बल्कि यह है कि आपने कितनी श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ अपनी यात्रा पूरी की है।

gulshan kumar
गुलशन कुमार author

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लो... और देखें

End of Article