Gangaur Puja Samagri List (गणगौर पूजन सामग्री): हर सालचैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गणगौर का त्योहार मनाया जाता है। ये पर्व मुख्य रूप से हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इस साल ये खास दिन 21 मार्च, शनिवार के दिन है। इस पूजा के लिए महिलाएं बालू और मिट्टी से शिव-पार्वती (ईसर-गौरा) की प्रतिमा का निर्माण करके उनका सम्पूर्ण श्रृंगार करती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूरी विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। गणगौर की पूजा में कई तरह के सामान की जरूरत भी पड़ती है। यहां से आप पूजा के सभी सामान की लिस्ट नोट कर सकते हैं। देखें गणगौर की पूजा में क्या- क्या सामान लगता है।
गणगौर पूजा सामग्री लिस्ट-
तांबे का कलश
काली मिट्टी या होली की राख
गणगौर माता की प्रतिमा
दो मिट्टी के बर्तन
मिट्टी के दीये
कुमकुम
चावल
हल्दी
मेहंदी
गुलाल
अबीर
काजल
लकड़ी की चौकी/बाजोट/पाटा
लाल या पीले रंग का कपड़ा
घी
पूजा थाली
फूल
घास
दो मिट्टी के कुंडे/गमले
आम के पत्ते
पानी से भरा बर्तन
पान के पत्ते
बेताल और अशोक के पत्ते
गणगौर के कपड़े
गेहूं
लकड़ी की टोकरी
नारियल
मिठाई
चावल
मूंग
माता की चुनरी
गणगौर उद्यापन सामग्री-
- हलवा
- साड़ी
- सुहाग या सोलह श्रंगार का समान
- पुरी
- गेहूं
- आटा गुण
- हरी घास
गणगौर पूजा में गुने क्या होते हैं?
गणगौर पूजा के दिन महिलाएं मैदा, बेसन और आटे में हल्दी मिलाकर माता पार्वती के लिए गहने बनाती हैं। इन गहनों को गुने के नाम से जाना जाता है। कहते हैं गणगौर के दिन स्त्रियां जितने गुने माता पार्वती को अर्पित करती हैं उतना ही अधिक उनके परिवार का धन और वैभव बढ़ता है। पूजन की समाप्ति के बाद महिलायें ये गुने अपनी सास, ननद, देवरानी या फिर जेठानी को दे देती हैं।
गणगौर पूजा का महत्व-
गणगौर का पर्व पूरे 18 दिनों तक चलता है। लेकिन इस पर्व का आखिरी दिन सबसे महत्वरपूर्ण होता है। इस पर्व को कई जगहों पर गौरी तीज या सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है। ये व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता अनुसार मां पार्वती इस व्रत को करने वाली महिलाओं को सदा सुहागन रहने का वरदान दिया था। इसलिए ही इस व्रत का इतना महत्व माना जाता है।
गणगौर पूजा विधि-
गणगौर व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद देवी गौरी और शिव जी का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें। मिट्टी से ईसर यानी शिवजी और पार्वती स्वरूप गौर की प्रतिमा बनाएं और उसकी विधि विधान स्थापना करें। गणगौर को सुंदर वस्त्र पहनाएं। फिर रोली, मोली, मेहंदी, हल्दी, काजल आदि चीजों से विधि विधान पूजा करें और गणगौर के गीत भी गाएं। फिर घर की दीवार पर या किसी पेपर पर सोलह-सोलह बिंदियां रोली, मेहंदी और काजल से लगाएं। इसके बाद एक थाली में जल, दूध, दही, हल्दी, कुमकुम घोलकर सुहाग जल तैयार कर लें। फिर दोनों हाथ में दूब लेकर सुहागजल पहले गणगौर पर छिड़कें। फिर अपने ऊपर भी इसका छिड़काव करें। फिर गणगौर को मीठे गुने या चूरमे का भोग लगाना है। पूजा के समय गणगौर की कथा भी जरूर सुनें। फिर शाम को शुभ मुहूर्त में गणगौर को पानी पिलाने की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद किसी पवित्र सरोवर या कुंड में गणगौर की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है।
