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Gangaur Puja Geet Lyris: गौर गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती..., यहां देखें गणगौर के गीत मारवाड़ी Lyrics

Gangaur Ke Geet (गणगौर के गीत): गणगौर पूजा का त्योहार मुख्य रूप से राजस्थान में मनाया जाता है। इस साल ये पर्व 31 मार्च को मनाया जाएगा। गणगौर पर्व के कुछ लोकप्रिय गीत हैं जिनके बिना ये पर्व अधूरा माना जाता है। चलिए आपको बताते हैं गणगौर के गीतों के बारे में।

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Gangaur Ke Geet (गणगौर के गीत)

Gangaur Ke Geet (गणगौर के गीत): गणगौर पूजा का त्योहार नवरात्रि के तीसरे दिन मनाया जाता है। ये पर्व राजस्थान, मध्य प्रदेश के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। गणगौर पूजा शादीशुदा महिलाओं के अलावा कुंवारी कन्याओं द्वारा भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का पालन करने से अविवाहित कन्याओं को इच्छित वर की प्राप्ति होती है तो वहीं विवाहित स्त्रियों को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इस पर्व के दौरान महिलाएं कई तरह के गीत गाती हैं। चलिए इसके बारे में यहां विस्तार से बताते हैं।

गणगौर माता के गीत (Gangaur Ke Geet Lyrics In Hindi)

म्हारी गोर तिसांई जी, राज घटियांरो मुकुट करो।

म्हारी गँवरा पानीडो सो पाय घटियांरो मुकुट करो

म्हारी गवर तिसांई ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।

ब्रह्मदास जी रा ईशरदास जी ओ राज घाटयांरो मुकुट करो।

म्हारी गवरा पानीड़ो पिलाय घांटा रो मुकुट करो।

म्हारी गवरा तिसाई ओ राज घांटा रो मुकुट करो।

(इस गीत में बह्मदास जी की जगह पिता और ईशरदास जी की जगह पुत्र का नाम लेना है )

Gaur Gaur Gomati Isar Puje Parvati - गौर गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती

गौर गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती

पार्वती का आला-गीला, गौर का सोना का टीका

टीका दे, टमका दे, बाला रानी बरत करयो

करता करता आस आयो वास आयो

खेरे खांडे लाडू आयो, लाडू ले बीरा ने दियो

बीरो ले मने पाल दी, पाल को मै बरत करयो

सन मन सोला, सात कचौला , ईशर गौरा दोन्यू जोड़ा

जोड़ ज्वारा, गेंहू ग्यारा, राण्या पूजे राज ने, म्हे पूजा सुहाग ने

राण्या को राज बढ़तो जाये, म्हाको सुहाग बढ़तो जाये,

कीड़ी- कीड़ी, कीड़ी ले, कीड़ी थारी जात है, जात है गुजरात है,

गुजरात्यां को पाणी, दे दे थाम्बा ताणी

ताणी में सिंघोड़ा, बाड़ी में भिजोड़ा

म्हारो भाई एम्ल्यो खेमल्यो, सेमल्यो सिंघाड़ा ल्यो

लाडू ल्यो, पेड़ा ल्यो सेव ल्यो सिघाड़ा ल्यो

झर झरती जलेबी ल्यो, हर-हरी दूब ल्यो गणगौर पूज ल्यो

इस प्रकार सोलह बार बोल कर अन्त में बोलें- एक-लो , दो-लो …… सोलह-लो।

गणगौर गीत (Gara Songs)

गारा की गणगौर कुआ पर क्यों रे खड़ी है।

सिर पर लम्बे-लम्बे केश, गले में फूलों की माला पड़ी रे।। गारा की गणगौर...

चल्यो जा रे मूरख अज्ञान, तुझे मेरी क्या पड़ी रे।

म्हारा ईशरजी म्हारे साथ, कुआ पर यूं रे खड़ी रे।। गारा की गणगौर...

माथा ने भांवर सुहाय, तो रखड़ी जड़ाव की रे।

कान में झालज सुहाय, तो झुमकी जड़ाव की रे।। गारा की गणगौर...

मुखड़ा ने भेसर सुहाय, तो मोतीड़ा जड़ाव का रे।

हिवड़ा पे हांसज सुहाय, तो दुलड़ी जड़ाव की रे।। गारा की गणगौर...

तन पे सालू रंगीलो, तो अंगिया जड़ाव की रे।

हाथों में चुड़ला पहना, तो गजरा जड़ाव का रे।। गारा की गणगौर...

पावों में पायल पहनी, तो घुंघरू जड़ाव का रे।

उंगली में बिछिया सुहाय, तो अनवट जड़ाव का रे।। गारा की गणगौर...

Gangaur Ka Geet Odo Kodo (गणगौर का गीत ओड़ो कोड़ो)

ओड़ो कोड़ो छ रावलो ये राई चन्दन को रोख, ये कुण गौरा छै पातला ऐ कुणा माथ ऐ मोल

ईसरदास जी गोरा छ पातला ऐ ब्रह्मा माथे मोल, बाई थारो काई को रूसणो ये काई को सिंगार

बाई म्हारे सोना को रूसणों ऐ मोतिया रो सिंगार, अब जाऊँ म्हारे बाप के ऐ ल्याउली नौसर हार

चौसर हार गढ़ाए ,पाटे पुवाए गोरक सुधों मूंदडो, गोरा ईसरदास जी ब्रह्मदास जी जोगो मूंदडो,

वाकी रानिया होए बाई बेटिया होए आठ गढ़ाए, पाटे पुवाए गोरक सुधो मूंदडो

गोरा चाँद, सूरज, महादेव पार्वती जोगो मूंदडो, गोरा मालन, माली, पोल्या – पोली जोगो मूंदडो मूंदड़ो,

(इस गीत को गाते समय अपने घर वालों के नाम लेने हैं)

Gangaur Ka Geet Badhava (गणगौर का गीत बधावा)

चांद चढ़यो गिरनार, किरत्यां ढल रही जी ढल रही, जा बाई रोवा घरा पधार माऊजी मारेला जी मारेला

बापू जी देवला गाल, बडोड़ो बीरो बरजेलो जी बरजेलो, थे मत दयो म्हारी बाई न गाल,

बाई म्हारी चिड़कोली जी चिड़कोली।

आज उड़ पर बात सवार बाई उड़ ज्यासी जी उड़ ज्यासी, गोरायारं दिन चार जावईडो ले जासी जी ले जासी

(इस गीत के समय घर की बहन बेटियों का नाम लेना है)

Gangaur ka Geet Jwara Ka (गणगौर का गीत ज्वारा का)

म्हारा हरया ए ज्वारा ऐ, गेन्हूला सरस बध्या, गोरा ईसरदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया

गोरा ब्रह्मदास जी रा बायां ऐ वाकी रानी सींच लिया, वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या

बाई रो सरस पोटलों ये, गेंहूडा सरस बध्या, म्हारा हरिया ए ज्वारा ये गेन्हुला सरस बध्या

गोरा चाँद सूरज बाया ये वाकी रानी सींच लिया, वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या

बाई रो सरस पोटलो ये गेन्हुला सरस बध्या, मालीदास जी, पोलीदास जी बाया ऐ वाकी रानी सींच लिया

वे तो सींच न जाने ये आड़ा ऊबा सरस बध्या

(इस गीत के समय अपने सभी घर वालों के नाम लेने हैं )

Sooraj Dev Ko Arak Dene Ka Geet (सूरज को अरक देने का गीत)

अल खल नदी जाय यो पाणी कहा जाय, आदो जाती अणया गलया आदो ईसर न्हासी

ईसर थे घरा पदारो गौरा जायो बैटो, अरदा लाओ परदा ल्याओ बन्दर बाल लगाओ

सार कीए सूई भाभी पाट काए तागा, सीम दरजी बेटा ईसर जी का बागा

सीमा लार सीमा आला मोत्या की लड़-जड़ पोउला थे चालो म्हे आवला।

Odo Kodo Geet (ओड़ो कोड़ो गीत)

ओड़ो कोड़ो छ रावलो ये राई चन्दन को रोख

ये कुण गौरा छै पातला ऐ कुणा माथ ऐ मोल

ईसरदास जी गोरा छ पातला ऐ ब्रह्मा माथे मोल

बाई थारो काई को रूसणो ये काई को सिंगार

बाई म्हारे सोना को रूसणों ऐ मोतिया रो सिंगार

अब जाऊँ म्हारे बाप के ऐ ल्याउली नौसर हार

चौसर हार गढ़ाए ,पाटे पुवाए गोरक सुधों मूंदडो,

गोरा ईसरदास जी ब्रह्मदास जी जोगो मूंदडो,

वाकी रानिया होए बाई बेटिया होए आठ गढ़ाए

पाटे पुवाए गोरक सुधो मूंदडो

गोरा चाँद, सूरज, महादेव पार्वती जोगो मूंदडो

गोरा मालन, माली, पोल्या – पोली जोगो मूंदडो मूंदड़ो,

(अब आपको अपने घर वालों के नाम लेने है )

गणगौर बिदाई गीत (Gangaur Bidai Geet)

गणगौर की बिदाई

पिताजी कि गोद बठी रनुबाई बिनय |

कहो तो पिताजी हम रमवा हो जावा

जावो बेटी रनुबाई रमवा जाओ

लंबो बाजार देखि दौड़ी मत चलजो

उच्चो व्ट्लो देखि जाई मत बठ्जो

परायो पुरुष देखि हंसी मत बोलजो

नीर देखि न चीर मत धोवजो

पाठो देखि न बेटी ,आड़ी मत घसजो

परायो बालो देखि न हाय मत करजो

संपत देखि न बेटी चढ़ी मत चलजो

विपद देखि न बेटी रडी मत बठ्जो

जाओ बेटी राज करजो

देवी गणगौर कि भावपूर्ण बिदाई |

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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