Ganga Maiya Ki Aarti: सभी नदियों में मां गंगा सबसे पवित्र और पूजनीय मानी जाती हैं। यही वजह है कि दूर-दूर से लोग गंगा में स्नान करने के लिए आते हैं। मान्यताओं अनुसार गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के सारे पाप धुल जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान, दान करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसके अलावा इस दिन गंगा आरती करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। यहां देखें गंगा मैया की आरती के लिरिक्स।
श्री गंगा मैया आरती (Ganga Maiya Ki Aarti)
नमामि गंगे ! तव पाद पंकजम्, सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम् ।
भक्तिम् मुक्तिं च ददासि नित्यं, भावानुसारेण सदा नराणाम् ॥
हर हर गंगे, जय माँ गंगे, हर हर गंगे, जय माँ गंगे ॥
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥
चंद्र सी जोत तुम्हारी, जल निर्मल आता ।
शरण पडें जो तेरी, सो नर तर जाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
एक ही बार जो तेरी, शारणागति आता ।
यम की त्रास मिटा कर, परमगति पाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
आरती मात तुम्हारी, जो जन नित्य गाता ।
दास वही सहज में, मुक्त्ति को पाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता ॥
ॐ जय गंगे माता, श्री जय गंगे माता ।
गंगा आरती के लाभ
मान्यताओं अनुसार मां गंगा की आरती करने से जीवन में सुख-शांति आती है। साथ ही जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिल जाती है। विशेष तौर पर इस आरती को गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा के दिन करना शुभ माना जाता है।
