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कब और कैसे करें एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण, यहां जानिए पूरी विधि

Sankashti Chaturthi Parana Vidhi: आज एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा गया है। यह व्रत तब ही पूर्ण माना जाता है, जब इसका पारण सही समय पर विधि से किया जाए।

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Sankashti Chaturthi Parana Vidhi संकष्टी चतुर्थी व्रत पारण विधि

Sankashti Chaturthi Parana Vidhi: आज 5 मई 2026 को एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा गया है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और विशेष रूप से जीवन के संकटों को दूर करने के लिए किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी का महत्व तभी पूर्ण माना जाता है, जब व्रत को सही विधि से पूरा किया जाए और उसका पारण नियमों के अनुसार किया जाए। कई लोग दिनभर उपवास तो रखते हैं, लेकिन पारण की सही प्रक्रिया नहीं जानते, जिससे व्रत का पूरा फल नहीं मिल पाता। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस व्रत का पारण कब और कैसे करना चाहिए।

चंद्रोदय के बाद ही करें पारण

संकष्टी चतुर्थी व्रत की सबसे खास बात यह है कि इसका पारण चंद्र दर्शन के बाद ही किया जाता है। पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम या रात में जब चंद्रमा के दर्शन होते हैं, तभी व्रत खोलना चाहिए। बिना चंद्र दर्शन के पारण करना शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं माना जाता है, इसलिए जरूरी है कि आप अपने शहर के अनुसार चंद्रोदय का सही समय जान लें और उसी के बाद पारण करें। आज चंद्रोदय 10 बजकर 35 मिनट पर हो चुका है।

पारण से पहले करें भगवान गणेश की पूजा (Paran Se Pahle Karen Ganeash ji ki puja)

पारण करने से पहले भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान पर दीपक जलाएं। भगवान गणेश को दूर्वा, सिंदूर, फूल और मिठाई जैसे मोदक या लड्डू अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि

जब चंद्रमा निकल आए, तब एक लोटे में जल लें और उसमें थोड़ा दूध, चावल (अक्षत) और फूल मिलाएं। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय मन में अपनी इच्छाओं को रखें और भगवान से प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देने से जीवन के संकट दूर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।

इस तरह करें व्रत का पारण

चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद भगवान गणेश को चढ़ाया गया प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण किया जाता है। आमतौर पर तिलकुट, गुड़, मोदक या लड्डू खाकर व्रत खोला जाता है। यह प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है और इसे भगवान का आशीर्वाद समझकर लिया जाता है।

पारण के बाद कैसा भोजन करें

व्रत खोलने के बाद सात्विक भोजन करना चाहिए। इस दिन प्याज और लहसुन का सेवन नहीं किया जाता। हल्का और पचने वाला भोजन जैसे खिचड़ी, फल या दूध से बने पदार्थ लेना अच्छा माना जाता है। इससे शरीर को ऊर्जा भी मिलती है और व्रत का प्रभाव भी बना रहता है।

इन बातों का रखें ध्यान

संकष्टी चतुर्थी व्रत में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पारण हमेशा चंद्र दर्शन के बाद ही करें। प्रसाद में गुड़ और तिल का उपयोग करना शुभ माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति बीमार है या पूरा उपवास नहीं रख सकता, तो वह फलाहार करके भी व्रत का पारण कर सकता है। इसके अलावा मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहना भी इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।इस प्रकार अगर आप एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण सही विधि और श्रद्धा के साथ करते हैं, तो भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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