अध्यात्म

एकादशी कल है कि नहीं, परसों कौन सी एकादशी है, फरवरी में कौन-कौन सी एकादशी है?

Ekadahi Kal Hai Ki Nahin: अब एकादशी किस दिन है, इस बात पर काफी ज्यादा कंफ्यूजन चल रही है। एकादशी कल है या परसों, परसों कौन सी एकादशी है, इस तरह के कई सारे सवाल लोगों के मन में आ रहे हैं। यहां से आप एकादशी से जुड़े सभी सवालों के जवाब देख पाएंगे।

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एकादशी कल है कि नहीं, परसों कौन सी एकादशी है (pc: canva)

Ekadahi Kal Hai Ki Nahin: हिंदू धर्म में एकादशी का खास महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। तो अब एकादशी किस दिन है, ये आप यहां से जान सकते हैं। यहां बताया गया है कि एकादशी कल है या परसों। साथ ही फरवरी में कौन-कौन सी एकादशी और पड़ने वाली है, इसकी सारी यहां मौजूद है।

एकादशी कल है कि नहीं?

एकादशी कल नहीं है। अब एकादशी परसों यानी 27 फरवरी, शुक्रवार के दिन है।

परसों कौन सी एकादशी है?

परसों फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। परसों आमलकी एकादशी मनाई जाएगी। इसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं।

फरवरी में कौन-कौन सी एकादशी है?

हर महीने की तरह फरवरी में भी दो एकादशी है। पहली एकादशी यानी विजया एकादशी 13 फरवरी, शुक्रवार के दिन मनाया जा चुका है। वहीं, दूसरी एकादशी यानी आमलकी एकादशी 27 फरवरी, शुक्रवार के दिन है।

आमलकी एकादशी 2026 के मुहूर्त-

फरवरी 27, 2026 को 12:33 ए एम बजे एकादशी तिथि प्रारम्भ हो रही फिर वहीं, फरवरी 27, 2026 को 10:32 पी एम बजे एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी। यहां से आप इस दिन के शुभ मुहूर्त जान सकते हैं-

  • ब्रह्म मुहूर्त- 05:09 ए एम से 05:59 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:11 पी एम से 12:57 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:17 पी एम से 06:42 पी एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:34 ए एम से 06:48 ए एम
  • विजय मुहूर्त -02:29 पी एम से 03:15 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 06:20 पी एम से 07:34 पी एम
  • रवि योग- 06:48 ए एम से 10:48 ए एम
  • सर्वार्थ सिद्धि योग- 10:48 ए एम से 06:47 ए एम, फरवरी 28
  • निशिता मुहूर्त- 12:09 ए एम, फरवरी 28 से 12:58 ए एम, फरवरी 28

आमलकी एकादशी कैसे मनाई जाती है?

आमलकी एकादशी के दिन सबसे पहले सुबह-सुबह उठकर स्नान आदि कर नए कपड़े पहने जाते हैं। फिर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। उन्हें तुलसी तल अर्पित कर ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप किया जाता है। एकादशी की कथा पढ़ी जाती है। फिर आरती कर आखिर में प्रसाद बांटा किया जाता है।

आमलकी एकादशी का महत्व-

आमलकी एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करने और आंवले के वृक्ष की पूजा करने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, आंवले के वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु का वास होता है, इस नाते इसकी पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आंवले के वृक्ष में बुध ग्रह का वास माना जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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