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Diwali Kab Hai 2025: दिवाली की डेट को लेकर कंफ्यूजन कर लें दूर, उज्जैन के आचार्य ने बता दी धनतेरस, नरकचतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज की सही डेट

Diwali, dhanteras, bhaidooj Kab Hai 2025 mei (दिवाली मनाना कब शुभ रहेगा): दीपावली हिंदू धर्म के सबसे बड़े पर्वों में से एक है। इसे देश-विदेश में पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। व्यापारी इस पर्व को अपने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत भी मानते हैं। साल 2025 में दीपावली की डेट को लेकर भारी कन्फ्यूजन है। अब इस संशय को उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य दुर्गेश तारे ने दूर कर दिया है। आइए जानते हैं कि दीपावली कब है?

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क्या है दीपावली 2025 की सही डेट (Pic Credit- Canva)

Diwali, dhanteras, bhaidooj Kab Hai 2025 mei (दिवाली मनाना कब शुभ रहेगा): दीपावली भारत का सबसे बड़ा और पवित्र पर्व है, जिसे पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। व्यापारियों के लिए यह पर्व नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का प्रतीक होता है। इस वर्ष 2025 में दीपावली की तिथि को लेकर पूरे देश में भारी भ्रम की स्थिति है। लोग यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि दीपावली 20 अक्टूबर को मनाई जाए या 21 अक्टूबर को मनाना सही रहेगा। ऐसे में उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य दुर्गेश तारे ने इस संशय को मिटा दिया है।

तिथि को लेकर क्यों है असमंजस?

हर वर्ष दीपावली की तिथि चंद्रमा की गति और अमावस्या तिथि के आधार पर तय की जाती है, लेकिन इस बार पंचांगों में मतभेद के कारण अलग-अलग तिथियां बताई जा रही हैं। आधुनिक समाज में शास्त्रों की सही जानकारी के अभाव में कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है, जिससे दो-दो तिथियां सामने आ जाती हैं।

साल 2025 में दीपावली कब है?

आचार्य दुर्गेश तारे ने विक्रम संवत 2082 के दीपोत्सव पर्व के लिए शास्त्रों का अध्ययन और विद्वानों से चर्चा के बाद कहा कि ‘इस वर्ष दीपावली 20 अक्टूबर 2025 को ही शास्त्रसम्मत है।’

उन्होंने बताया कि शास्त्रों में कहा गया है कि

‘चन्द्रोदयव्यापिनी ग्राह्या तत्पूर्वदिनेव चन्द्रोदयत्याप्तौ पूर्वा।’

अर्थात जिस तिथि में चंद्रोदय व्यापिनी हो, वही तिथि ग्रहण की जानी चाहिए। आचार्य तारे के अनुसार, ‘20 अक्टूबर 2025 को कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि प्रदोष काल में ही है, जो दीपावली पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।’उन्होंने बताया कि अमावस्या तिथि उसी दिन मध्यरात्रि तक भी व्यापिनी है। इस कारण पूरे भारत में दीपावली 20 अक्टूबर को ही मनाना शास्त्रसम्मत होगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि ‘21 अक्टूबर को अमावस्या प्रदोष काल में केवल स्पर्श मात्र है, और वह भी एक घटिका से कम समय के लिए प्राप्त हो रही है। इस कारण 21 अक्टूबर को दीपावली पर्व मनाना उचित नहीं होगा।’

शास्त्र में स्पष्ट कहा गया है कि ‘प्रदोषार्द्धव्यापिनीमुख्या।’

अर्थात जो अमावस्या प्रदोष और अर्धरात्रि दोनों में व्याप्त हो, वही मुख्य होती है। इस कारण 20 अक्टूबर को ही दीपावली पूजन का सही दिन है।

कब है धनतेरस और धनवंतरी जयंती?

आचार्य तारे ने बताया कि प्रदोष व्यापिनी होने के कारण ‘कार्तिक कृष्ण धन त्रयोदशी और धनवंतरी जयंती 18 अक्टूबर 2025 को ही मनाई जानी चाहिए।’

उन्होंने वेद में वर्णित श्लोक को बताते हुए कहा कि

‘कार्तिकेकृष्ण पक्षे त्रयोदश्यां गुरोर्दिने। हस्त नक्षत्र संयुक्ते यामे प्राथमिके निशि।

धन्वंतर्याख्यया चाहं धनंगुप्तमिवादते। अवतीर्णोयतस्तस्मात् सा तिथि सर्वकामदा।’

इसका अर्थ है कि भगवान धनवंतरी का प्रादुर्भाव कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की रात्रि के प्रथम प्रहर में हुआ था, इस कारण उसी तिथि को धनतेरस और धनवंतरी जयंती मनाना शास्त्रसम्मत है।

19 अक्टूबर को करें यम दीपदान

आचार्य तारे के अनुसार, ‘कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी यानी 19 अक्टूबर 2025 को सायंकाल यम दीपदान आदि कार्य किया जाना चाहिए।’ यह दिन नरक चतुर्दशी के रूप में भी जाना जाता है। वहीं, नरकचतुर्दशी कुछ समय तक 20 अक्टूबर को भी रहेगी। इस कारण 20 अक्टूबर की सुबह अरुणोदय काल अभ्यंग स्नान, तत्पश्चात कार्तिक स्नान, यमतर्पण, दीपदान आदि करना श्रेष्ठ है।’

22 अक्टूबर को है गोवर्धन पूजा

दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। आचार्य तारे ने बताया कि गोवर्धन पूजा प्रतिपदा अमावस्या युक्त तिथि में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि-

‘प्रतिपत्संमुखी कार्या या भवेदपराह्निकी।’

अर्थात जब प्रतिपदा तिथि अपराह्न में उपस्थित हो, तभी गोवर्धन पूजा करनी चाहिए। इस वर्ष यह योग 22 अक्टूबर को बन रहा है।

निर्णय सिंधु ग्रंथ में कहा गया है कि

‘प्रातर्गोवर्धनं पूजयेत।’

अर्थात प्रातःकाल में गोवर्धन पूजन, अन्नकूट और गौ पूजन करना शास्त्रसम्मत है।

साल 2025 में कब है भाई दूज और देव उठनी एकादशी

आचार्य तारे ने बताया कि भाई दूज निर्विवाद रूप से 23 अक्टूबर 2025 को मनाई जानी चाहिए। इसके बाद कार्तिक शुक्ल एकादशी यानी 1 नवंबर 2025 को देव प्रबोधिनी एकादशी (देव उठनी एकादशी) का पर्व मनाया जाएगा।

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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