Deepika Padukone Siddhivinayak Mandir: मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर सिर्फ एक प्रसिद्ध गणेश मंदिर नहीं, बल्कि शहर की धार्मिक पहचान का भी अहम हिस्सा है। फिल्मी सितारों से लेकर आम श्रद्धालुओं तक, यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग गणपति के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दीपिका पादुकोण भी इस मंदिर में कई बार नजर आ चुकी हैं। खास बात यह है कि उनकी कई यात्राएं जिंदगी के महत्वपूर्ण पड़ावों से जुड़ी रही हैं। फिल्मों की रिलीज से पहले बप्पा का आशीर्वाद लेने की उनकी तस्वीरें सामने आती रही हैं।
दोनों बेटियों के जन्म से पहले भी पहुंचीं बप्पा के दरबार
दीपिका और रणवीर सिंह ने सितंबर 2024 में अपनी पहली बेटी दुआ के जन्म से ठीक पहले सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन किए थे। 6 सितंबर को दोनों परिवार के साथ मंदिर पहुंचे थे और दीपिका ने हरे रंग की सिल्क साड़ी पहनी थी। इसके दो दिन बाद, 8 सितंबर 2024 को उनकी बेटी दुआ का जन्म हुआ।
सितंबर 2026 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। दूसरी बेटी के जन्म से पहले दीपिका और रणवीर एक बार फिर सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। इस बार दोनों ने बैंगनी रंग के कपड़ों में ट्विनिंग की और बप्पा के दर्शन किए। इसके अगले दिन उनकी दूसरी बेटी के जन्म की खबर सामने आई।
220 साल से ज्यादा पुराना है मंदिर
अब बात उस मंदिर की, जहां हर दिन हजारों आस्थाएं पहुंचती हैं। सिद्धिविनायक मंदिर की पहली स्थापना 19 नवंबर 1801 को हुई थी। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, शुरुआत में यहां काले पत्थर से बनी गणेश प्रतिमा एक छोटी संरचना में स्थापित थी। आज यही मंदिर मुंबई के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है।महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण लक्ष्मण विठ्ठू और उनकी पत्नी देउबाई पाटिल से जुड़ा है और 1801 में इसका निर्माण पूरा हुआ था।
सिद्ध है मंदिर की कहानी
मंदिर से जुड़ी लोकप्रिय कथा में देउबाई पाटिल का नाम खास तौर पर लिया जाता है। मान्यता है कि वह संतानहीन थीं और उनकी इच्छा थी कि गणपति का ऐसा मंदिर बने, जहां संतान की इच्छा रखने वाली महिलाएं प्रार्थना कर सकें। इसी वजह से मंदिर की कहानी में आस्था के साथ मातृत्व की उम्मीद का भाव भी जुड़ा हुआ है।मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि यहां भगवान गणेश की स्वयंभू नहीं, बल्कि विशेष काले पत्थर की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की गणेश प्रतिमा भी अपने आप में अलग है, क्योंकि बाकी जगहों पर गणेश जी की प्रतिमा की सूंड बाई ओर मुड़ी होती है, लेकिन सिद्धिविनायक गणेपति की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है। प्रतिमा के साथ रिद्धि-सिद्धि विराजमान हैं, जबकि गणेश जी के माथे पर तीसरा नेत्र भी दिखाई देता है। इस मंदिर को मनोकामना पूर्ण करने वाले गणपति के रूप में श्रद्धा से देखा जाता है।
