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Chaiti Chhath 2025 Sandhya Arghya Time: कल चैती छठ पर संध्या अर्घ्य का सही समय क्या है, यहां देखें शुभू मुहूर्त और पूजा विधि

Chaiti Chhath 2026 Sandhya Arghya Time: कल 24 मार्च 2026 का चैती छठ पर संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का यह पावन पर्व परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा की कामना के लिए रखा जाता है। यहां जानें चैती छठ संध्या अर्घ्य टाइमिंग, देखें पूजा का शुभ मुहूर्त और छठ व्रत से जुड़े जरूरी नियम।

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चैती छठ 24 मार्च 2026 संध्या अर्घ्य का समय (PC- AI)

Chaiti Chhath 2026 Sandhya Arghya Time: चैत्र महीने में आने वाला चैती छठ आस्था और विश्वास से जुड़ा बहुत खास पर्व माना जाता है। यह व्रत सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है, जिसमें व्रती अपने परिवार की खुशहाली, तरक्की और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। छठ पूजा की सबसे खास बात इसकी सादगी और नियमों का पालन है। इस दौरान लोग पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं और कई घंटों तक कठिन व्रत रखते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया छठ व्रत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है और परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।

24 मार्च 2026 संध्या अर्घ्य का समय

साल 2026 में चैती छठ का संध्या अर्घ्य 24 मार्च, मंगलवार को दिया जाएगा। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्यास्त का समय शाम 6 बजकर 40 मिनट है, इसलिए इसी समय डूबते सूर्य को अर्घ्य देना शुभ रहेगा। छठ पूजा में सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देने की परंपरा है, जिसे बहुत पवित्र माना जाता है। इस समय व्रती जल में खड़े होकर सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। संध्या के समय घाटों पर भक्ति का अलग ही माहौल देखने को मिलता है।

उषा अर्घ्य का समय 2026

छठ पूजा का आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण अर्घ्य उगते सूर्य को दिया जाता है, जिसे उषा अर्घ्य कहा जाता है। साल 2026 में उषा अर्घ्य 25 मार्च को सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर दिया जाएगा। इस अर्घ्य के साथ ही व्रत पूरा होता है। मान्यता है कि उगते सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। व्रती पूरी श्रद्धा के साथ भगवान सूर्य और छठी मैया का आशीर्वाद लेते हैं।

संध्या अर्घ्य की पूजा कैसे की जाती है

संध्या अर्घ्य के दिन व्रती नदी, तालाब या घाट पर जाकर पानी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। पूजा के लिए बांस के सूप में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना और अन्य प्रसाद रखा जाता है। छठ पूजा में साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखा जाता है और प्रसाद भी पूरी शुद्धता के साथ बनाया जाता है। इस दौरान छठी मैया के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। यह पर्व सादगी और आस्था का सुंदर उदाहरण माना जाता है।

संध्या अर्घ्य का धार्मिक महत्व

छठ पूजा में संध्या अर्घ्य का विशेष महत्व माना जाता है क्योंकि इस समय सूर्य देव को धन्यवाद देने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में ऊर्जा, सकारात्मकता और सफलता आती है। सूर्य को जगत का आधार माना गया है, इसलिए उनकी पूजा से स्वास्थ्य बेहतर रहने और जीवन में उन्नति होने की कामना की जाती है। छठ पर्व प्रकृति और सूर्य की उपासना का प्रतीक भी माना जाता है।

छठ व्रत के दौरान किन बातों का रखें ध्यान

छठ व्रत में पवित्रता और नियमों का पालन सबसे जरूरी माना जाता है। व्रती घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं और भोजन पूरी तरह सात्विक बनाया जाता है। पूजा में इस्तेमाल होने वाले बर्तन भी अलग और शुद्ध रखे जाते हैं। मान्यता है कि छठ व्रत पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ करने से छठी मैया का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। व्रत के दौरान मन को शांत रखना और किसी भी तरह के नकारात्मक विचारों से दूर रहना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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