Chaturmas 2026: भगवान विष्णु के भक्तों के लिए चातुर्मास का खास महत्व होता है। इसका हर एक दिन काफी महत्वपूर्ण होता है। अधिकतर लोग चातुर्मास में विशेष रूप से जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार, हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि यानी देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ होता है। आज 25 जुलाई 2026 को देशभर में देवशयनी एकादशी मनाई जा रही है, जिसके कारण चातुर्मास भी आज से शुरू हो गया है। इस बार चातुर्मास कुल 119 दिनों का होगा। इसका समापन 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के दिन होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान दान करना शुभ होता है। इससे न सिर्फ पाप नष्ट होते हैं, बल्कि पुण्य मिलने के कारण जीवन में खुशियां भी बनी रहती हैं। हालांकि, कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिनका चातुर्मास में दान करना अशुभ होता है। ऐसे में मन में सवाल आना स्वाभाविक है कि चातुर्मास में किन चीजों का दान करें और किनका नहीं, जिसका उत्तर आपको यहां पर मिल जाएगा।
चातुर्मास में किन चीजों का दान करें?
पौराणिक शास्त्रों में बताया गया है कि चातुर्मास में अन्न, वस्त्र, दीपक, जल, फल, पुस्तक, भूमि, छाता, चने की दाल, गुड़, शहद, गाय का घी, तुलसी का पौधा, जाप माला और पूजा सामग्री का दान करना शुभ होता है। इन चीजों के दान से न सिर्फ आपको भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होगी, बल्कि शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याएं भी धीरे-धीरे दूर होने लगेंगी। हालांकि, दान से आपको तभी लाभ होगा, जब आप इसे बिना किसी स्वार्थ या इच्छा को पूर्ण करने के लिए करेंगे यानी इसे पूर्ण रूप से गुप्त रखें।
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चातुर्मास में किन चीजों का दान न करें?
शास्त्रों में बताया गया है कि जो लोग चातुर्मास में तामसिक भोजन, काले और नीले रंग की कोई भी वस्तु, नुकीली चीजें, बासी भोजन, चमड़े की वस्तुएं, फटे-पुराने कपड़े, खराब या टूटा सामान, लोहे से बनी वस्तुएं और नशीले पदार्थ का दान करते हैं, उन्हें महापाप लगता है। इसके अलावा हींग का दान भी चातुर्मास के इन 119 दिनों में न करें।
चातुर्मास में इन कार्यों को करने से भी बचें
चातुर्मास में किसी भी तरह का शुभ कार्य न करें और न ही किसी कीमती चीज की खरीदारी करें। साथ ही पैसों के लेनदेन से बचें और खुद को नकारात्मक चीजों से दूर रखें।
डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
