फाल्गुन पूर्णिमा का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद पवित्र माना जाता है। इस तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान और जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से स्नान और दान करने से पापों का क्षय होता है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। लेकिन इस बार फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि ग्रहण के दौरान स्नान और दान कैसे होगा। यहां से आप इसके बारे में विस्तार से जान सकते हैं।
ग्रहण का समय क्या है?
पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च की दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। भारत में चंद्रमा उदय लगभग 06:26 बजे होगा, इसलिए यहां ग्रहण का अंतिम चरण ही दिखाई देगा। अधिकतम ग्रहण का समय शाम 06:33 से 06:40 बजे के बीच रहेगा।
भारत में सूतक कब से लगेगा?
चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है। भारत में 3 मार्च 2026 की सुबह 6:23 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ, भोजन आदि वर्जित माना जाता है। बच्चे, वृद्ध और रोगी पर सूतक के नियम थोड़े शिथिल माने जाते हैं।
फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि क्या है?
पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी।
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन स्नान कैसे करें?
ग्रहण लगने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर कुशा या तुलसी रख दें। ग्रहण खत्म होते ही फिर से स्नान करें। घर की शुद्धि करें, पूजा स्थान साफ करें।
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन दान कैसे करें?
ग्रहण समाप्ति के बाद दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसे में आप फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ग्रहण समाप्त होते ही यानी शाम 5 बजकर 7 मिनट के बाद अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल, धन और फल का दान कर सकते हैं।
