अध्यात्म

नवरात्रि पर कितने बजे करें कलश स्थापना, क्या है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त, जानिए 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए शुभ समय क्या है?

Chaitra Navratri Ghatasthapana ka Shubh Muhurat : चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। इन पूरे 9 दिनों में माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों का पूजन किया जाता है। नवरात्रि की शुरुआत में घट स्थापना की जाती है। आइए कालका पीठ मंदिर के महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत से जानते हैं कि नवरात्रि पर घट स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है और कलश स्थापना कैसे करें?

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कितने बजे करें घट स्थापना?

Chaitra Navratri Ghatasthapana ka Shubh Muhurat : चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहा है। इस दौरान मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की जाती है, जिसमें घट स्थापना यानी कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। बिना कलश स्थापना किए, नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए श्री कालका पीठ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद नाथ अवधूत से जानते हैं कि घट स्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त, विधि और इसका महत्व क्या है?

घट स्थापना का क्या है शुभ मुहूर्त (Ghat Sthapana Ka Shubh Muhurat)

महंत सुरेंद नाथ अवधूत के अनुसार, इस बार नवरात्रि में पहला दिन क्षय हो रहा है, इसलिए घट स्थापना या कलश स्थापना का सही समय चुनना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस बार अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना करना सबसे शुभ रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 तक रहेगा। इसके साथ ही विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। सबसे शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 05 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 53 मिनट तक माना जा रहा है।इस समय में कलश स्थापना करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

क्यों की जाती है घट स्थापना (Ghat Sthapana Kyon Ki Jaati Hai)

महंत सुरेंद नाथ अवधूत के अनुसार नवरात्रि शक्ति की उपासना का पर्व है। इस समय ब्रह्मांड में विशेष योग बनते हैं, जिसके कारण की गई पूजा बहुत फलदायी होती है। घट स्थापना या कलश स्थापना दरअसल मां शक्ति को अपने घर में स्थापित करने का प्रतीक है। कलश को सुख-समृद्धि, ऊर्जा और सकारात्मक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस समय को आयुर्वेद में भी खास माना गया है, क्योंकि इस दौरान बीमारियों का खतरा बढ़ता है। ऐसे में व्रत, संयम और पूजा करने से शरीर और मन दोनों को नई ऊर्जा मिलती है। इसी कारण लोग इस समय घट या कलश स्थापना करके मां की आराधना करते हैं, ताकि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहे।

कैसे करें घट स्थापना (Ghat Sthapana Kaise Karein)

महंत सुरेंद नाथ अवधूत ने बताया कि घट स्थापना यानी कलश स्थापना हमेशा शुद्ध और साफ स्थान पर करनी चाहिए। सबसे पहले पूजा स्थान को साफ करके वहां एक चौकी स्थापित करें। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की जाती है। इसके लिए सबसे पहले घर के मंदिर या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को साफ करके गंगाजल से पवित्र करें और लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। अब एक मिट्टी के बर्तन में साफ मिट्टी डालकर उसमें जौ बोएं और हल्का पानी छिड़क दें।

इसके बाद तांबे या मिट्टी का कलश लें, उस पर रोली से स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें, फिर उसमें जल भरकर सुपारी, सिक्का, हल्दी, अक्षत और दूर्वा डालें। कलश के मुंह पर 5 या 7 आम के पत्ते रखें और ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल स्थापित करें। अब इस कलश को जौ वाले पात्र के ऊपर रखते हुए कलश स्थापना करें।

अंत में गणेश जी का पूजन करें, फिर कलश को माता दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजा करें और दीपक या अखंड ज्योति जलाएं। इस कलश को मां दुर्गा का प्रतीक मानकर उसकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि घट स्थापना करते समय सबसे जरूरी मन की शुद्धता और सच्चा भाव है । दिखावे से नहीं, बल्कि श्रद्धा से की गई पूजा ही फल देती है।

नवरात्रि में संयम और साधना का महत्व (Navratri Mein Sanyam Ka Mahatva)

महंत सुरेंद नाथ अवधूत ने बताया कि नवरात्रि केवल पूजा का समय नहीं है, बल्कि यह संयम और अनुशासन का समय भी है। इस दौरान व्रत रखना, सात्विक भोजन करना और जीवनशैली को सरल बनाना बहुत जरूरी होता है। इससे शरीर को नई ऊर्जा मिलती है और मन भी शांत रहता है। उन्होंने बताया कि जो लोग इस समय नियमों का पालन करते हैं और मां की सच्चे मन से आराधना करते हैं, उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होती है।

सरल भक्ति से भी मिलेगा पूरा फल (Saral Bhakti Ka Mahatva)

महंत सुरेंद नाथ अवधूत के अनुसार हर व्यक्ति बड़े यज्ञ या अनुष्ठान नहीं कर सकता, लेकिन मां को प्रसन्न करने के लिए सच्चा भाव ही सबसे बड़ा उपाय है। उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यक्ति नवरात्रि के दौरान रोज मां को घी, बूरा और पंचमेवा का भोग लगाता है और सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, तो उसे भी उतना ही फल मिलता है जितना बड़े अनुष्ठानों से मिलता है। मां को सरलता, सच्चा भाव और शरणागति सबसे ज्यादा प्रिय है। अगर भक्त इन बातों का पालन करे, तो मां उसकी हर मनोकामना पूरी करती हैं।

Dr Rama Solanki
डॉ रमा सोलंकीauthor

डॉ. रमा सोलंकी टीवी और डिजिटल मीडिया में 17 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाली वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं, जिन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ महत्वपूर्ण भूमिकाओं में कार्य किया है। वह प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग और डिजिटल इनोवेशन के संयोजन के लिए जानी जाती हैं। वह एक्सक्लूसिव इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट्री और ऑडियंस-सेंट्रिक कंटेंट के निर्माण में विशेष दक्षता रखती हैं। डॉ. सोलंकी शासन, जवाबदेही और जनहित से जुड़े राजनीतिक व खोजी कार्यक्रमों के निर्माण और एंकरिंग के लिए भी पहचान रखती हैं। आध्यात्मिक कंटेंट प्रोडक्शन में विशेषज्ञता रखते हुए उन्होंने लोकप्रिय टीवी और डिजिटल सीरीज का निर्माण व निर्देशन किया है, जिन्हें दर्शकों से व्यापक सराहना मिली। डिजिटल मीडिया में पीएचडी धारक डॉ. रमा सोलंकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कथाओं को आधुनिक प्रस्तुति और समकालीन संदर्भों से जोड़ने के लिए जानी जाती हैं।

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