अध्यात्म

Chaitra Navratri 2023: चैत्र नवरात्रि 2023 कब से कब तक रहेंगी? जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Mar 10, 2023, 10:25 AM IST

Chaitra Navratri 2023 Start And End Date: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व इस साल 22 मार्च से शुरू हो रहा है। इस बार मां अंबे शुभ वाहन पर सवार होकर आ रही हैं जिससे भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। जानिए चैत्र नवरात्रि की सभी तिथियां (Chaitra Navratri 2023 Dates) और मां की सवारी।

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Chaitra Navratri 2023 Date: चैत्र नवरात्रि कब से शुरू हो रही हैं, जानें इस पर्व के बारे में सबकुछ यहां

Chaitra Navratri 2023 Start And End Date: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का महत्वपूर्ण त्योहार होता है जो पूरे नौ दिनों तक मनाया जाता है। खास बात ये है कि इसी दिन से हिंदू नव वर्ष (Hindu New Year 2023) की भी शुरुआत होती है। इस साल नवरात्रि (Navratri) की शुरुआत 22 मार्च से हो रही है। इस पावन अवसर पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की अराधना की जाती है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे दिल से नवरात्रि व्रत रखकर मां अंबे की विधि-विधान पूजा करता है उसके जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। जानें इस साल नवरात्रि कब से कब तक रहेंगी और मां किस चीज पर सवार होकर आएंगी।

बता दें मां की सवारी के खास मायने होते हैं। हर एक सवारी का अर्थ शुभ या अशुभ भी हो सकता है। इस साल मां नाव पर सवार होकर आ रही हैं। मां अंबे का नौका या नाव पर सवार होकर आना बेहद शुभ माना जाता है।

Chaitra Navratri 2023 Start And End Date (चैत्र नवरात्रि 2023 कब से कब तक)

इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 22 मार्च से हो रही है और इसकी समाप्ति 31 मार्च को नवरात्रि व्रत पारण के साथ होगी। वहीं 30 मार्च को राम नवमी मनाई जाएगी। नवरात्रि में इस बार किसी तिथि का क्षय नहीं है जिस वजह से भक्तों को मां दुर्गा की उपासना के लिए पूरे नौ दिन ही मिलेंगे।

Chaitra Navratri 2023 Calendar (चैत्र नवरात्रि 2023 कैलेंडर)

तारीखतिथिमां का रूप
22 मार्च 2023, बुधवार (नवरात्रि दिन 1)प्रतिपदा मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना
23 मार्च 2023, गुरुवार (नवरात्रि दिन 2द्वितीयामां ब्रह्मचारिणी पूजा
24 मार्च 2023, शुक्रवार (नवरात्रि दिन 3)तृतीयामां चंद्रघंटा पूजा
25 मार्च 2023, शनिवार (नवरात्रि दिन 4)चतुर्थीमां कुष्मांडा पूजा
26 मार्च 2023, रविवार (नवरात्रि दिन 5)पंचमीमां स्कंदमाता पूजा
27 मार्च 2023, सोमवार (नवरात्रि दिन 6)षष्ठीमां कात्यायनी पूजा
28 मार्च 2023, मंगलवार (नवरात्रि दिन 7)सप्तमीमां कालरात्रि पूजा
29 मार्च 2023, बुधवार (नवरात्रि दिन 8)अष्टमीमां महागौरी पूजा, कन्या पूजन
30 मार्च 2023, गुरुवार (नवरात्रि दिन 9)नवमीमां सिद्धिदात्री पूजा, कन्या पूजन, रामनवमी
31 मार्च 2023, शुक्रवार (नवरात्रि दिन 10)दशमीनवरात्रि पारणा

मां दुर्गा के सोलह श्रृंगार

कुमकुम या बिंदीगजराकान के झुमकेअंगूठी
सिंदूरलाल रंग का जोड़ामंगल सूत्रकमरबंद
काजलमांग टीकाबाजूबंदबिछुआ
मेहंदीनथचूड़ियांपायल

क्या है सभी 9 देवियों के नाम का अर्थ?

शैलपुत्रीपहाड़ों की पुत्री
ब्रह्मचारिणीब्रह्मचारीणी
चंद्रघंटाचांद की तरह चमकने वाली
कूष्माण्डापूरा जगत में फैले पैर
स्कंदमाताकार्तिक स्वामी की माता
कात्यायनीकात्यायन आश्रम में जन्मी
कालरात्रिकाल का नाश करने वाली
महागौरीसफेद रंग वाली मां
सिद्धिदात्रीसर्व सिद्धि देने वाली

कैसे तय होता है माता का वाहन?

यदि नवरात्रि का पहला दिन रविवार या सोमवार को पड़ता है तो इसका मतलब मां दुर्गा की सवारी हाथी रहेगी। यदि शनिवार और मंगलवार से नवरात्रि शुरू होती हैं तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं। वहीं अगर गुरुवार और शुक्रवार का दिन नवरात्रि का पहला दिन हो तो माता की सवारी पालकी मानी जाती है और अगर नवरात्रि बुधवार से प्रारंभ हो रही हों तो मां दुर्गा नाव में सवार होकर आती हैं।

माता के किन वाहनों को मानते हैं शुभ को किन्हें अशुभ?

माता के शुभ वाहनमाता के अशुभ वाहन
हाथीघोड़ा
नावडोली
हंसमुर्गा
सिंहनंगे पाव
बाघगधा
बैलगरूड
मोर

Chaitra Navratri Ghatasthapana Vidhi (नवरात्रि के पहले दिन कैसे करें घटस्थापना)

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है। जिसके लिए शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। घटस्थापना करने के लिए पूजा स्‍थल पर मिट्टी की वेदी बनाकर तैयार कर लें या मिट्टी के किसी बड़े पात्र में जौ या गेहूं बोएं। फिर एक और कलश या मिट्टी का पात्र लें।उसकी गर्दन पर मौली बांध दें और उसपर तिलक लगाएं और कलश में जल भर दें। कलश में जल के साथ अक्षत, सुपारी, सिक्का आदि भी डालें। फिर एक नारियल लाल कपड़े या लाल चुन्नी में लपेटकर उस पर रक्षा सूत्र में बांध लें। फिर जमीन को साफ करके जौ वाला पात्र रखें, उसके बाद पानी से भरा कलश रखें, फिर कलश के ऊपर नारियल रख दें। इस कलश को 9 दिनों तक मंदिर में ही रखें और समय-समय पर जौ में पानी का छिड़काव करते रहें।

लवीना शर्मा
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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