अध्यात्म

केलवा के पात पर उगेलन सुरुज मल झांके ऊंके...शारदा सिन्हा के सुपहिट छठ पर्व गीत

उत्तर भारत के कई राज्यों में छठ पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान छठी मैया और सूर्य देव की उपासना की जाती है। साथ ही इस त्योहार के पारंपरिक गीत भी खूब सुने जाते हैं। यहां देखें छठ पर्व की सुपरहिट गानों की पूरी लिस्ट।

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Sharda Sinha Chhath Songs

लोक आस्था का महापर्व छठ साल में दो बार मनाया जाता है। एक बार कार्तिक महीने में तो एक बार चैत्र महीने में। अभी चैत्र महीने का छठ पर्व चल रहा है। जिसे चैती छठ के नाम से जाना जाता है। इस दौरान व्रती विधि विधान व्रत रखते हैं और छठी मैया की भक्ति में लीन रहते हैं। इस दौरान छठ के गीतों की भी काफी धूम रहती है। यहां हम आपके लिए लेकर आए हैं छठ पर्व के सुपरहिट गीत जो आपके अंदर एक अलग ही उत्साह और उमंग भर देंगे।

पहिले पहिल हम कईनी छठ गीत लिरिक्स

पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहर,

छठी मईया व्रत तोहर।

करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार,

भूल-चूक गलती हमार।

गोदी के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार,

छठी मईया ममता-दुलार।

पिया के सनईहा बनईहा, मैया दिहा सुख सार,

मैया दिहा सुख सार।

नारियल केरवा घवदवा, साजल नदिया किनार,

साजल नदिया किनार।

सुनिहा अरज छठी मैया, बढ़े कुल परिवार,

बढ़े कुल परिवार।

घाट सजवली मनोहर, मैया तोरा भगती अपार,

मैया तोरा भगती अपार।

लिहि ए अरग हे मैया, दिहीं आशीष हजार,

दिहीं आशीष हजार।

पहिले पहिल हम कईनी, छठीमैया बरत तोहर,

छठीमैया व्रत तोहर।

करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार

भूल-चूक गलती हमार, भूल-चूक गलती हमार।

केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके छठ गीत

केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके, केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके।।

के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके, के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके ||

हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी ।।

के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।।

हमरो जे बेटवा तोहन अइसन बेटावा से उनके लागी, हमरो जे बेटवा तोहन अइसन बेटावा से उनके लागी ।।

से करेली छठ बरतिया से उनके लागी, से करेली छठ बरतिया से उनके लागी ।।

अमरूदिया के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके, अमरूदिया के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके ।।

के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके, के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके ।।

हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी ।।

के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।।

हमरो जे स्वामी तोहन अइसन स्वामी से उनके लागी, हमरो जे स्वामी तोहन अइसन स्वामी से उनके लागी ।।

से करेली छठ बरतिया के उनके लागी, से करेली छठ बरतिया के उनके लागी ।।

नारियर के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके, नारियर के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके ।।

के करेली छठ बरतिया से झांके झुके, के करेली छठ बरतिया से झांके झुके ।।

हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी ।।

के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।।

हमरो जे बेटी तोहन बेटिया से उनके लागी, हमरो जे बेटी तोहन बेटिया से उनके लागी ।।

से करेली छठ बरतिया से उनके लागी, से करेली छठ बरतिया से उनके लागी ।।

हो दीनानाथ - छठ पूजा गीत

सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ

हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार

सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ

हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार

आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ

आहे भोर भिनसार, आहे भोर भिनसार

आजू के दिनवा हो दीनानाथ

हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर

बाट में भेटिए गेल गे अबला

एकटा अन्हरा पुरुष, एकटा अन्हरा पुरुष

अंखिया दियेते गे अबला

हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर

बाट में भेटिए गेल गे अबला

एकटा बाझिनिया, एकटा बाझिनिया

बालक दियेते गे अबला

हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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