अध्यात्म

क्या मृत इंसान के बिस्तर पर सोना चाहिए, जानें मरे हुए व्यक्ति की कौन सी 3 चीजें कभी नहीं इस्तेमाल करनी चाहिए

Garud Puran (गरुड़ पुराण): गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है, लेकिन आत्मा का जुड़ाव भौतिक वस्तुओं से तुरंत समाप्त नहीं होता।

Image

मर चुके परिजन के बिस्तर का क्या करें (AI Image)

Garud Purana: गरुड़ पुराण में जीवन, मृत्यु और उसके पश्चात होने वाली घटनाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है। हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद कई नियमों और मर्यादाओं का पालन अनिवार्य माना गया है। इनमें से एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या मृत व्यक्ति के बिस्तर या उनके द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं का इस्तेमाल करना चाहिए? गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद शरीर पंचतत्व में विलीन हो जाता है, लेकिन आत्मा का जुड़ाव भौतिक वस्तुओं से तुरंत समाप्त नहीं होता।

क्या मृत इंसान के बिस्तर पर सोना चाहिए

गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि व्यक्ति का अपनी प्रिय वस्तुओं, विशेषकर अपने बिस्तर और कपड़ों से गहरा लगाव होता है। मान्यता है कि मृत्यु के पश्चात भी कुछ समय तक सूक्ष्म रूप में आत्मा अपने घर और उन वस्तुओं के आसपास विचरण करती है जो उसे प्रिय थीं। यदि कोई जीवित व्यक्ति मृत व्यक्ति के बिस्तर का उपयोग करता है, तो उसे कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:

नकारात्मक ऊर्जा: मृत्यु के समय शरीर से निकलने वाली ऊर्जा और बीमारी के अंश (यदि मृत्यु लंबी बीमारी से हुई हो) बिस्तर में समाहित हो सकते हैं। इस पर सोने से जीवित व्यक्ति के स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

आत्मा का मोह: यदि आत्मा का मोह अपनी वस्तुओं में बना रहता है, तो जीवित व्यक्ति द्वारा उन वस्तुओं का उपभोग करने पर आत्मा को कष्ट हो सकता है या वह उस व्यक्ति की ओर आकर्षित हो सकती है।

बुरे सपने और अशांति: गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक के बिस्तर पर सोने से व्यक्ति को डरावने सपने आ सकते हैं या उसे मानसिक भारीपन महसूस हो सकता है।

गरुड़ पुराण: मृत इंसान की वस्तुओं का क्या करें

गरुड़ पुराण: मृत इंसान की वस्तुओं का क्या करें

मर चुके इंसान की चीजों का क्या करें?

शास्त्रों में विधान है कि मृत्यु के पश्चात सूतक काल (10 से 13 दिन) के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए:

दान करें: गरुड़ पुराण के अनुसार, मृतक के उपयोग किए हुए बिस्तर, कपड़े और अन्य प्रिय वस्तुओं को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से आत्मा का मोह भंग होता है और उसे परलोक की यात्रा में सुगमता होती है।

शुद्धिकरण कराएं: यदि वस्तुएं बहुत कीमती हैं और उन्हें फेंकना या दान करना संभव न हो, तो सूतक काल समाप्त होने के बाद उन्हें गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए और धूप-दीप दिखाना चाहिए। हालांकि, बिस्तर के मामले में नया लेना ही श्रेष्ठ माना गया है।

अंतिम संस्कार के नियम: कई परंपराओं में मृत्यु के बाद उपयोग किए गए पुराने कपड़ों और बिस्तर को श्मशान में ही छोड़ दिया जाता है या उन्हें जला दिया जाता है ताकि नकारात्मकता समाप्त हो जाए।

मरे हुए व्यक्ति की कौन सी 3 चीजें कभी नहीं इस्तेमाल करनी चाहिए?

कहा जाता है कि मरे हुए व्यक्ति के कपड़े, गहने और घड़ी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कपड़े और गहने ऐसी चीजें हैं जिससे हमेशा व्यक्ति का लगाव रहता है।

हिंदू मान्यताओं के मुताबिक मृत्यु केवल शरीर का अंत है, आत्मा का नहीं। मृतक की वस्तुओं के प्रति सम्मान और शास्त्रों के नियमों का पालन करने से न केवल मृतक की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि जीवित परिजनों का जीवन भी सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है। इसलिए, सुरक्षा और आध्यात्मिक दृष्टि से मृत व्यक्ति के बिस्तर का सीधे उपयोग करने से बचना चाहिए।

जानिए मई में पूर्णिमा कब है 2026। पढ़ें हिंदी में अध्यात्म से जुड़ी सभी छोटी बड़ी न्यूज़ और ताजा समाचार के लिए जुड़े रहें टाइम्स नाउ नवभारत से|

Suneet Singh
सुनीत सिंह author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

End of Article