Saraswati Puja 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: बसंत पंचमी के मौके पर कैसे करें मां सरस्वती को प्रसन्न, जरूर करें इस श्लोक का जाप
Saraswati Puja (Basant Panchami) 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra: माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। इस वर्ष बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा आज 05 फरवरी 2022 को मनाई जा रही है। बसंत पंचमी के दिन घरों में माता को भोग लगाने के लिए पीला मीठा चावल बनाया जाता है। यहां जानें सरस्वती पूजा की तिथि, पूजा विधि, मुहूर्त, महत्व, उपाय और मंत्र।
Saraswati Puja (Basant Panchami) 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List: सनातन धर्म में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। यह पंचमी तिथि ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती की विधि अनुसार पूजा करने से ज्ञान बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है। वहीं, वाणी में भी मधुरता आती है। मां सरस्वती की आराधना करने से भक्तों को हर कार्य में सफलता मिलती है। बसंत पंचमी को रतिकाम महोत्सव भी कहा जाता है। सरस्वती पूजा पर छात्रों को विशेष रुप से मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए।
वर्ष 2022 में वसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा पर तीन शुभ योगों का संगम हो रहा है जिसकी वजह से यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जा रही है। ज्योतिष आचार्यों के अनुसार इस दिन सिद्ध, साध्य और रवि योग का संगम हो रहा है जो शुभ कार्य प्रारंभ करने के लिए उत्तम है।
वसंत पंचमी से वसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है और वातावरण में कई बदलाव आते हैं। इस दिन से वातावरण बहुत खुशहाल हो जाता है और ठंड कम होने लगती है। मान्यताओं के अनुसार, भक्तों को वसंत पंचमी पर कुछ विशेष उपाय अवश्य करने चाहिए। चमत्कारी उपाय करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा दृष्टि भक्तों पर बनी रहती है।
बसंत पंचमी की पूजा विधि
बसंत पंचमी हिंदुओं का एक विशेष पर्व है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। यह दिन विद्यार्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दिन शैक्षणिक स्थानों पर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर धूमधाम से पूजा आराधना की जाती है।यदि आप अपने बच्चों की पढ़ाई में आने वाली विघ्न-बाधाओं को दूर करना चाहते हैं, तो बसंत पंचमी के दिन अपने बच्चे से यहां बताएं गए तरीके से मां सरस्वती की पूजा कराएं, ऐसे पूजा करने से मां सरस्वती बहुत जल्द प्रसन्न होती हैं, यहां जानें बसंत पंचमी की पूजा विधि
बसंत पंचमी पर इन बातों का रखें ख्याल
बसंत पंचमी के दिन इन बातों का रखें ख्याल
1. बसंत पंचमी के दिन व्यक्ति को भूलकर भी खराब बातें मुंह से नहीं निकालनी चाहिए
2. इस दिन झगड़े से दूर रखना चाहिए।
3. बसंत पंचमी के दिन भूलकर भी व्यक्ति को तामसी भोजन या शराब नहीं पीनी चाहिए।
4. बसंत पंचमी के दिन पितरों का तर्पण करना बेहद शुभ माना जाता है।
5. सरस्वती पूजा के दिन व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
6. सरस्वती पूजा के दिन यदि आपके पास पीला वस्त्र हो, तो उसे ही धारण करें। पीला वस्त्र मां सरस्वती को बेहद पसंद है। अगर आपके पास पीला वस्त्र ना हो, तो रंग-बिरंगे कपड़े भी पहन सकते हैं।
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए करें ये काम
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को केसर वाली खीर का भोग लगाकर कन्या भोजन कराना चाहिए। ऐसा करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती है।
वसंत पंचमी पर त्रिवेणी योग
हिंदू पंचांग के अनुसार वसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी पांचवें दिन मनाई जाती है। इस बार 05 फरवरी को वसंत पंचमी त्रिवेणी योग में मनाई जा रही है। सिद्ध, साध्य और रवि योग नाम के तीन योग का निर्माण होने से वसंत पंचमी पर्व का महत्व इस बार काफी बढ़ गया है। त्रिवेणी योग बनने से विद्यारंभ संस्कार करना बहुत ही शुभ और सिद्धि प्रदान करने वाला होगा।
कालीदास से भी जुड़ी है वसंत पंचमी की कथा
वसंत पंचमी को लेकर एक पौराणिक कथा कवि कालिदास से भी जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि जब कालिदास जी को जब उनकी पत्नी ने त्याग दिया तो दुखी होकर वो नदी में डूबकर आत्महत्या करने का विचार करने लगे थे। वो ऐसा करने ही जा रहे थे कि तभी देवी सरस्वती नदी के जल से बाहर आईं और कालिदास को उसमें स्नान करने के लिए कहा। इसके बाद से ही कालिदास का जीवन बदल गया और वे महाज्ञानी हो गए।
वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की आराधना करते समय यह श्लोक जरूर पढ़ें
वसंत पंचमी के मौके पर मां सरस्वती की आराधना करते समय यह श्लोक जरूर पढ़ना चाहिए-
ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।
कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।
वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।
रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।
सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।। वन्दे भक्तया वन्दिता च...
बसंत पंचमी पर करें इन 5 चीजों का दान
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को पीले मिष्ठानओं का भोग लगाना चाहिए और सफेद या पीले रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए। इतना ही नहीं, बसंत पंचमी के दिन विद्यार्थियों को किताब दान देना चाहिए। कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन दान देना बहुत फलदायक होता है।
1. वेदशास्त्र का दान
2. ब्राह्मण कन्या को दान करें सफेद वस्त्र
3. पीली मिठाइयों का दान
4. बसंत पंचमी के दिन करें कपड़ों का दान
5. विद्यार्थियों को करें किताब, पेन आदि का दान
वसंत पंचमी पर करें मां सरस्वती के इन मंदिरों के दर्शन
बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर आपके लिए मां सरस्वती की पूजा अर्चना करनी चाहिए। हम आपको बता रहे हैं माता के कुछ चमत्कारिक मंदिरो के बारे में जिन्हें लेकर पौराणिक ग्रन्थों में खास मान्यताएं हैं। ये हैं वो मंदिर-
राजस्थान पुष्कर
श्रीज्ञान मंदिर तेलंगाना
ऋगेरी शारदा पीठ, कर्नाटक
पनाचिक्क्ड़ सरस्वती मंदिर
विघा सरस्वती मंदिर, वारंगल, आंध्र प्रदेश
मैहर का शारदा मंदिर
शारदापीठ मंदिर, एलओसी
बसंत पंचमी के दिन देखें अपनी हथेलियां
बसंत पंचमी के दिन ये काम करें
-बसंत पंचमी के दिन कोई भी शुभ काम बिना मुहूर्त देखें कर सकते हैं।
-मान्यता है कि मां सरस्वती हमारी हथेलियों में वास करती हैं, ऐसे में बसंत पंचमी के दिन सुबह उठकर अपनी हथेलियों को देखना चाहिए।
-बसंत पंचमी के दिन शिक्षा से संबंधित चीजों का दान करना शुभ माना जाता है।
-इस दिन स्नान करने के बाद सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनकर मां सरस्वती की पूजा करें।
बसंत पंचमी पर इस कविता से करें मां सरस्वती की प्रार्थना
हिंदू धर्म में बसंत पंचमी पूजा का विशेष महत्व है, यह पर्व हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल बसंत पंचमी 05 फरवरी को मनाई जा रही है। इस दिन ज्ञान और वाणी की देवी मां शारदा की पूजा अर्चना की जाती हैं। शास्त्र के अनुसार भगवान विष्णु और भगवान महेश के कहने पर ब्रह्मा जी ने मां सरस्वती को कल के दिन प्रकट किया था। बसंत पंचमी सरस्वती माता का जन्म दिन को रूप में मनाया जाता है। बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा में वर दे वीणा वादिनी कविता को प्रार्थना के तौर पर गाया जाता है जिसे मशहूर कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने लिखा था। यहां पढ़ें - वर दे वीणा वादिनी के हिंदी लिरिक्स
बसंत पंचमी पर ऐसे करें कामदेव और रति की पूजा
पुराणों के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने के बाद कामदेव और उनकी पत्नी रति की पूजा करनी चाहिए। कामदेव और देवी रति की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी रखिए और उस पर पीले रंग का वस्त्र बिछा लीजिए। अब वस्त्र पर अक्षत का कमल दल बनाइए फिर चौकी के आगे वाले भाग में हल्दी से गणेश जी और पीछे वाले भाग में चंदन की मदद से कामदेव और उनकी पत्नी देवी रति की स्थापना कीजिए। कामदेव और देवी रति की पूजा करने से पहले भगवान गणेश की पूजा कीजिए फिर कामदेव और देवी रति की पूजा कीजिए। पूजा करने के बाद इन दोनों के ऊपर अबीर और फूल डालिए। पूजा करने के बाद 108 बार कामदेव मंत्र का जाप कीजिए। बसंत पंचमी के दिन पति और पत्नी को ब्रह्माचार्य का पालन जरूर करना चाहिए इससे अत्यधिक लाभ मिलता है।
मां सरस्वती को चढ़ाएं पीले मीठे चावल का भोग
बसंत पंचमी के दिन माता को भोग लगाने के लिए पीला मीठा चावल बनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि माता को पीला रंग का भोग लगाने से वह बहुत जल्द प्रसन्न होती है। अधिकांश घरों में बसंत पंचमी पर बड़ी धूमधाम से मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है। माता को इस दिन पीले रंग का भोग लगाया जाता है।
वसंत पंचमी पर विवाह के लिए शुभ योग
इस वर्ष वसंत पंचमी 05 फरवरी यानी शनिवार के दिन मनाई जा रही है लेकिन विवाह के लिए 4 और 6 फरवरी पर भी शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। वसंत पंचमी पर सूर्य मकर राशि में बुध के साथ रहेंगे जिसकी वजह से इस दिन बुधादित्य योग बन रहा है। इस दिन नवग्रह चार राशियों में मौजूद रहेंगे जिसकी वजह से केदार नाम का शुभ योग बनेगा। यह दोनों योग शुभ कार्यों के लिए उत्तम माने जा रहे हैं। मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी पर विवाह करने वाला जोड़ा जन्मों तक खुशहाल रहता है तथा उनके वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार की मुसीबतें नहीं आती हैं। विवाह के साथ वसंत पंचमी पर गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, फ्लैट, मकान, वाहन और प्लॉट आदि की खरीदारी के लिए भी शुभ मुहूर्त है। इस दिन प्रॉपर्टी खरीदने के लिए या कहीं निवेश करने के लिए भी उत्तम मुहूर्त है। इसके साथ बर्तन, सोना, नए वस्त्र, आभूषण, वाद्य यंत्र आदि के लिए भी शुभ योग बन रहा है।
कैसे करें बसंत पंचमी की पूजा
सरस्वती पूजा के दिन प्रातःकाल नहा धोकर पीले वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और कलश की पूजा करें। फिर नवग्रहों की पूजा करने के बाद मां सरस्वती की विधि अनुसार आराधना करें। पूजा के समय उन्हें विधिवत आचमन और स्नान कराएं। इसके बाद मां सरस्वती को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें और सफेद वस्त्र चढ़ाएं। इस दिन मां सरस्वती को खीर और दूध से बने प्रसाद का भोग लगाएं।
बसंत पंचमी पूजा में कैसी होनी चाहिए मां सरस्वती की मूर्ति
वास्तुशास्त्र के मुताबिक बसंत पंचमी पूजा में ऐसी होनी चाहिए मां सरस्वती की मूर्ती-
-ध्यान रहे घर में मां सरस्वती की मूर्ती कमल पुष्प पर विराजमान बैठी हुई मद्रा में होनी चाहिए। खड़ी हुई मुद्रा में माता की मूर्ती स्थापित करना शुभ नहीं माना जाता।
-वास्तुशास्त्र के अनुसार मां सरस्वती की मूर्ती हमेशा सौम्य, सुंदर और आशीर्वाद वाली मुद्रा में होनी चाहिए। पौराणिक -ग्रंथों के अनुसार वीणा वादिनी मां सरस्वती की कृपा से संपूर्ण संसार में जीव जंतुओं को वाणी प्राप्त हुई थी।
-मूर्ती खरीदते समय ध्यान दें कि प्रतिमा खंडित ना हो। वास्तुशास्त्र के अनुसार खंडित मूर्ती से घर में नकारात्मकता का वास होता है।
इसके साथ बसंत पंचमी की पूजा करते समय इस बात का खास ख्याल रखें कि पूजा स्थल पर मां सरस्वती की दो प्रतिमा स्थापित ना करें।
बसंत पंचमी के दिन करें ये महाउपाय, करने वाले बनते हैं महाविद्वान
बसंत पंचमी पर करें ये महाउपाय
1. यदि आपके बच्चे को बोलने में समस्या होती है यानि उसकी वाणी स्पष्ट नहीं है तो बसंत पंचमी के दिन उसकी जीभ पर चांदी की सलाई से ओम की आकृति बनाएं, इससे आपका बच्चा वाणी दोष से मुक्त हो जाएगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां सरस्वती के वीणा के मधुर ध्वनि से सृष्टि के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी की प्राप्ति हुई। ऐसे में ये उपाय कर आप अपने बच्चे को वाणी दोष से मुक्त कर सकते हैं।
2. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करते समय कलम और कॉपी जरूर शामिल करें। मान्यता है कि इस उपाय से बुध की स्थिति अनुकूल होती है और मां सरस्वती के आशीर्वाद से साधक के बुद्धि का विकास होता है और स्मरण शक्ति मजबूत होती है।
3. यदि आपका बच्चा पढ़ाई से भागता है या उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता तो बसंत पंचमी के दिन अपने बच्चे से पीले रंग का फूल और हरे रंग का फल मां सरस्वती को अर्पित करवाएं। ऐसा करने से मां सरस्वती के आशीर्वाद से आपके बच्चे का मन पढ़ाई में लगेगा।
4. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करते समय केसर और पीले चंदन को जरूर शामिल करें। इससे जातक को ज्ञान और धन की प्राप्ति होती है। ज्योतिषशास्त्र में इसे गुरु से संबंधित वास्तु कहा जाता है।
5. मां सरस्वती को प्रसाद में बूंदी अत्यंत प्रिय है। ऐसे में बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को बूंदी अर्पित करें। इससे मां सरस्वती अपने भक्तों पर प्रसन्न होती हैं।
6. बसंत पंचमी का दिन विद्या आरंभ करने के लिए बेहद खास है, इस दिन यदि किसी बच्चे की पढ़ाई की शुरुआत हो तो उस पर मां सरस्वती का आशीर्वाद सदा बना रहता है। मान्यता है कि इस दिन नवजात शिशु के जीभ पर शहद से ओम की आकृति बनाने पर बच्चा आगे चलकर बुद्धिमान और मधुरभाषी होता है।
7. बसंत पंचमी के दिन पूजा करते समय मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर माता को मोर पंख अर्पित करें और पूजा समाप्त होने के बाद मोर पंख अपनी पुस्तक में रख लें।
बसंत पंचमी पर तीन चीजों का जरूर करें पूजन
बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को अत्यंत प्रिय है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष माघ माह के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जाता है। इस खास दिन पर तीन चीजों की पूजा जरूर की जानी चाहिए। वो हैं-
1. वीणा- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती को वीणा अत्यंत प्रिय है। इसलिए बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना करते समय वीणा को भी रखें। इससे घर में सुख शांति का वास होता है और बच्चों में रचनात्मकता बढ़ती है।
2. मोर का पंख- सनातन धर्म में मोर के पंख को काफी पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि घर में मोर का पंख रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और बच्चों का बौद्धिक विकास होता है।
3. कलम और किताब- मां सरस्वती को ज्ञान और विद्या की देवी कहा जाता है। ऐसे में पूजा करते समय कलम और पेन जरूर रखें। इससे आपके बच्चों का बौद्धिक विकास होता है और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता हासिल होती है।
बसंत पंचमी के दिन भूलकर भी ना करें ये काम
बसंत पंचमी पर क्या न करें-
1. बसंत पंचमी के दिन व्यक्ति को भूलकर भी खराब बातें मुंह से नहीं निकालनी चाहिए।
2. इस दिन झगड़े से दूर रखना चाहिए।
3. बसंत पंचमी के दिन भूलकर भी व्यक्ति को तामसी भोजन या शराब नहीं पीनी चाहिए।
4. बसंत पंचमी के दिन पितरों का तर्पण करना बेहद शुभ माना जाता है।
5. सरस्वती पूजा के दिन व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
6. सरस्वती पूजा के दिन यदि आपके पास पीला वस्त्र हो, तो उसे ही धारण करें। पीला वस्त्र मां सरस्वती को बेहद पसंद है। अगर आपके पास पीला वस्त्र ना हो, तो रंग-बिरंगे कपड़े भी पहन सकते हैं।
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी को मां सरस्वती के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन ब्रह्मा जी के स्तुति से विद्या की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस बार बसंत पंचमी पर बुधादित्य एवं सिद्धि योग का सुंदर संयोग बन रहा है। इस दौरान किसी शुभ कार्य की शुरुआत करना विशेष लाभकारी होता है। तथा ऋतुओं के इस संधिकाल में ज्ञान और विज्ञान दोनों का वरदान प्राप्त किया जा सकता है। बसंत पंचमी से ऋतुराज वसंत का आगमन भी होता है, इस दिन से सरसो के खेत खिलखला उठते हैं और पूरी धरती पीले रंग से रंगमय हो उठती है।
बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि शनिवार, 5 फरवरी को सुबह 03 बजकर 47 मिनट से प्रारंभ होगी। यह अगले दिन रविवार यानी 6 फरवरी को सुबह 03 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय के बाद और पूर्वाह्न से पहले की जाती है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजकर 07 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट यानि 5 घंटे 28 मिनट तक का रहेगा।
वसंत पंचमी पर त्रिवेणी योग
हिंदू पंचांग के अनुसार वसंत पंचमी माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी पांचवें दिन मनाई जाती है। इस बार 05 फरवरी को वसंत पंचमी त्रिवेणी योग में मनाई जा रही है। सिद्ध, साध्य और रवि योग नाम के तीन योग का निर्माण होने से वसंत पंचमी पर्व का महत्व इस बार काफी बढ़ गया है। त्रिवेणी योग बनने से विद्यारंभ संस्कार करना बहुत ही शुभ और सिद्धि प्रदान करने वाला होगा।
बच्चों की शिक्षा होती थी आरंभ
बसंत पंचमी के दिन अधिकांश घरों में माता को भोग लगाने के लिए पीला मीठा चावल बनाया जाता है। पुरातनकाल में बच्चों की शिक्षा बसंत पंचमी के दिन से ही आरंभ की जाती थी।
मां सरस्वती को पीला रंग पसंद
बृहस्पति देव ज्ञान और बुद्धि की बढ़ोतरी करते हैं और उन्हें पीला रंग अति प्रिय है, इसके साथ मां सरस्वती को भी पीला रंग बहुत पसंद है इसीलिए बसंत पंचमी के दिन पीले रंग उपयोग किया जाता है।
कहा जाता है रतिकाम महोत्सव
बसंत पंचमी को रतिकाम महोत्सव भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन कामदेव के साथ ही उनकी पत्नी रति की भी पूजा होती है।
मां सरस्वती जी की चौपाई
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥
जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥
रूप चतुर्भुजधारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती। जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥
तबहि मातु ले निज अवतारा। पाप हीन करती महि तारा॥
बाल्मीकि जी थे बहम ज्ञानी। तव प्रसाद जानै संसारा॥
रामायण जो रचे बनाई। आदि कवी की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
तुलसी सूर आदि विद्धाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा। केवल कृपा आपकी अम्बा॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करै अपराध बहूता। तेहि न धरइ चित सुन्दर माता॥
राखु लाज जननी अब मेरी। विनय करूं बहु भांति घनेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
मधु कैटभ जो अति बलवाना। बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥
समर हजार पांच में घोरा। फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥
मातु सहाय भई तेहि काला। बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी। पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता। छण महुं संहारेउ तेहि माता॥
रक्तबीज से समरथ पापी। सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥
काटेउ सिर जिम कदली खम्बा। बार बार बिनवउं जगदंबा॥
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा। छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥
भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई। रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा। सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥
को समरथ तव यश गुन गाना। निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी। जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी। नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा। दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
दुर्ग आदि हरनी तू माता। कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित जो मारन चाहै। कानन में घेरे मृग नाहै॥
सागर मध्य पोत के भंगे। अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में। हो दरिद्र अथवा संकट में॥
नाम जपे मंगल सब होई। संशय इसमें करइ न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई। सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥
करै पाठ नित यह चालीसा। होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥
धूपादिक नैवेद्य चढावै। संकट रहित अवश्य हो जावै॥
भक्ति मातु की करै हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें शत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥
करहु कृपा भवमुक्ति भवानी। मो कहं दास सदा निज जानी॥
Saraswati Puja 2022: Saraswati Gayatri Mantra
ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि।
तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा लिखा गया सरस्वती वंदना गीत
वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे !
काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे !
नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे !
वर दे, वीणावादिनि वर दे।
Saraswati Puja 2022 Rangoli Design
सरस्वती वंदना की लिरिक्स
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥
इस मुहूर्त में करें मां सरस्वती की आराधना
वर्ष 2022 में सरस्वती पूजा 05 फरवरी के दिन पड़ रही है। इस दिन सिद्धि और रवि योग बन रहे हैं। इस मुहूर्त में मां सरस्वती की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी।
कब पड़ती है सरस्वती पूजा?
सरस्वती पूजा हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाई जाती है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती का अवतरण हुआ था। मां सरस्वती एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में किताब पकड़े प्रकट हुई थीं। यह कहा जाता है कि सरस्वती पूजा पर विधि अनुसार मां सरस्वती की पूजा करने से वह प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
क्यों मां सरस्वती को चढ़ाते हैं पीले और सफेद वस्त्र?
सरस्वती पूजा पर मां शारदा को पीले वस्त्र चढ़ाने की परंपरा है। मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती को पीला रंग प्रिय है इसीलिए इस दिन उन्हें पीले रंग की चीजें चढ़ाई जाती हैं। पीले वस्त्र के साथ मां सरस्वती को सफेद वस्त्र भी अर्पित किए जाते हैं।
Basant Panchami 2022 Puja: सरस्वती मां की आरती
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
जाकी कृपा कुमति मिट जाए, सुमिरन करत सुमति गति आये।
शुक सनकादिक जासु गुण गाये, वाणि रूप अनादि शक्ति की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
नाम जपत भ्रम छूट दिये के, दिव्य दृष्टि शिशु उधर हिय के।
मिलहिं दर्श पावन सिय पिय के, उड़ाई सुरभि युग-युग, कीर्ति की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
रचित जासु बल वेद पुराणा, जेते ग्रन्थ रचित जगनाना।
तालु छन्द स्वर मिश्रित गाना, जो आधार कवि यति सती की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।
सरस्वती की वीणा-वाणी कला जननि की।
आरती कीजै सरस्वती की, जननि विद्या बुद्धि भक्ति की।।
मां सरस्वती को लगाएं खीर का भोग
सरस्वती पूजा के दिन मां सरस्वती को खीर का भोग लगाना शुभ माना गया है। इस दिन खीर में केसर डालकर मां सरस्वती को अर्पित करें। इस दिन कन्याओं को भोजन भी कराएं। यह उपाय करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं।
बसंत पंचमी पर करें यह उपाय
बसंत पंचमी पर सुबह स्नान करने के बाद 'ऊँ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै: नमः' मंत्र का 108 बार तुलसी की माला से जाप करें। इस मंत्र का जाप करने से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है।
सरस्वती पूजा पर क्या है पीले रंग का महत्व?
सरस्वती पूजा पर पीला रंग बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन मां सरस्वती को पीले रंग के वस्त्र, फल, फूल और मिठाई अर्पित किए जाते हैं। मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती को पीला रंग बहुत पसंद है। इस दिन सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं और उनकी पीली किरणें धरती पर पड़ती हैं। इसके साथ सरसों की फसल की वजह से धरती पीले रंग में रंग जाती है। पीला रंग स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना गया है क्योंकि यह दिमाग को एक्टिव रखता है और तनाव दूर करता है।
बसंत पंचमी पर होते हैं यह शुभ कार्य
बसंत पंचमी का दिन नए और शुभ कार्यों की शुरुआत करने के लिए लाभदायक माना गया है। यह दिन गृह प्रवेश, नामकरण, मकान, वाहन, प्लॉट और फ्लैट आदि की खरीदारी और निवेश करने के लिए उत्तम माना गया है।
विवाह के लिए शुभ है बसंत पंचमी
बसंत पंचमी का पर्व विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी पर विवाह करने वाला जोड़ा जन्म-जन्मांतर तक एक दूसरे के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत करता है। इस वर्ष बसंत पंचमी पर बुधादित्य योग बन रहा है जो विवाह के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।
मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए अर्पित करें यह चीजें
सरस्वती पूजा पर मां शारदा को प्रसन्न करने के लिए पूजा के दौरान उन्हें पीले रंग की चीजें जैसे वस्त्र, मिठाई, फूल आदि जरूर अर्पित करें। इसके साथ उन्हें सफेद रंग के फूल, पुस्तक, कलम और पीले रंग का चंदन भी चढ़ाएं।
कब से प्रारंभ हो रही है वसंत पंचमी की तिथि?
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि इस वर्ष 5 फरवरी 2022 के दिन पड़ रही है। वसंत पंचमी की तिथि 5 फरवरी, शनिवार को सुबह 3:47 से प्रारंभ होगी और 6 फरवरी, रविवार को सुबह 3:46 पर समाप्त हो जाएगी।
वसंत पंचमी पर करें इस मंत्र का जाप
वसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा पर भक्तों को नीचे दिए गए मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। इस मंत्र का जाप करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करती हैं। इस मंत्र का जाप करने से शिक्षा व कला के क्षेत्र में भक्तों को सफलता मिलती है।
ओम ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः।
सरस्वती पूजा के लिए यहां देखें सामग्री लिस्ट
मां सरस्वती की पूजा के लिए मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर, पीले रंग की साड़ी, चौकी, पीला वस्त्र, सफेद चंदन, पीली रोली, पीला गुलाल, गेंदे का फूल या अन्य पीले फूल, बेसन के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू, सफेद बर्फी, खीर या मालपुआ, गंगाजल, धूप, दीपक, अक्षत, कपूर, अगरबत्ती, आम का पत्ता, गाय का घी, लौटा, सुपारी, गणेश जी की मूर्ति, दुर्वा, तुलसी पत्ता, रक्षा सूत्र, पान का पत्ता और हल्दी इकट्ठा कर लें।
कैसे करें वसंत पंचमी पर पूजा?
वसंत पंचमी के दिन प्रातःकाल स्नान करने के बाद सफेद या पीले वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद मां सरस्वती के सामने व्रत करने का संकल्प लें। अब मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। हिंदू धर्म शास्त्रों में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है तो मां सरस्वती के साथ उनकी मूर्ति या तस्वीर भी स्थापित करें। इसके पश्चात मां सरस्वती और भगवान गणेश को धूप, दीप, फूल, अक्षत, गंध आदि अर्पित करें। मां सरस्वती को गंगाजल से स्नान कराएं और उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं। इसके बाद उन्हें सफेद चंदन, पीले रंग की रोली, पीले फूल, अक्षत, पीला गुलाल, धूप, दीप, गंध अर्पित करें। इस दिन मां सरस्वती को बेसन के लड्डू, खीर या पीले रंग की कोई भी मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद सरस्वती वंदना और मंत्र से मां सरस्वती की पूजा करें। इस दिन सरस्वती कवच का भी पाठ किया जाता है। इसके बाद हवन करवाएं और अंत में आरती करें।
वर्ष 2022 में कब है वसंत पंचमी
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन मां सरस्वती की विधिवत पूजा की जाती है। वर्ष 2022 में सरस्वती पूजा यानी वसंत पंचमी 5 फरवरी 2022 के दिन पड़ रही है।


