Hanuman Jayanti 2022 Date, Puja Vidhi, Muhurat: हनुमान जी को भी भूलकर भी न चढ़ाए चरणामृत, हो सकता है अशुभ
Hanuman Jayanti 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Time, Samagri, Mantra: राम भक्त हनुमान का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि पर हुआ था। इस दिन विधि अनुसार भगवान हनुमान की पूजा का विधान है। यहां जानें हनुमान जयंती पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त, आरती, कथा, मंत्र व सामग्री। इसके अलावा जानिए भगवान हनुमानजी को क्यों नहीं चढ़ता है चरणामृत...
Hanuman Jayanti 2022 Date, Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri List: आज पूरे भारत में हनुमान जयंती की धूम है। भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार संकटमोचन हनुमान ने चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि पर जन्म लिया था। इस दिन को हनुमान जयंती के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, भगवान हनुमान के जन्म का उद्देश्य राम भक्ति था। सीता खोज से लेकर रावण युद्ध और लंका विजय तक हनुमान जी ने हर समय भगवान श्री राम की मदद की थी। मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जयंती पर भगवान हनुमान की विधि अनुसार पूजा करने से भक्तों को विशेष लाभ भी प्राप्त होती है। ध्यान रखें कि हनुमान को भूलकर भी चरणामृत न चढ़ाए।
ऐसी मान्यता है कि हनुमान जयंती पर प्रभु श्री राम की पूजा करने से भी संकट मोचन प्रसन्न होते हैं। इस दिन भगवान के साथ श्री राम की भी पूजा की जाती है। कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की पूजा के बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी है। जो भक्त, विधि अनुसार भगवान हनुमान की पूजा करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यहां देखे हनुमान जयंती की पूजा के लिए पूजा विधि, मुहूर्त, आरती, मंत्र, कथा व सामग्री।
हनुमान जी को नहीं चढ़ता चरणामृत
हनुमान जी को कभी चरणामृत नहीं चढ़ता। ये बात हमेशा ध्यान रखें कि बजरंगबली की पूजा करते समय चरणामृत का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने पर इसका परिणाम अशुभ हो सकता है।
मंगलवार का दिन भगवान श्री हनुमान का
मंगलवार का दिन भगवान श्री हनुमान का दिन माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार मंगलवार का दिन बहुत ही कल्याणकारी और शुभ माना गया है। इस दिन भगवान श्री हनुमान के भक्त उनकी पूजा आराधना उपवास रखकर करते है। ऐसी मान्यता है, कि इस दिन भगवान श्री हनुमान अपने भक्तों की हर हर मुरादों को पूरी करते है।
अंजनगर्भसमभूता, अशोकावाणिकचित्रे
31. अंजनगर्भसमभूता- जो अंजना के गर्भ से पैदा हुए हो
32. अशोकावाणिकचित्रे- जिसने रावण के अशोक बाग को नष्ट कर दिया।
33. अक्षांत्र्रे - अक्षय को मारने वाले
34. भविष्य चतुराना- जो भविष्य के प्रति जागरूक हो।
35. दशभवे - जिनके पास दस सशस्त्र हो।
36. धीरा- साहसी
38. दैत्यकुलान्तक- दानव कुल का नाश करने वाले
39. दैत्य कार्या Vidyhyataka- दानव कुल का नाश करने वाले
40. धचता व्रता- जो कठोर अनुशासन का पालन करते हो।
41. गंधर्व विद्या तत्वांगना- जो आकाशीय प्राणियों की कला का विशेषज्ञ हो।
42. हनुमंता- जिनका फूला हुआ गाल हो।
43. कबालिकृता- जिन्होनें सूरज को निगल लिया है।
44. कपिसेनानायका- जो बंदरों के सेना प्रमुख है।
45. केसरी नंदन- जो केसरी का पुत्र है।
46. कलानेमि Pramathana- कलानेमि असुर को मारने वाले
47. हरिमर्कट मर्कट- वानरों के स्वामी।
48. कराग्रहविमोक्त्रे- जो कारागृह से मुक्त करते है।
49. लंकिनी भंजना- जिन्होंने लंका की संरक्षक परी लंकनी का वध किया था।
50. लोकपूज्य- जिनकी सभी पूजा करते है।
51. मारुति- जो पवन देव के पुत्र है।
52. महात्मने- जो सर्वोच्च है।
53. महावीर- जो सबसे साहसी है।
54. महाबल परिक्रमा- बड़ी ताकत वाले।
55. प्रागन्य- महान विद्वान
56. प्रसन्नात्मने- हंसमुख स्वभाव वाले
57. परविद्या परिहार- जो अपने शत्रुओं का ज्ञान नष्ट कर देते है।
58. पिंगलक्ष- जिनकी आँखें गुलाबी है।
59. पंचवक्त्र- जिनके पांचों मुंह एक समान हो।
60. संकटमोचन- सभी दुखों और बाधाओं का निवारण करने वाले
61. सर्वलोकचारिन- जो आसानी से पूरी दुनिया की यात्रा कर सकते है।
62. सर्वग्रहघरा- जो सभी रोगों को ठीक करता है।
63. सागरोथरका- जो समुद्र पर छलांग लगाते है।
हनुमान जी के नाम और उनके अर्थ
1. अंजनी - माता अंजना के पुत्र
2. बजरंगबली- एक हाथ और पैर के साथ शक्तिशाली प्रकाश
3. दीनबन्धवे- असहायों की सहायता और सुरक्षा करने वाले
4. कलनभा- जो अमर है
5. महाधातु- जो सबसे उज्ज्वल
6. मनोजव- जो मन से भी तेज है यानी मन से भी जिसकी गति तेज है
7. पवनपुत्र- पवन देवता के पुत्र
8. रामभक्त- राम के भक्त
9. सर्वमायाविभंजना- सभी भ्रमों का नाश करने वाले
10. रामदूता- राम के दूत
11. संजीवननगाहत्रे- संजीवनी पहाड़ को ढोने वाले
12. सर्वरोगहरा- सभी बीमारियों को ठीक करनेवाले वाले
13. शूरा- वीर
14. वाग्मीन- एक बेहतरीन वक्ता
15. वर्धिमनकापूजीता- जिसकी पूजा Mainaka द्वारा की जाती है।
16. विजयेन्द्रिय- जिन्होनें सभी इंद्रियों पर विजय पा लिया हो
17. सर्वदुखहारा- सभी चिंताओं को दूर करने वाले
18. वज़रानखा- बहुत मजबूत नाखूनों वाले
19. मांरूतात्माजा- जो वायु देवता से उत्पन्न हुआ हो
20. महाकाय- विशाल
21. कुमारब्रह्मचारिन- जो युवा और ब्रह्मचारी है
22. कपीश्वर- बंदरों के भगवान
23. दीनबंधुवा- दल का रक्षक
24. चतुर्भुव- चार सशस्त्र
25. भीमसेनासाहायकृते- भीम की मदद करने वाले
26. बाल भीम- जो सबसे शक्तिशाली है
27. विभीषण प्रियकारा- जो विभीषण द्वारा उच्च माने जाते है।
28. कामरूपिन- जो अपनी इच्छानुसार अपना रूप बदल सकते है
29. सुग्रीव सचिवा- जो सुग्रीव के मंत्री है।
30. प्रतापवत- जो सबसे बहादुर है।
हनुमान जी की पूजा में ना करें ये गलतियां
हनुमान जी की पूजा में कभी भी चरणामृत शामिल ना करें। इसके साथ जो भक्त बजरंगबली की पूजा कर रहा है उसे इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। हनुमान जयंती पर पूजा के समय काले और सफेद रंग के कपड़े ना पहनें।
हनुमान जयंती पर क्यों करें बजरंग बाण का पाठ
ऐसा माना जाता है कि हनुमान जयंती पर बजरंग बाण का पाठ करने से भक्तों को हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। जब जीवन में परेशानियां कम होने का नाम नहीं लेती हैं, तब इसका उच्चारण जरूर करना चाहिए।
Hanuman Jayanti 2022 Upay
आज हनुमान जयंती पर नारियल के उपाय से आप बजरंगबली को प्रसन्न कर सकते हैं। इस दिन नारियल को अपने ऊपर से सात बार वार कर हनुमान मंदिर में बजरंगबली के सामने फोड़ दीजिए। ऐसे करने से सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।
Hanuman Jayanti 2022 Puja:
आज हनुमान जयंती पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा जरूर करें। आज चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन विष्णु जी और माता लक्ष्मी की पूजा करना कल्याणकारी माना जाता है।
Hanuman Jayanti 2022 Mantra: इस दिन करें इन मंत्रों का जाप
ॐ तेजसे नम:
ॐ प्रसन्नात्मने नम:
ॐ शूराय नम:
ॐ शान्ताय नम:
ॐ मारुतात्मजाय नमः
Hanuman Jayanti 2022 Upay: क्यों करना चाहिए इस दिन राम रक्षा स्तोत्र का पाठ
हनुमान जयंती पर भगवान हनुमान के साथ श्री राम और माता सीता की भी पूजा करनी चाहिए। इस दिन राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करना लाभदायक माना गया है। कहा जाता है इसका पाठ करने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, इसके साथ शनि दोष से भी राहत मिलती है।
Hanuman Jayanti 2022 Upay
हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए लोग हनुमान जयंती के दिन कई तरह के उपाय करते हैं। अगर आप भी हनुमान जी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला जरूर चढ़ाएं। इस उपाय से भक्तों को आरोग्य, सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
Hanuman Jayanti 2022: हनुमान जी को लगाएं इस लड्डू का भोग
आज हनुमान जयंती है, इस दिन आप बजरंगबली को पूजा में मिश्री मलाई लड्डू को भोग लगा सकते हैं। यह भगवान हनुमान के प्रिय भोग में से एक है। इस लिंक पर क्लिक करके आप पूरी रेसिपी पढ़ सकते हैं।
भगवान हनुमान की पूजा विधि
हनुमान जयंती के दिन सुबह उठकर और निवृत्त होकर स्नान करें। इसके बाद व्रत करने का संकल्प लें। फिर पूर्व दिशा में भगवान जी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए चौकी पर लाल कपड़ा बिछा दें और मूर्ति स्थापित करें। अब उन्हें फूल से जल अर्पित करें और पीली रोली या चंदन लगाएं। अक्षत चढ़ाते हुए उन्हें भोग लगाएं और जल अर्पित करें। अंत में दीपक जलाकर पूजा करें। इस दौरान हनुमान जी के मंत्र, सुंदरकांड और चालीसा का पाठ करें और आरती अवश्य करें।
कैसे रखें चैत्र पूर्णिमा का व्रत? (Chaitra Purnima 2022 Vrat Vidhi)
चैत्र पूर्णिमा के दिन नित्य क्रियाओं से निवृत्त हो जाएं। अगर संभव है तो इस दिन पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। अगर आप पवित्र नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो अपने स्नान करने के जल में गंगाजल जरूर मिला लें और व्रत का संकल्प लें। कहा जाता है इस दिन नदी, तीर्थ, सरोवर या जल कुंड में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके बाद भगवान सत्यनारायण की पूजा करें और पूरा दिन व्रत रखें। रात में चंद्र देव के दर्शन और पूजा करने के बाद उन्हें अर्घ्य अवश्य दें। अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करें। इस दिन दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है। चैत्र पूर्णिमा जैसी भाग्यशाली तिथि पर महालक्ष्मी स्त्रोत का पाठ करना विशेष लाभकारी और उत्तम माना गया है।
श्री हनुमान जी की आरती (Hanuman Ji Ki Aarti Hindi Mein)
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपै।
रोग दोष जाके निकट न झांपै।।
अंजनी पुत्र महा बलदाई।
सन्तन के प्रेम सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाये।
लंका जारि सिया सुधि लाये।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।
लंक जारि असुर संहारे।
सिया रामजी के काज संवारे।।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
आनि सजीवन प्रान उबारे।।
पैठि पताल तोरि जम कारे।
अहिरावन की भुजा उखारे।।
बायें भुजा असुर दल मारे।
दहिने भुजा सन्तजन तारे।।
सुर नर मुनि आरती उतारे।
जै जै जै हनुमान उचारे।।
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई।।
जो हनुमान जी की आरती गावै।
बसि बैकुंठ परम पद पावै।।
लंक विध्वंस किये रघुराई।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई।।
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
Hanuman Jayanti 2022 Katha In Hindi
दूसरे पौराणिक कथा के अनुसार राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ रखा था। तब उस यज्ञ से प्राप्त हवि राजा दशरथ की पत्नी खाकर गर्भवती हुईं। हवि के कुछ अंश को एक गरुड़ लेकर उड़ गया और वह जिस जगह उसे गिराया वहां अंजना माता पुत्र की प्राप्ति के लिए तपस्या कर रहे थी। गरुड़ के गिराए गए हवि को अंजना माता ने भगवान का आशीर्वाद समझ कर उसे खा लिया। जिसकी वजह से माता अंजनी गर्भवती हुई और उन्होंने भगवान श्री हनुमान को जन्म दिया।
Hanuman Jayanti 2022 Katha
तब ऋषि दुर्वासा ने अप्सरा से कहा कि अगले जन्म में तुम्हारी शादी बंदरों के देवता से होगी। साथ ही तुम्हारा पुत्र भी बंदर होगा। अगले जन्म में माता अंजनी की शादी भगवान केसर से हुई। अगले जन्म में माता अंजनी के गर्व से भगवान श्री हनुमान का जन्म हुआ।
हनुमान जयंती 2022 व्रत कथा (Hanuman Jayanti 2022 Vrat Katha)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्वर्ग में दुर्वासा मुनि द्वारा आयोजित सभा में भगवान इंद्र जब उपस्थित हुए, उस समय पुंजिकस्थली नामक अप्सरा भी बिना किसी कि बुलाएं वहां उपस्थित हो गई और सभी देवताओं का ध्यान भटकाने की कोशिश करने लगीं। यह देखकर दुर्वासा मुनि नाराज हो गए और उन्होंने पुंजिकस्थली को बंदरिया बनने का श्राप दे दिया। श्राप मिलने की वजह से पुंजिकस्थलीरोने लगी और ऋषि दुर्वासा से हाथ जोड़कर विनती करने लगी मुझे क्षमा कर दें।
Hanuman Jayanti 2022 Shubh Muhurat: देखें आज का पंचांग
| दिनांक | 16 अप्रैल 2022 |
| दिवस | शनिवार |
| माह | चैत्र, शुक्ल पक्ष |
| तिथि | पूर्णिमा |
| सूर्योदय | 06:04 am |
| सूर्यास्त | 06:42 pm |
| नक्षत्र | हस्त |
| सूर्य राशि | मेष |
| चन्द्र राशि | कन्या 08:21 pm तक फिर तुला |
| करण | विष्टि |
| योग |
हर्षण |
Hanuman Jayanti 2022 Significance: हनुमान जयंती का महत्व
आज पूरे भारत में हनुमान जयंती की धूम है। चैत्र माह के शुक्ल की पूर्णिमा तिथि पर संकटमोचन हनुमान का जन्म हुआ था। इस दिन विधि अनुसार पवन पुत्र की पूजा करने से भक्तों को किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता है। जिस भक्त पर हनुमान जी की कृपा बरसती है, उस व्यक्ति की किस्मत चमकने में देर नहीं लगती है। हनुमान जी की पूजा करने वाले लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
हनुमान जयंती पर पूजा मुहूर्त (Hanuman Jayanti 2022 Puja Muhurat)
इस वर्ष हनुमान जयंती पर रवि योग बन रहा है। यह योग बहुत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस योग में करने वाले हर कार्य में सफलता मिलती है। हनुमान जयंती पर सुबह ही यह योग बनने वाला है। इस दिन यह योग सुबह 5:55 से शुरू होगा और सुबह 8:40 तक रहेगा। इस मुहूर्त में संकट मोचन भगवान हनुमान की पूजा करना भक्तों के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना जा रहा है। हनुमान जयंती पर हस्त नक्षत्र सुबह 8:40 से प्रारंभ हो जाएगा जिसके बाद चित्रा नक्षत्र प्रारंभ होगा। यह दोनों नक्षत्र मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माने जा रहे हैं। इसके साथ ही, इस दिन सुबह 11:55 से अभिजीत मुहूर्त शुरू होगा जो 12:47 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त में भी मांगलिक और शुभ कार्य शुरू करना लाभदायक है।
भगवान हनुमान की पूजा विधि (Hanuman Jayanti 2022 Puja Vidhi)
हनुमान जयंती के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर और निवृत्त होकर स्नान जरूर करें। फिर हाथ में गंगाजल लेकर हनुमान जी का ध्यान करें और व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद पूर्व दिशा में भगवान जी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए चौकी पर लाल कपड़ा बिछा दें और मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद उन्हें फूल से जल अर्पित करें और पीली रोली या चंदन लगाएं। इसके साथ अक्षत चढ़ाते हुए उन्हें उनका प्रिय भोग लगाएं और जल अर्पित करें। अंत में दीपक जलाकर भगवान हनुमान जी की पूजा करें। इस दौरान हनुमान जी के मंत्र, सुंदरकांड और चालीसा का पाठ करें और आरती अवश्य करें।
Hanuman Jayanti 2022 Date: आज है हनुमान जयंती
आज पूरे भारत में हनुमान जयंती की धूम है। आज चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि है, इस दिन भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन विधि अनुसार बजरंगबली की पूजा करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
हनुमान जन्मोत्सव के दिन करें ये खास उपाय
हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान मंदिर जाकर भगवान को चमेली या फिर घी में सिंदूर मिलाकर लेप लगा दें। ऐसा करने से वह जल्द प्रसन्न होते हैं और जातक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इस उपाय को आप मंगलवार और शनिवार के दिन भी अपना सकते हैं।
परेशानियां हर लेता है हनुमान जी का ये मंत्र
पग-पग पर बाधाएं और परेशानियां मुंह बाए खड़ी हों तो ऐसे में हनुमान जी का ये मंत्र राहत प्रदान कर सकता है. ये मंत्र है बजरंगबाण-
दोहा (Doha)
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।
चौपाई (Chaupai)
जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।।
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।।
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।।
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।।
बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।।
अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।।
लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।।
अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।।
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।।
जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।।
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।।
गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।।
सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।।
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।।
सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।।
जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।।
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।।
वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।।
पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।।
जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।।
बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।।
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।।
इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।।
जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।।
जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।।
उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पाँय परौं कर जोरि मनाई।।
ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।।
ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।।
अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।।
ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।।
ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।।
हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।।
हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।।
जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।।
जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।।
जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।।
जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।।
जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।।
ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।।
राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।।
विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भाँति।।
तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।।
यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।।
सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।।
एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।।
याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।।
मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।।
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।।
डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।।
भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।।
प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।।
आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छाँह काल नहिं चापै।।
दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।।
यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।।
शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर काँपै।।
तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।।
दोहा (Doha)
प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।।
तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।
हनुमान जन्मोत्सव का शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ- 16 अप्रैल देर रात 02 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 17 अप्रैल को सुबह 12 बजकर 24 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक
श्रीराम की पूजा के बिना अधूरी है हनुमान जी की पूजा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंगबली की विधि-विधान के साथ पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है, लेकिन ध्यान रहे कि हनुमान जी की पूजा करते समय प्रभु श्रीराम की भी पूजा अवश्य करें। भगवान श्रीराम की पूजा के बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी जाती है.
हनुमान जी को राशिनुसार लगाएं भोग-
मेष- बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।
वृष- तुलसी के बीज चढ़ाएं।
मिथुन- तुलसी दल अर्पित करें।
कर्क- हनुमानजी के मंदिर में पूजा करें।
सिंह- जलेबी का भोग लगाएं।
कन्या- बाबा की प्रतिमा पर चांदी का अर्क लगाएं।
तुला- मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
वृश्चिक- काशी तुलसी दल का भोग लगाएं।
धनु- मोतीचूर के लड्डू के साथ तुलसी दल चढ़ाए।
मकर- मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
कुंभ- सिंदूर का लेप लगाना चाहिए।
मीन- लौंग चढ़ाने से बाबा प्रसन्न होंगे।
बजरंगबली को ऐसे करें प्रसन्न
हनुमान जी को प्रसाद के रुप में गुड़, भीगे या भुने हुए चने, बेसन के लड्डू रख सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करने से अंजनी पुत्र प्रसन्न होते हैं। पूजा सामग्री के लिए गेंदा, गुलाब, कनेर, सूरजमुखी आदि के लाल या पीले फूलर्, सिंदूर, केसरयुक्त चंदन, धूप-अगरबती, शुद्ध घी का दीप आदि ले सकते हैं।
भगवान हनुमान की पूजा विधि
हनुमान जयंती के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर और निवृत्त होकर स्नान जरूर करें। फिर हाथ में गंगाजल लेकर हनुमान जी का ध्यान करें और व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद पूर्व दिशा में भगवान जी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए चौकी पर लाल कपड़ा बिछा दें और मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद उन्हें फूल से जल अर्पित करें और पीली रोली या चंदन लगाएं। इसके साथ अक्षत चढ़ाते हुए उन्हें उनका प्रिय भोग लगाएं और जल अर्पित करें। अंत में दीपक जलाकर भगवान हनुमान जी की पूजा करें। इस दौरान हनुमान जी के मंत्र, सुंदरकांड और चालीसा का पाठ करें और आरती अवश्य करें।
हनुमान जयंती का पूजा मुहूर्त
Hanuman Jayanti 2022 Puja Muhurat: हनुमान जयंती पूजा मुहूर्त
हनुमान जयंती की तिथि: 16 अप्रैल 2022, शनिवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल 2022 तड़के 02:25
पूर्णिमा तिथि समापन: 17 अप्रैल 2022 तड़के 12:24
हनुमान जी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त: सुबह 5:55 से सुबह 08:40 तक (इस दौरान रवि योग रहेगा)
हनुमान जी की पूजा में इन रंगों के कपड़े न पहने
हनुमान जी की पूजा करते समय रंगों का विशेष महत्व होता है। अगर आप हनुमान जी की पूजा कर रहे हैं तो कभी भी काले या सफेद रंग के कपड़े ना पहने। काले व सफेद रंग के कपड़े पहन कर पूजा करना अशुभ माना जाता है। बजरंगबली की पूजा करते समय केवल नारंगी, लाल, पीले रंग के वस्त्र ही धारण करने चाहिए। ये रंग हनुमान जी को अति प्रिय हैं।
सूतक काल में न करें पूजा
बहुत कम लोग ये बात जानते हैं कि सूतक काल में हनुमान की पूजा नहीं करनी चाहिए। सूतक काल तब माना जाता है जब घर में किसी इंसान की मृत्यु हो जाती है। ये सूतक व्यक्ति की मौत से 13 दिन तक मान्य होता है।
हनुमान की पूजा में ना करें चरणामृत का प्रयोग
सबसे जरूरी बात वैसे तो ये अधिकतर लोगों को पता ही होगा कि हनुमान जी को कभी चरणामृत नहीं चढ़ता। ये बात हमेशा ध्यान रखें कि बजरंगबली की पूजा करते समय चरणामृत का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने पर इसका परिणाम अशुभ हो सकता है।
जानें हनुमान जी के चमत्कारी मंत्र
1. 'नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा'।
शत्रु के बलवान होने पर इस मंत्र का जाप करना बहुत ही लाभकारी माना जाता है।
2. 'ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा'।
असाध्य रोगों के लिए यह मंत्र बहुत ही लाभकारी होता है।
3. 'ॐ नमो भगवते हनुमते नम:'।
इन मंत्रों का जाप करने से जीवन में सुख शांति बनी रहती है।
4. 'दुर्गम काज जगत के जेते,
सुगम अनुग्रह तुम्हारे तेते।'
इस मंत्र को पढ़ने से मुश्किल कार्य भी आसान हो जाते हैं।
5. 'और मनोरथ जो कोई लावै,
सोई अमित जीवन फल पावै'
इस मंत्र को पढ़ने से इच्छा पूर्ति होती है।
6. 'अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता'
अस बर दीन जानकी माता।'
इस मंत्र को पढ़ने से जीवन में ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
हनुमान जयंती के सिन्दुर उपाय
1. हनुमान जयंती के दिन सरसों के तेल में सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को लगाएं। अब घर के मुख्य द्वार से शुरू कमरे के दरवाजे तक स्वास्तिक का चिन्ह बना बनाएं। ऐसा करने से घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश नहीं होता है और धन की वृद्धि होती हैं।
2. जीवन में आने वाली समस्या और बाधाओं से बचने के लिए 5 मंगलवार और 5 शनिवार को हनुमान जी को चमेली का तेल और सिंदूर चढ़ाकर गुड़-चने का भोग लगाकर उसे गरीब को बांट दें। ऐसा करने से सभी समस्याओं से जल्द निजात मिल जाएगी।
3. यदि आपको नौकरी मिले में दिक्कत हो रही हो, तो आप हनुमान जी के चरणों में सिंदूर लगाकर सफेद कागज पर स्वास्तिक बनाकर उसे अपने पास रखें। प्रभु की कृपा से आप की सभी समस्याएं जल्द दूर हो जाएंगी।
4. चमेली के तेल में सिंदूर लगाकर अपने उम्र के अनुसार पीपल के पत्ते पर राम लिखकर उसे हनुमानजी को अर्पित करने से कर्ज से जल्द मुक्ति मिल जाती हैं।
हनुमान जी के चमत्कारी मंत्र
चमत्कारी मंत्रों को पढ़ने से संकटमोचन बहुत जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। तो आइए हनुमान जी के चमत्कारी मंत्रों को जान लें।
1. 'ॐ हं हनुमते नम:'।
यदि आपके जीवन में कोई वाद-विवाद या न्यायालय संबंधित समस्या हो, तो आप इस मंत्र का उच्चारण करके बाधाओं को दूर कर सकते।
2. 'ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकायं हुं फट्'।
शत्रुओं का भय या जानमाल का डर होने पर इस मंत्र का उच्चारण करने से सभी-बाधाएं दूर हो जाती हैं।
3. 'ॐ हं पवननन्दनाय स्वाहा'।
इस मंत्रों का प्रतिदिन उच्चारण करने से प्रभु के दर्शन हो सकते हैं।
कुंवारी कन्याओं की हनुमान जी दूर करेंगे विवाह बाधाएं
जिन कुंवारी कन्याओं के विवाह में बाधाएं हो रही हैं, वह हनुमान जयंती के दिन एक चुटकी सिंदूर हनुमान जी के चरणों पर रखकर भगवान के सामने हाथ जोड़कर शीघ्र विवाह होने का अनुरोध करें। उसके बाद सिंदूर का टीका अपने मांग में लगाएं। आपके विवाह के योग जल्द बन जाएंगे।
हनुमान जयंती का दूसरा सिन्दुर उपाय
2. चुटकी भर सिंदूर में घी मिलाकर एक कागज पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसे हनुमान जी के हृदय से लगाकर अपनी तिजोरी में रख दें, फिजूलखर्ची अपने आप कम हो जाएगी और धन में वृद्धि होने लगेगी।
हनुमान जयंती के सिन्दुर उपाय
1. हनुमान जयंती के दिन घी में चुटकी भर सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को उसका लेप लगाने से प्रभु जल्द प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी बाधाओं को दूर कर देते हैं।
Hanuman Jayanti 2022: पूजा के दौरान करें इन मंत्रों का जाप
'ॐ हं हनुमते नम:'।
'ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकायं हुं फट्'
'ॐ हं पवननन्दनाय स्वाहा'
'नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा'
'ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा'
'ॐ नमो भगवते हनुमते नम: '
Hanuman Jayanti 2022 Hanuman Chalisa Lyrics: श्री हनुमान चालीसा हिंदी में
श्री हनुमान चालीसा दोहा
श्रीगुरु चरन सरोज रज,
निज मनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु,
जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके,
सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं,
हरहु कलेस बिकार
श्री हनुमान चालीसा चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुं लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धामा
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा
महाबीर बिक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन बरन बिराज सुबेसा
कानन कुंडल कुंचति केसा
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै
कांधे मूंज जनेऊ साजै
संकर सुवन केसरीनंदन
तेज प्रताप महा जग बंदन
बिद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा
बिकट रूप धरि लंक जरावा
भीम रूप धरि असुर संहारे
रामचंद्र के काज संवारे
लाय सजीवन लखन जियाये
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये
रघुपति कीन्ही बहुत बडाई
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा
जम कुबेर दिगपाल जहां ते
कबि कोबिद कहि सके कहां ते
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राज पद दीन्हा
तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना
लंकेस्वर भए सब जग जाना
जुग सहस्र जोजन पर भानू
लील्यो ताहि मधुर फल जानू
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते
राम दुआरे तुम रखवारे
होत न आज्ञा बिनु पैसारे
सब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रच्छक काहू को डर ना
आपन तेज सम्हारो आपै
तीनों लोक हांक ते कांपै
भूत पिसाच निकट नहिं आवै
महाबीर जब नाम सुनावै
नासै रोग हरै सब पीरा
जपत निरंतर हनुमत बीरा
संकट तें हनुमान छुडावै
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै
सब पर राम तपस्वी राजा
तिन के काज सकल तुम साजा
और मनोरथ जो कोइ लावै
सोइ अमित जीवन फल पावै
चारों जुग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा
साधु संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुलारे
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता
अस बर दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हरे पासा
सदा रहो रघुपति के दासा
तुम्हरे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुख बिसरावै
अंत काल रघुबर पुर जाई
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई
और देवता चित्त न धरई
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई
संकट कटै मिटै सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा
जै जै जै हनुमान गोसाई
कृपा करहु गुरु देव की नाई
जो सत बार पाठ कर कोई
छूटहि बंदि महा सुख होई
जो यह पढै हनुमानचालीसा
होय सिद्धि साखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरि चेरा
कीजै नाथ हृदय महं डेरा
श्री हनुमान चालीसा दोहा
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप
Hanuman Jayanti 2022: हनुमान जी की आरती
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।
पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।
बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
Hanuman Jayanti 2022 Upay: इस दिन करें यह उपाय
अगर आपको भय लगता है या हर कार्य में बाधा उत्पन्न होती है तो इसके लिए हनुमान जयंती के दिन आप चुटकी भर सिंदूर को घी में मिला लें। फिर सिंदूर मिलाए हुए घी को हनुमान जी पर लेप की तरह लगा दें। इससे भगवान प्रसन्न होते हैं।
भगवान हनुमान की पूजा विधि (Hanuman Jayanti 2022 Puja Vidhi)
हनुमान जयंती के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर और निवृत्त होकर स्नान जरूर करें। फिर हाथ में गंगाजल लेकर हनुमान जी का ध्यान करें और व्रत करने का संकल्प लें। इसके बाद पूर्व दिशा में भगवान जी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए चौकी पर लाल कपड़ा बिछा दें और मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद उन्हें फूल से जल अर्पित करें और पीली रोली या चंदन लगाएं। इसके साथ अक्षत चढ़ाते हुए उन्हें उनका प्रिय भोग लगाएं और जल अर्पित करें। अंत में दीपक जलाकर भगवान हनुमान जी की पूजा करें। इस दौरान हनुमान जी के मंत्र, सुंदरकांड और चालीसा का पाठ करें और आरती अवश्य करें।
Hanuman Jayanti 2022 Mahatva: क्या है हनुमान जयंती का महत्व
हनुमान जयंती की धूम पूरे भारत में होती है। इस दिन हनुमान मंदिरों में भक्तों का भारी जमावड़ा लगता है। लोग विधि विधान से प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। कहा जाता है हनुमान जयंती के दिन विधि अनुसार हनुमान जी की पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हनुमान जयंती के दिन भगवान राम की पूजा-अर्चना करने से भी हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। इसलिए लोग इस दिन भगवान राम की भी पूजा विधि अनुसार रहते हैं। हनुमान जयंती पर भगवान राम की पूजा किए बिना हनुमान जी की पूजा अधूरी मानी गई है। हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्तों की सभी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।
Hanuman Jayanti 2022: हनुमान जयंती पर बन रहा है रवि योग
इस वर्ष हनुमान जयंती पर रवि योग बन रहा है। यह योग बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन यह योग सुबह 5:55 से शुरू होगा और सुबह 8:40 तक रहेगा। मान्यताओं के अनुसार, इस योग में भगवान हनुमान की पूजा करना भक्तों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
Hanuman Jayanti 2022 Puja Muhurat: किस मुहूर्त में करें हनुमान जी की पूजा
इस वर्ष हनुमान जयंती 16 अप्रैल शनिवार के दिन पड़ रही है। 16 अप्रैल को संकटमोचन की पूजा विधि अनुसार की जाएगी। भगवान हनुमान की पूजा के लिए पूजा मुहूर्त सुबह 05:55 से सुबह 08:40 तक रहेगा।
Hanuman Jayanti 2022 Date And Time: जानें हनुमान जयंती की तिथि और समय
हनुमान जयंती की तिथि: 16 अप्रैल 2022, शनिवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल 2022 तड़के 02:25
पूर्णिमा तिथि समापन: 17 अप्रैल 2022 तड़के 12:24
Hanuman Jayanti 2022 Date: कब है हनुमान जयंती
वर्ष 2022 में हनुमान जयंती कल यानी 16 अप्रैल को है। राम भक्त हनुमान का जन्म चैत्र मास की उदया तिथि पूर्णिमा पर हुआ था। इस दिन भक्त विधि अनुसार भगवान हनुमान की पूजा करते हैं।

