Chandra Grahan 2022: चंद्र ग्रहण में पाचन तंत्र हो सकता है प्रभावित, इसकी किरणें भोजन को करती हैं दूषित
साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण 16 मई 2022 को यानि आज लगा था, दुनिया के तमाम हिस्सों में ब्लड मून का नजारा देखा गया। इस दिन संयोग से बुद्ध पूर्णिमा का पावन पर्व भी है। ये ग्रहण आज यानी 16 मई 2022, सोमवार को सुबह 07 बजकर 02 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर समाप्त हो गया था। ग्रहण काल की कुल अवधि 5 घंटे से अधिक थी। जानिए ग्रहण के बाद लोगों को कौन से विशेष उपाय करने चाहिए।
साल 2022 का चंद्र ग्रहण 16 मई 2022 को लगा था, इस दौरान दुनिया के अलग-अलग जगहों से ब्लड मून की तस्वीरें सामने आईं। ये चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दिया। इस कारण से सूतक काल भी मान्य नहीं था। धार्मिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण को अशुभ माना जाता है। साल का पहला चंद्र ग्रहण खग्रास यानी पूर्ण चंद्र ग्रहण था। इसकी कुल अवधि पांच घंटे से अधिक थी। यह ग्रहण सोमवार, 16 मई (Chandra grahan May 2022, Chandra grahan May 2022 date) सुबह 07:02 बजे लगा था। वहीं, दोपहर 12:20 पर समाप्त हो गया था।
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संयोग से साल 2022 के पहले चंद्र ग्रहण (Chandra grahan 2022 live stream) के दिन बुद्ध पूर्णिमा का पावन पर्व भी है। दक्षिण-पश्चिमी यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण-पश्चिमी एशिया, अधिकांश उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका में इस चंद्र ग्रहण (Lunar eclipse 2022) को देखा गया। चंद्र ग्रहण के बाद लोगों को कुछ खास उपाय जरूर करने चाहिए।
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ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, यात्रा और खाना खाने जैसे कुछ कामों को करने पर मनाही होती है, जिसका पालन हर व्यक्ति को करना जरूरी होता है। ग्रहण के बाद भी इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए लोगों को विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है। यहां जानिए, चंद्र ग्रहण के समाप्त होने के बाद कौन से उपाय करने चाहिए।
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चंद्रमा की किरणें भोजन को कर देती हैं दूषित
चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा की किरणों को विषाक्त माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेज या पराबैंगनी किरणें खाने को दूषित कर देती है, जिससे कि पका हुआ भोजन जहर के समान होता है। इसे खाने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर असर पडता है। लेकिन बिना पकी हुई चीजों को यह किरणें प्रभावित नहीं करती।
कब लगता है चंद्र ग्रहण?
लोगों के मन में यह जानने की उत्सुकता अक्सर रहती है कि चंद्रमा को ग्रहण कब और कैसे लगता है। बता दें कि पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगता है। लेकिन हर माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं लगता। बल्कि ऐसी घटना कुछ विशेष परिस्थियों में ही घटित होती है। सूर्य के चारों ओर पृथ्वी और पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा चक्कर लगाते हुए सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के सीधी रेखा में आ जाते हैं तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने लगती है। इस स्थिति को ही चंद्र ग्रहण कहा जाता है।
चंद्र ग्रहण में पाचन तंत्र हो सकता है प्रभावित
शास्त्रों में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ग्रहण के दौरान किया गया भोजन पचाने में समस्या होती है और इससे कई तरह की बीमारियां होती है। चंद्र ग्रहण के दौरान निकलने वाली किरणें पके हुए भोजन को प्रभावित करती है। यही कारण है ग्रहण लगने से पहले पके हुए भोजन, दूध,दही और पानी वगैरह में तुलसी का पत्ता डाला जाता है। तुलसी के पत्ते में पारा होता है, जिससे कि किसी भी हानिकारण किरणों का प्रभाव उस पर नहीं पड़ता।
ग्रीस में दिखा चंद्र ग्रहण
ग्रीस में चंद्र ग्रहण देखने के लिए लोग एथेंस के नजदीक पोसिडन मंदिर पर जमा हो गए थे। रॉयल ग्रीनिच ऑब्जर्वेटरी लंदन के खगोलविद ग्रेगरी ब्राउन ने बताया कि आप इस दौरान एक ही समय सूरज को उगना और डूबना देख सकते हैं।

इन बातों का रखें खासा ध्यान
धार्मिक ग्रंथों की मानें तो ग्रहण काल में मनुष्यों के साथ देवतागण भी संकट में होते हैं, इसलिए इस दौरान मंदिर के कपाट बंद कर देना चाहिए। साथ ही भोजन करना व खाना बनाना भी वर्जित माना जाता है, कोशिश करें कि ग्रहण खत्म होने के बाद ही चूल्हा जलाएं। वहीं ग्रहण के दौरान रसोई घर में खाने पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रख दें, इससे ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव इन चीजों पर नहीं पड़ता है।
इन जगहों पर दिखेगा चंद्र ग्रहण
वैज्ञानिकों की मानें तो साल का पहला चंद्र ग्रहण यूरोप के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्थ अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर समेत अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा।
मिथुन राशि वाले रहें चंद्र ग्रहण में बचकर
चंद्र ग्रहण का मेष राशि के जातकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। लेकिन मिथुन राशि वालों को शत्रुओं से सावधान रहने की आवश्यकता है, उनके साथ विश्वासघात हो सकता है।
भारत में कैसे देखा जा सकता है चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन इच्छुक लोग नासा (NASA) के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर ग्रहण की लाइवस्ट्रीम देख सकते हैं।
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वृषभ राशि के जातक आज करें इस चीज का दान
चंद्र ग्रहण के बाद दान करना बहुत लाभदायक बताया गया है। आज चंद्र ग्रहण के बाद वृषभ राशि के जातकों को दूध और दही का दान अवश्य करना चाहिए।
आराध्य देव की करें पूजा
चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद लोगों को अपने आराध्य देव की पूजा जरूर करनी चाहिए। माना गया है कि ग्रहण के बाद आराध्य देव की पूजा करने से भक्तों को शुभ फल की प्राप्ति होती है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
गर्भवती महिलाएं करें यह उपाय
चंद्र ग्रहण समाप्त हो गया है। चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद लोगों को कुछ विशेष उपाय जरूर करने चाहिए। गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए।
कब लगेगा दूसरा चंद्र ग्रहण
वर्ष 2022 का पहला चंद्र ग्रहण अब समाप्त हो गया है। अब वर्ष 2022 का दूसरा चंद्र ग्रहण 25 अक्टूबर के दिन लगने वाला है।
आर्थिक समृद्धि के लिए करें यह कार्य
ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा पर पीपल के वृक्ष की विधि अनुसार पूजा करने से भक्तों को शुभ फल की प्राप्ति होती है। चंद्र ग्रहण के बाद, बुद्ध पूर्णिमा की सुबह और शाम को पीपल के पेड़ की पूजा जरूर करें।
मेष राशि के जातक करें इन चीजों का दान
मेष राशि के जातकों को चंद्र ग्रहण के दौरान या बाद में चावल का दान जरूर करना चाहिए। इससे मेष राशि के जातकों को शुभ फल की प्राप्ति होगी।
कहां देखें चंद्र ग्रहण?
जरूर ध्यान रखें ये बातें
ध्यान रहे कि यदि ग्रहण काल के दौरान आप रसोई घर में खाने पीने की चीज में तुलसी का पत्ता रखना भूल गए हैं तो उसका उपयोग ना करें। तुलसी का पत्ता रखने से चंद्रमा से निकलने वाली नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव खाने पीने की चीजों पर कम पड़ता है। हालांकि भारत में ग्रहण का प्रभाव नहीं देखा गया है इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं है।
इस साल लगेंगे कितने चंद्र ग्रहण?
16 मई के बाद साल 2022 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 8 नवंबर को लगेगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। आपको बता दें पहले की तरह यह भी पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। इस दौरान सूतक काल अधिक प्रभावी होगा। इसका प्रभाव भारत समेत दक्षिणी/पूर्वी यूरोप, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, पेसिफिक, अटलांटिक और हिंद महासागर में देखने को मिलेगा।
कब लगेगा दूसरा चंद्र ग्रहण
साल 2022 का दूसरा चंद्र ग्रहण 08 नवंबर 2022, मंगलवार को दोपहर 05 बजकर 48 मिनट से रात 07 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। बता दें इस चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारत में भी देखा जा सकेगा इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा।
ग्रहण के बाद स्नान नहीं कर सकते तो ये काम जरूर करें
चंद्र ग्रहण ग्रहण समाप्त होने के तुरंत बाद स्नान करना चाहिए। वैसे तो ग्रहण के बाद गंगा स्नान का महत्व होता है। लेकिन अगर गंगा स्नान संभव ना हो आप नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं।
ग्रहण की समाप्ति के बाद करें यह काम
- ग्रहण खत्म होने के बाद सबसे पहले पानी में गंगाजल डालकर तुरंत स्नान करें
- इसके बाद पानी में गंगाजल डालकर घर में छिड़काव करें और मंदिर के कपाट खोल दें और सभी देवी देवताओं के वस्त्र बदल दें।
- इसके बाद चंद्र देव के मंत्रों का जप कर अपने ईष्ट देव व सभी देवी देवताओं की पूजा अर्चना करें।
- ग्रहण काल की समाप्ति के बाद अन्न का दान सबसे शुभ माना जाता है, इससे जीवन में आने वाली सभी विघ्न बाधाओं का अंत होता है।
- ग्रहण खत्म होने के तुरंत बाद गर्भवती महिलाओं को स्नान करना चाहिए
चंद्र ग्रहण के बाद करें इन वस्तुओं का दान
शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण के बाद दूध, दही अन्न, फल, जूते और छाता का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण की समाप्ति के बाद किसी पात्र व्यक्ति या ब्राह्मण को इन चीजों का दान करने से अक्षय पुण्य के समान फल की प्राप्ति होती है। साथ ही इस दिन गरीब व ब्राह्मणों को भोजन अवश्य करवाना चाहिए।
इन राशियों की चमकेगी किस्मत
साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण मेष राशि, सिंह राशि, धनु, तुला और कुंभ राशि वाले जातकों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है। इस राशि के जातकों को कड़ी मेहनत व संघर्ष के दम पर जल्द ही सफलता हासिल हो सकती है, वहीं नौकरी पेशे वाले जातकों को अपने कार्यक्षेत्र में प्रमोशन मिल सकती है। साथ ही धन प्राप्ति के मार्ग में वृद्धि होगी तथा जीवन में आने वाली सभी विघ्न बाधाओं का अंत होगा।
इस राशि के जातक रहें सावधान
साल का पहला चंद्र ग्रहण खग्रास लग्न में वृश्चिक राशि में लग रहा है। ग्रहण काल के दौरान इस राशि के जातकों को शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस राशि के जातक अधिक सावधान रहें व इससे बचने के लिए भगवान शिव की अराधना करें
पीपल के वृक्ष की करें पूजा
बता दें चंद्र ग्रहण के दिन पूर्णिमा का खास संयोग बन रहा है। विष्णु पुराण में वर्णित एक कथा के अनुसार वैशाख पूर्णिमा के दिन पीपल के पेड़ पर धन की देवी मां लक्ष्मी का वास होता है। इस दिन विधि विधान से पीपल के पेड़ की पूजा अर्चना करने व अर्घ्य देने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद अपने भक्तों पर सदैव बना रहता है, लेकिन ध्यान रहे बिना चंद्र दर्शन के पूर्णिमा की पूजा संपूर्ण नहीं मानी जाती।
चंद्ग ग्रहण के बाद करें ये उपाय
भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण लग चुका है। वहीं चंद्र ग्रहण के दिन वैशाख पूर्णिमा का भी खास संयोग बन रहा है, इस दिन कुछ खास उपाय कर आर्थिक तंगी को दूर किया जा सकता है। इसके लिए चंद्रोदय के समय दूध में चीनी और चावल मिलाकर चंद्रदेव के मंत्रों का जाप करते हुए अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से कारोबार में वृद्धि होती है तथा धन प्राप्ति के मार्ग में वृद्धि होती है। साथ ही वैवाहिक जीवन भी खुशहाल रहता है व जीवन में आने वाली सभी विघ्न बाधाओं का अंत होता है।
कब लगता है चंद्र ग्रहण
ज्योतिषशास्त्रों के मुताबिक यह एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है या सरल शब्दों में कहें तो जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं तो चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। सदियों बाद कल पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस दौरान चंद्रा पूर्णरूप से लाल हो जाता है, इसे रेड मून या सुर्ख लाल भी कहा जाता है।
कितने तरह का होता है चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण तीन प्रकार का होता है। पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण यानी जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी पूर्ण रूप से आ जाती है, इस स्थिति में पृथ्वी चंद्रमा को पूर्ण रूप से ढक लेती है, इसे सुपर ब्लड मून भी कहा जाता है। दूसरा आंशिक चंद्र ग्रहण होता है, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी पूर्ण रूप से ना आकर उसकी छाया चंद्रमा के कुछ हिस्सों पर पड़ती है तो इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है। वहीं तीसरा उपच्छाया चंद्र ग्रहण होता है, इस स्थिति में सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में ना होकर पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है।
गर्भवती महिलाएं ना देखें चंद्र ग्रहण
धार्मिक ग्रंथों की मानें तो गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण नहीं देखना चाहिए, ग्रहण काल के दौरान चंद्रमा से निकलने वाली किरणें गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि ग्रहण काल में घर से बाहर ना निकलें। साथ ही इस दौरान सोना भी वर्जित माना जाता है। हालांकि भारत में सूतक काल प्रभावी नहीं होगा, इसलिए इन सभी चीजों का पालन करना जरूरी नहीं है।
तुलसी को न करें स्पर्श
तुलसी का पौधा पूजनीय और पवित्र माना जाता है। हिंदू धर्म से जुड़े हर घर पर तुलसी का पौधा पाया जाता है। लेकिन ग्रहण के दौरान इसका महत्व और बढ़ जाता है। ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता डाला जाता है जिससे कि पका हुआ भोजन दूषित ना हो। लेकिन इस बात का खास ख्याल रखें कि ग्रहण लगने के बाद तुलसी के पौधे को स्पर्श ना करें। तुलसी के साथ ही ग्रहण में किसी भी पेड़-पौधे को स्पर्श न करें। आप पहले से ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें और खाने-पीने की चीजों पर ग्रहण से पहले ही तुलसी के पत्ते डालकर रख दें।
ग्रहण के दौरान क्यों ना खाएं भोजन
चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा की किरणों को विषाक्त माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट रेज या पराबैंगनी किरणें खाने को दूषित कर देती हैं, जिससे पका हुआ भोजन जहर के समान हो जाता है। इसे खाने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। लेकिन बिना पकी हुई चीजों को यह किरणें प्रभावित नहीं करती।
मिथुन राशि वालें रखें खास ख्याल
मिथुन- चंद्र ग्रहण मिथुन राशि के जातकों की परेशानी बढ़ा सकता है। आपको आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए ग्रहण के दौरान सोच समझकर खर्च करें। साथ ही किसी भी कार्य को सोच-विचार करने के बाद सावधानी करें। क्योंकि जल्दबाजी आपने लिए बड़ा घाटा हो सकता है।
मनोरंजन से रहें दूर
हा जात है कि ग्रहण के दौरान देवी-देवता कष्ट में होते हैं। इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता। ऐसे में आप टीवी देखना, गाने सुनना, डांस करना या गेम खेलने जैसे मनोरंजन न करें। क्योंकि भगवान कष्ट में हैं और ऐसे समय में मनोरंजन करना गलत माना गया है।
भगवान की मूर्ति या तस्वीरों को स्पर्श ना करें
चंद्र ग्रहण का सूतक लगते ही भगवान की मूर्ति या तस्वीरों को स्पर्श ना करें। कहा जाता है कि ग्रहण के दौरान भगवान भी कष्ट में होते हैं। इसलिए इस दौरान शुभ काम भी नहीं किए जाते हैं। क्योंकि ग्रहण के दौरान इन कामों को करने से उस पर भगवान की कृपा प्राप्त नहीं होती। ग्रहण में पूजा-पाठ भी नहीं किए जाते और यहां तक कि मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन इस बाद ध्यान रखें कि चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद देवी-देवताओं की मूर्तियों और घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें। क्योंकि ग्रहण के बाद शुद्धिकरण जरूरी है।
बच्चों को नहीं है मनाही
चंद्र ग्रहण के दौरान सोने और खाने की मनाही होती है। लेकिन छोटे बच्चे ज्यादा देर तक भूखे नहीं रह सकते और उन्हें समय पर भोजन करना आवश्यक है। इसके अलावा दूध पीते बच्चे या नवजात शिशु को भी ग्रहण के दौरान भूखा ना रखें और उन्हें प्रर्याप्त नींद लेने दें।
कब से कब तक लगेगा चंद्र ग्रहण
16, मई 2022 सोमवार को सुबह 07 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगा। यानी ग्रहण काल की कुल अवधि 5 घंटे 18 मिनट होगी। हालांकि भारत में इसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा इसलिए यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। बता दें चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है।
क्या भारत में लगेगा सूतक काल?
भारत में चंद्र ग्रहण प्रभावी ना होने के कारण यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। शास्त्रों के अनुसार सूतक काल अशुभ माना जाता है। सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले, जबकि चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। इस दौरान किसी भी तरह का शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित माना जाता है।
शरीर के इन हिस्सों पर पड़ता है ग्रहण का प्रभाव
चंद्र ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव आंखों पर पड़ता है। इसलिए ग्रहण को नंगी या खुली आंखों से देखने पर मनाही होती है। हालांकि सूर्य ग्रहण की अपेक्षा चंद्र ग्रहण का दुष्प्रभाव आंखों पर कम पड़ता है। लेकिन फिर भी ग्रहण को खुली आंखों से देखने पर रेटिना को नुकसान पहुंच सकता है।
किस राशि पर पड़ेगा प्रभाव
साल का पहला चंद्र ग्रहण खग्रास लग्न में वृश्चिक राशि में लग रहा है। ग्रहण काल के दौरान इस राशि के जातकों को सावधानी बरतनी चाहिए। इस राशि के जातकों को शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। तथा आर्थिक तंगी जैसे कारोबार में घाटा, प्रमोशन में बाधा का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस राशि के जातक सावधान रहें और ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए भगवान शिव की अराधना करें।
मुंह में रखें तुलसी का पत्ता
ग्रहण के दौरान मुंह में तुलसी का पत्ता रखना चाहिए। इससे भी ग्रहण का दुष्प्रभाव व्यक्ति पर नहीं पड़ा।
करें इस मंत्र का जाप
चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए ग्रहण के दौरान गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए। गुरु ग्रह के बीज मंत्र ‘ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:’ का जाप फलदायी होता है।
करें महामृत्युंजय मंत्र का जाप
चंद्र ग्रहण के दौरान पड़ने वाले बुरे प्रभाव से बचने के लिए, ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी फलदायी होता है।
कब लगता है चंद्र ग्रहण
ज्योतिषशास्त्रों के मुताबिक यह एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है या सरल शब्दों में कहें तो जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं तो चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। सदियों बाद कल पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इस दौरान चंद्रा पूर्णरूप से लाल हो जाता है, इसे रेड मून या सुर्ख लाल भी कहा जाता है।
इस राशि के जातक रहें सावधान
साल का पहला चंद्र ग्रहण खग्रास लग्न में वृश्चिक राशि में लग रहा है। ग्रहण काल के दौरान इस राशि के जातकों को सावधानी बरतनी चाहिए। इस राशि के जातकों को शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। तथा आर्थिक तंगी जैसे कारोबार में घाटा, प्रमोशन में बाधा का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस राशि के जातक सावधान रहें और ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए भगवान शिव की अराधना करें।
आ सकती हैं प्राकृतिक आपदा
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जिन देशों में ग्रहण का प्रभाव देखने को मिलेगा, वहां के लोगों को अगले 20 से 25 दिनों के भीतर प्राकृतिक आपदा जैसे समुद्री तूफान, बाढ़, चक्रवात का सामना करना पड़ सकता है।
कैसा नजर आएगा ब्लड मून?
सूर्य और चंद्रमा के बीच जब पृथ्वी आ जाती है तो चंद्र ग्रहण की घटना होती है। ऐसे में जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी के किनारों से होकर चांद तक पहुंचती है तो इसका नीला और हरा रंग वातावरण में बिखर जाता है, क्योंकि इनकी वेवलेंथ कम होती है, जबकि लाल रंग की वेवलेंथ ज्यादा होती है और वो चंद्रमा तक पहुंच पाता है। ऐसे में चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देने लगता है और इसे ब्लड मून कहते हैं।
गर्भवती महिलाएं रहें सावधान
धार्मिक ग्रंथों की मानें तो गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण नहीं देखना चाहिए, ग्रहण काल के दौरान चंद्रमा से निकलने वाली किरणें गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि ग्रहण काल में घर से बाहर ना निकलें। साथ ही इस दौरान सोना भी वर्जित माना जाता है। हालांकि भारत में सूतक काल प्रभावी नहीं होगा, इसलिए इन सभी चीजों का पालन करना जरूरी नहीं है।
भारत में नहीं पड़ेगा ग्रहण का प्रभाव
ज्योतिष गणना के अनुसार साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण 16 मई 2022, सोमवार को सुबह 07 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगा। हालांकि भारत में इसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा।
इन जगहों पर दिखेगा चंद्र ग्रहण
साल का पहला चंद्र ग्रहण जल तत्व की वृश्चिक राशि में है। यह अंटार्कटिका, अटलांटिक महासागर, प्रशांत महासागर पश्चिमी यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखने को मिलेगा। भारत समेत कई देशों के लोग इस अद्भुत नजारे को नहीं देख पाएंगे। साथ ही यहां सूतक काल भी प्रभावी नहीं होगा
क्या चंद्र ग्रहण के दिन रख सकते हैं पूर्णिमा का व्रत?
चंद्र ग्रहण के दिन बुद्ध पूर्णिमा पड़ने के कारण लोग व्रत को लेकर असमंसज की स्थिति में हैं, ज्योतिषशास्त्रों की मानें तो ग्रहण काल में व्रत रखा जा सकता है। लेकिन इस दौरान मंदिर के कपाट ना खोलें और ना ही भगवान की मूर्तियों और किताबों को छुएं। मंत्रों को कंठस्थ कर उनका जाप करें, यदि आपको कोई मंत्र या आरती याद ना हो तो ओम नम: शिवाय का 108 बार जप करें। सूतक काल खत्म होने के बाद मंदिर के कपाट खोल दें और अपने ईष्ट देव व देवी देवताओं की अराधना करें।
चंद्र ग्रहण के बाद करें ये काम
चंद्र ग्रहण के बाद कुछ खास उपाय कर आप मालामाल हो सकते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चंद्र ग्रहण के बाद चावल का दान करने से धन संबंधी सभी समस्याओं का निवारण होता है तथा धन प्राप्ति के मार्ग में वृद्धि होती है। इसके अलावा दूध का दान करना भी शुभ माना जाता है, कहा जाता है कि चंद्र ग्रहण के बाद दूध दही का दान करने से मां लक्ष्मी और सत्यनारायण भगवान की कृपा जातकों पर सदैव बनी रहती है।
इन बातों का रखें ध्यान
सूतक काल में वैसे तो खाने पीने की मनाही होती है, लेकिन गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए छूट होता है। लेकिन ध्यान इस दौरान केवल सात्विक भोजन का सेवन करें, भूलकर भी मांस मदिरा का सेवन ना करें। हालांकि भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा, लेकिन इसके बावजूद आप इसका पालन करते हैं तो इन बातों का ध्यान रखें।
इस राशि के जातक रहें सावधान
साल का पहला चंद्र ग्रहण कर्क राशि वालों के लिए अच्छा नहीं होगा, इस राशि के जातक इस साल थोड़ा संभलकर रहें। खासतौर पर संतान की सेहत और करियर को लेकर सावधान रहें। वहीं तुला राशि वाले जातकों के लिए भी चंद्र ग्रहण बुरा प्रभाव डालने वाला साबित हो सकता है, इस राशि के जातक सावधान रहें। कोशिश करें कि इस साल किसी नये कार्य की शुरुआत ना करें, यदि आप ऐसा करते हैं तो पहले अपने ज्योतिष से सलाह अवश्य लें। धनु राशि वालों के लिए भी चंद्र ग्रहण मुसीबतों का पहाड़ लेकर आ सकता है। इस राशि के जातक कानूनी पचड़ों में फंस सकते हैं, यदि कोर्ट में पहले से कोई मामला चल रहा है तो उसमें दिक्कत बढ़ सकती है। मकर राशि वाले जातकों के लिए भी यह चंद्र ग्रहण शुभ नहीं माना जा रहा है, क्योंकि इस राशि पर शनि की साढ़े साती चल रही है। ऐसे में इस राशि के जातक अधिक सावधान रहें।
चंद्र ग्रहण के बाद स्नान करना ना भूलें
चंद्र ग्रहण के बाद गंगा स्नान करने का विशेष महत्व है, वहीं पूर्णिमा तिथि होने के कारण इसकी महत्वता और भी बढ़ जाती है। हालांकि यदि किसी कारणवश पवित्र नदी में संभव ना हो तो पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें। मान्यता है कि इससे ग्रहण का प्रभाव कम हो जाता है। साथ ही ग्रहण के बाद सभी देवी देवताओं को भी गंगाजल से स्नान कराएं।
सूतक काल मान्य ना होने पर क्या करें
कल यानी 16 मई को साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि भारत में इसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में लोगों के मन में असमंजस की स्थिति है कि सूतक काल ना होने पर क्या करें। बता दें सूतक काल मान्य ना होने के कारण आप सभी कार्य कर सकते हैं, लेकिन यदि इसके बावजूद सूतक काल मानते हैं तो इस दौरान कोई भी शुभ कार्य ना करें।
ब्लड मून किसे कहते हैं
अक्सर लोग पूर्ण चंद्र ग्रहण और ब्लड मून को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं। बता दें पूर्ण चंद्र ग्रहण को ही ब्लड मून कहा जाता है, इस दौरान चंद्रमा पूर्ण रूप से लाल हो जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि मानों इस पर खून जम गया हो, इसे ही ब्लड मून कहा जाता है।
चंद्रदेव के मंत्र
धार्मिक ग्रंथों की मानें तो चंद्र ग्रहण के दौरान घर के एकांत हिस्से में बैठकर चंद्र देव के मंत्रों का जाप करना चाहिए, क्योंकि चंद्रदेव इस दौरान संकट की स्थिति में होते हैं। ऐसे में ग्रहण काल में नीचे दिए मंत्रों का जाप करें।
ओम् श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:।
ओम ऐं क्लीं सोमाय नम:।
ओम श्रीं चन्द्रमसे नम:।
चंद्र ग्रहण पर करें ये कार्य
चंद्र ग्रहण पर वैसे तो शुभ कार्यों की मनाही होती है, लेकिन इस दौरान आप कारोबार में तरक्की और पैसों की तंगी को दूर करने के लिए कुछ खास उपाय कर सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार ग्रहण काल के दौरान चंद्र देव की आरती और उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए। इससे चंद्र देव का आशीर्वाद अपने भक्तों पर सदैव बना रहता है तथा घर में सकारात्मक शक्तियों का वास होता है और जीवन में आने वाली सभी विघ्न बाधाओं का अंत होता है।
बुद्ध पूर्णिमा और वैशाख पूर्णिमा का बन रहा है संयोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल के दौरान सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। साथ ही ग्रहण की समाप्ति के साथ सूतक काल समाप्त हो जाता है। वहीं इस बार चंद्र ग्रहण के दिन बुद्ध पूर्णिमा और वैशाख पूर्णमा का खास संयोग बन रहा है। ऐसे में यदि आप इस दिन कुछ कार्य करना चाहते हैं तो ग्रहण काल खत्म होने के बाद कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे ग्रहण काल में या ग्रहण काल से पहले कोई भी शुभ कार्य ना करें।
यहां लाइव देख सकेंगे चंद्र ग्रहण का अद्भुत नजारा
भारत समेत कई देशों में चंद्र ग्रहण का प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा। ऐसे में यदि आप चंद्र ग्रहण का अद्भुत नजाका देखना चाहते हैं, तो नासा के यूट्यूब चैनल या आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर जाकर लाइव देख सकेंगे। इसके अलावा टाइम्स नाउ नवभारत के आध्यात्म की साइट पर भी आपको लाइव वीडियो का लिंक उपलब्ध करवा दिया जाएगा।
क्या होता है चंद्र ग्रहण,
जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो चंद्रमा पूरी तरह या आंशिक रूप से ढ़क जाता है, परिणामस्वरूप आंशिक या पूर्ण चंद्र ग्रहण लग जाता है। सरल शब्दों में कहें तो जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक ही सीध में आ जाते हैं तो चंद्र ग्रहण की स्थिति बन जाता है। इस बार सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, घंटो तक चांद लालिमा में लिपटा दिखाई देगा।
नग्न आंखों से ना देखें चंद्र ग्रहण
शास्त्रों के अनुसार चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से देखना अशुभ माना जाता है। वहीं नासा के वैज्ञानिकों द्वारा जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए, इसके लिए सनग्लास का इस्तेमाल करें। क्योंकि सूतक काल में चंद्रमा से निकलने वाली किरणें आपकी आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। यह आंखों की रेटिना को प्रभावित करती हैं इसलिए जरा सा भी लापरवाही ना बरतें।
सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण
बता दें यह चंद्र ग्रहण सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा, भारतीय समयानुसार पूरे 5 घंटे 18 मिनट तक चांद पूर्ण रूप से लालिमा में लिपटा दिखाई देगा। दुनिया के तमाम हिस्सों में लोग इस नजारे को देख सकेंगे। हालांकि भारत में इसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा। इसलिए यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।
ग्रहण काल के दौरान सोना नहीं चाहिए
शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल के दौरान सोना नहीं चाहिए। मान्यता है कि ग्रहण काल में सोने से जातक को शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही इस समय भोजन भी नहीं करना चाहिए क्योंकि चंद्रमा से निकलने वाली किरणों से भोजन में अशुद्धियां आ जाती हैं, इससे व्यक्ति को पाचन संबंधी समस्याओं पेट दर्द, उल्टी, दस्त आदि का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि गर्भवती महिलाओं, बीमार व्यक्तियों और बुजुर्ग व्यक्तियों के लिए छूट होती है।
ग्रहण काल में यात्रा करने से बचें
बता दें दिल्ली एनसीआर समेत भारत में कहीं भी चंद्र ग्रहण नहीं दिखाई देगा। ऐसे में सूतक काल भी मान्य नहीं होगा, लेकिन कई लोग इसके बावजूद भी सूतक काल का पालन करते हैं। इसलिए इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। साथ ही ग्रहण काल में यात्रा करने से बचना चाहिए। क्योंकि इस दौरान चंद्रमा से नकारात्मक किरणें निकलती हैं, जो आपके लिए खतरनाक हो सकती हैं।
रसोई में रखें तुलसी का पत्ता
सूतक काल के दौरान घर में ना तो खाना पकाना चाहिए और ना ही खाना चाहिए। रसोई में रखी चीजों में तुलसी का पत्ता डालकर रख दें, इससे भोजन पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता।
गर्भवती महिला तक न पहुंचे चांद की रोशनी
गर्भवती महिलाओं को सूतक काल में सावधान रहना चाहिए, कोशिश करें की घर से बाहर ना निकलें और चंद्रमा की रोशनी आप तक ना पहुंचे।
खाने-पीने की चीजों पर डालें तुलसी का पत्ता
ग्रहण के दौरान खाने पीने वाली चीजों पर पहले से ही तुलसी का पत्ता डाल कर रख दें। ग्रहण के दौरान भूलकर भी यात्रा ना करें ना ही घर से बाहर निकलें। ग्रहण में पूजा-पाठ पर भी सख्त मनाही होती है।
संकट में होते हैं देवतागण
धार्मिक ग्रंथों की मानें तो ग्रहण काल में मनुष्य के साथ सभी देवतागण भी संकट में होते हैं। यही कारण है कि मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसके अलावा पूजा-पाठ में भी बिल्कुल मनाई होती है।
सबसे प्रभावशाली पूर्ण चंद्र ग्रहण
पूर्ण चंद्र ग्रहण सबसे प्रभावशाली माना जाता है। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है तो चंद्रमा पूरी तरह या आंशिक रूप से ढ़क जाता है, परिणामस्वरूप आंशिक या पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है। इस दौरान चंद्रमा का रंग पूरी तरह बदलकर लाल हो जाता है और धब्बे दिखाई देते हैं।
चंद्र ग्रहण का आरंभ और समाप्ति
चंद्र ग्रहण 2022 – 16 मई 2022, सोमवार
चंद्र ग्रहण 2022 आरंभ – 16 मई 2022, सुबह 7:02 बजे से
चंद्र ग्रहण की समाप्ति – 16 मई 2022, दोपहर 12:20 तक



