Chandra Grahan 2022: चंद्र ग्रहण के समाप्त होने के बाद घर में करें यह उपाय
साल का पहला चंद्र ग्रहण बुद्ध पूर्णिमा के दिन यानि आज 16 मई 2022 को लगकर समाप्त हो गया है। ये ग्रहण वृश्चिक राशि में लगा था। कहा जा रहा है कि ग्रहण के बाद भी कुछ राशियों के जातकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। चंद्र ग्रहण के समाप्त होने के बाद कुछ विशेष उपाय जरूर करें।
वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा के दिन (आज) साल का पहला चंद्र ग्रहण लगा था। भारतीय समयानुसार ये चंद्र ग्रहण सोमवार,16 मई सुबह 07:02 बजे (Chandra grahan kab lagega) शुरू हुआ था। जो दोपहर 12:20 पर समाप्त हो गया। यानि यह ग्रहण सिर्फ 5 घंटे से ज्यादा समय के लिए था। हालांकि, भारत में यह ग्रहण (Lunar eclipse in India) दिखाई नहीं दिया। ऐसे में सूतक काल भी मान्य नहीं था। लेकिन अन्य कई देशों में इसे साफ देखा गया। चंद्र ग्रहण के दौरान और ग्रहण के बाद भी गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। चंद्र ग्रहण के दिन कुछ विशेष उपाय कर आर्थिक कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं।
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साल का पहला चंद्र ग्रहण खग्रास या पूर्ण चंद्र ग्रहण (lunar eclipse May 2022) होगा। इसकी कुल अवधि दो घंटे से अधिक होगी। दक्षिण-पश्चिमी यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण-पश्चिमी एशिया, अधिकांश उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, अटलांटिक और अंटार्कटिका में इस चंद्र ग्रहण को देखा जा सकेगा। विज्ञान में चंद्र ग्रहण को एक खगोलीय घटना कहा जाता है। जिसके अनुसार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा जब एक रेखा में आ जाते हैं तो चांद को पृथ्वी की छाया पूरी तरह से ढक लेती है। इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण भी कहते हैं।
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धार्मिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण को अशुभ माना गया है। कहा जाता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इस ऊर्जा का दुष्प्रभाव व्यक्ति और आसपास की चीजों पर भी पड़ता है। इसलिए जिस तरह चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है।
घर में करें यह उपाय
वर्ष 2022 का पहला चंद्र ग्रहण समाप्त हो गया है। चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद लोगों को अपने घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। घर से पहले तुलसी के पौधे पर छिड़काव जरूर करें।
चंद्र ग्रहण के बाद करें इन चीजों का दान
चंद्र ग्रहण इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा के दिन लगा। चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद लोगों को दूध, फल, छाता, जूते इत्यादि का दान करना चाहिए। इसके साथ लोगों को इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन करवाना चाहिए।
चंद्र ग्रहण के बाद करें इन मंत्रों का जाप
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः।
ॐ सों सोमाय नमः।
ॐ चं चंद्रमस्यै नम:
ॐ शीतांशु, विभांशु अमृतांशु नम:
ॐ ऐं क्लीं सौमाय नामाय नमः।
चंद्र ग्रहण के बाद करें स्नान
चंद्र ग्रहण के बाद कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि चंद्र ग्रहण के बाद लोगों को स्नान अवश्य करना चाहिए।
साल का पहला चंद्र ग्रहण समाप्त, जानें कब लगता है यह ग्रहण
साल का पहला चंद्र ग्रहण समाप्त हो गया है। चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तब पृथ्वी चंद्रमा की रोशनी को ढक लेती है।
ग्रहण की समाप्ति के बाद करें यह काम
- ग्रहण खत्म होने के बाद सबसे पहले पानी में गंगाजल डालकर तुरंत स्नान करें
- इसके बाद पानी में गंगाजल डालकर घर में छिड़काव करें और मंदिर के कपाट खोल दें और सभी देवी देवताओं के वस्त्र बदल दें।
- इसके बाद चंद्र देव के मंत्रों का जप कर अपने ईष्ट देव व सभी देवी देवताओं की पूजा अर्चना करें।
- ग्रहण काल की समाप्ति के बाद अन्न का दान सबसे शुभ माना जाता है, इससे जीवन में आने वाली सभी विघ्न बाधाओं का अंत होता है।
- ग्रहण खत्म होने के तुरंत बाद गर्भवती महिलाओं को स्नान करना चाहिए
यात्रा ना करें गर्भवती महिलाएं
गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण के दौरान यात्रा करने से बचना चाहिए। इस समय यात्रा करना शुभ नहीं माना जात है।
चंद्र ग्रहण के बाद करें ये उपाय
भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण लग चुका है। वहीं चंद्र ग्रहण के दिन वैशाख पूर्णिमा का भी खास संयोग बन रहा है, इस दिन कुछ खास उपाय कर आर्थिक तंगी को दूर किया जा सकता है। इसके लिए चंद्रोदय के समय दूध में चीनी और चावल मिलाकर चंद्रदेव के मंत्रों का जाप करते हुए अर्घ्य देना चाहिए। ऐसा करने से कारोबार में वृद्धि होती है तथा धन प्राप्ति के मार्ग में वृद्धि होती है। साथ ही वैवाहिक जीवन भी खुशहाल रहता है व जीवन में आने वाली सभी विघ्न बाधाओं का अंत होता है।
इन कामों को भूलकर भी ना करें
चंद्र ग्रहण लगते ही बाल कटवाने या मुंडल कराने, सिलाई करने, कपड़े धोने, कपड़े सिलने या काटने, कान छिदवाने और ताला खोलने जैसे कार्य न करें। ग्रहण में इन कामों को करना गलत बताया गया है। इसका बुरा असर देखने को मिलता है।
इस राशि के जातक रहें चौकन्ने
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 15 दिन के भीतर दो ग्रहण लगे हैं। ऐसे में धनु, तुला, कर्क व मेष राशि के जातकों को अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। इस राशि के जातकों को अगले 15 दिनों के भीतर अधिक धन हानि व आकस्मिक दुर्घटना का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस राशि के जातक एकदम चौकन्ने रहें।
इस दिन लगेगा दूसरा चंद्र ग्रहण
साल 2022 का दूसरा चंद्र ग्रहण 08 नवंबर 2022, मंगलवार को दोपहर 05 बजकर 48 मिनट से रात 07 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगा। बता दें इस चंद्र ग्रहण का प्रभाव भारत में भी देखा जा सकेगा इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा।
ध्यान दें
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जिन जगहों पर ग्रहण का प्रभाव देखने को मिल रहा है, वहां के लोगों को अगले 20 से 25 दिनों के भीतर प्राकृतिक आपदा जैसे समुद्री तूफान, बाढ़, चक्रवात का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारत में ग्रहण का प्रभाव नहीं देखा जा रहा है।
ये करना ना भूलें
ध्यान दें यदि ग्रहण काल के दौरान आप रसोई घर में खाने पीने की चीज में तुलसी का पत्ता रखना भूल गए हैं तो उसका उपयोग ना करें। तुलसी का पत्ता रखने से चंद्रमा से निकलने वाली नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव खाने पीने की चीजों पर कम पड़ता है। हालांकि भारत में ग्रहण का प्रभाव नहीं देखा गया है इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में आपको ऐसा करने की जरूरत नहीं है।
बीमार व्यक्ति ना करें परहेज
ऐसे व्यक्ति जो बीमार हैं चाहे वह किसी भी उम्र के हों। ऐसे लोगों को भी ग्रहण के दौरान सोने और खाने-पीने के नियमों में छूट होती है। इसलिए अगर आप या आपके घर पर कोई भी बीमार व्यक्ति है तो ग्रहण के दौरान पूरा आराम करने दें और समय पर खाना और दवाई जरूर लें।
सूतक मान्य नहीं होगा
वैसे तो चंद्र ग्रहण के दौरान धार्मिक कार्यों पर विशेष मनाही होती है। खासकर पूर्ण चंद्र ग्रहण पर। लेकिन चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और यहां इसका सूतक भी मान्य नहीं होगा। इसलिए धार्मिक कार्यों पर रोक नहीं होगी। बुद्ध पूर्णिमा से जुड़े स्नान-दान, हवन और पूजा-पाठ आदि किए जा सकेंगे।
ऑनलाइन कैसे देखें चंद्र ग्रहण
भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। लेकिन अगर आप इस घटना को देखना चाहते हैं तो 16 मई को अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर जाकर इसे देख सकते हैं. या फिर सीधे नासा की वेबसाइट (www.nasa.gov/nasalive) पर जाकर भी इसे देखा जा सकता है।
कर्क राशि
चंद्र ग्रहण कर्क राशि वालों के लिए भी अच्छा साबित नहीं होगा। परिवार और बच्चों का खास ख्याल रखें और ग्रहण के दौरान संभलकर रहें।
वृश्चिक राशि पर क्या होगा असर
चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा का इसी राशि में गोचर होगा। इसलिए इस राशि के जातकों पर ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। इसलिए वृश्चिक राशि के लोगों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतने की जरूरत है।
तुला राशि
तुला राशि के जातकों को चंद ग्रहण के दौरान संभलकर रहने की जरूरत है। खासकर बोली पर संयम रखें और किसी के साथ वाद-विवाद में न पड़े।
मकर राशि वालों पर क्या होगा असर?
मकर राशि के जिन लोगों पर शनि की साढ़े साती चल रही है उन लोगों के लिए यह शुभ फल देने वाला नहीं होगा। धैर्य बनाए रखें और निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें।
तुलसी को न करें स्पर्श
तुलसी का पौधा पूजनीय और पवित्र माना जाता है। हिंदू धर्म से जुड़े हर घर पर तुलसी का पौधा पाया जाता है। लेकिन ग्रहण के दौरान इसका महत्व और बढ़ जाता है। ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता डाला जाता है जिससे कि पका हुआ भोजन दूषित ना हो। लेकिन इस बात का खास ख्याल रखें कि ग्रहण लगने के बाद तुलसी के पौधे को स्पर्श ना करें। तुलसी के साथ ही ग्रहण में किसी भी पेड़-पौधे को स्पर्श न करें। आप पहले से ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें और खाने-पीने की चीजों पर ग्रहण से पहले ही तुलसी के पत्ते डालकर रख दें।
गर्भवती महिलाएं भूखे पेट ना रहें
वैसे तो ग्रहण के दौरान खाने-पीने पर सख्त मनाही होती है। लेकिन यदि ग्रहण लंबा है तो गर्भवती महिलाएं खाना खा सकती हैं। गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं को ज्यादा देर तक बिना खाए-पिए नहीं रहना चाहिए। इससे पानी की कमी यानी निर्जलीकरण हो सकती है। इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में पानी या जूस वगैरह पीते रहें। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि ग्रहण के दौरान बहुत ज्यादा या भारी भोजन ना करें।
गर्भवती महिलाएं ना देखें चंद्र ग्रहण
धार्मिक ग्रंथों की मानें तो गर्भवती महिलाओं को चंद्र ग्रहण नहीं देखना चाहिए, ग्रहण काल के दौरान चंद्रमा से निकलने वाली किरणें गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि ग्रहण काल में घर से बाहर ना निकलें। साथ ही इस दौरान सोना भी वर्जित माना जाता है। हालांकि भारत में सूतक काल प्रभावी नहीं होगा, इसलिए इन सभी चीजों का पालन करना जरूरी नहीं है।
इन बातों का रखें खास ख्याल
धार्मिक ग्रंथों की मानें तो ग्रहण काल में मनुष्यों के साथ देवतागण भी संकट में होते हैं, इसलिए इस दौरान मंदिर के कपाट बंद कर देना चाहिए। साथ ही भोजन करना व खाना बनाना भी वर्जित माना जाता है, कोशिश करें कि ग्रहण खत्म होने के बाद ही चूल्हा जलाएं। वहीं ग्रहण के दौरान रसोई घर में खाने पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रख दें, इससे ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव इन चीजों पर नहीं पड़ता है।
ग्रहण के दौरान क्यों है खाने की मनाही?
ग्रहण मनुष्य के पाचन क्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि ग्रहण के दौरान खाने-पीने पर सख्त मनाही होती है। इतना ही नहीं चंद्र ग्रहण के दौरान पके हुए भोजन को भी नहीं खाया जाता है। अगर इसे ग्रहण के बाद खाना है तो इसमें तुलसी का पत्ता डाल दिया जाता है। क्योंकि ग्रहण के दौरान उत्पन्न हानिकारण किरणें भोजन और पानी को दूषित कर देती है। ऐसा खाना खाने से पाचन क्रिया पर असर पड़ता है और अपच की समस्या हो सकती है।
भारत में लगेगा सूतक काल?
भारत में चंद्र ग्रहण प्रभावी ना होने के कारण यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। शास्त्रों के अनुसार सूतक काल अशुभ माना जाता है। सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले, जबकि चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। इस दौरान किसी भी तरह का शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित माना जाता है।
कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?
वैज्ञानिकों की मानें तो साल का पहला चंद्र ग्रहण यूरोप के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्थ अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर समेत अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप
चंद्र ग्रहण के दौरान पड़ने वाले बुरे प्रभाव से बचने के लिए, ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी फलदायी होता है।
मुंह में रखें तुलसी का पत्ता
ग्रहण के दौरान मुंह में तुलसी का पत्ता रखना चाहिए। इससे भी ग्रहण का दुष्प्रभाव व्यक्ति पर नहीं पड़ा।
चंद्र ग्रहण के दौरान करें गुरु मंत्र का जाप
ग्रहण के दौरान कई नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है, जिससे बचने के लिए कुछ उपायों को करने की जरूरत पड़ती है। चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभाव को कम करने के लिए ग्रहण के दौरान गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए। गुरु ग्रह के बीज मंत्र ‘ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम:’ का जाप फलदायी होता है।
इन जगहों पर दिखेगा चंद्र ग्रहण
वैज्ञानिकों की मानें तो साल का पहला चंद्र ग्रहण यूरोप के दक्षिणी-पश्चिमी हिस्से, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, नॉर्थ अमेरिका, प्रशांत महासागर, अटलांटिक, हिंद महासागर समेत अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण के प्रकार
चंद्र ग्रहण तीन प्रकार का होता है। पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण यानी जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी पूर्ण रूप से आ जाती है, इस स्थिति में पृथ्वी चंद्रमा को पूर्ण रूप से ढक लेती है, इसे सुपर ब्लड मून भी कहा जाता है। दूसरा आंशिक चंद्र ग्रहण होता है, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी पूर्ण रूप से ना आकर उसकी छाया चंद्रमा के कुछ हिस्सों पर पड़ती है तो इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है। वहीं तीसरा उपच्छाया चंद्र ग्रहण होता है, इस स्थिति में सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में ना होकर पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है।
इन जगहों पर सूतक काल नहीं होगा मान्य
बता दें भारत में चंद्र ग्रहण प्रभावी ना होने के कारण यहां सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। शास्त्रों के अनुसार सूतक काल अशुभ माना जाता है। सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले, जबकि चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। इस दौरान किसी भी तरह का शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित माना जाता है।
ऑनलाइन कैसे देख सकते हैं चंद्र ग्रहण
भारत में यह चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। लेकिन अगर आप इस घटना को देखना चाहते हैं तो 16 मई को अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर जाकर इसे देख सकते हैं या फिर सीधे नासा की वेबसाइट (www.nasa.gov/nasalive) पर जाकर भी इसे देखा जा सकता है।
नग्न आंखों से क्यों नहीं देखना चाहिए चंद्र ग्रहण
जानकारों का मानना है कि पूर्ण चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए, ग्रहण काल के दौरान चंद्रमा से निकलने वाली किरणें आंखों हानिकारक होती हैं। वहीं कुछ जानकारों का कहना है कि चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से देखा जा सकता है। आप चाहें तो चंद्र ग्रहण देखने के लिए दुरबीन या टेलिस्कोप का इस्तेमाल कर सकते हैं।
Chandra Grahan or Lunar Eclipse 2022 Date and Time in India
चंद्र ग्रहण 2022 – 16 मई 2022, सोमवार
चंद्र ग्रहण 2022 आरंभ – 16 मई 2022, सुबह 7:02 बजे से
चंद्र ग्रहण की समाप्ति – 16 मई 2022, दोपहर 12:20 तक
What Is Lunar Eclipse: क्या है चंद्र ग्रहण
वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रहण एक खगोलीय घटना है, ग्रहण के दौरान ब्रह्मांड में कई अद्भुत घटनाएं घटित होती हैं। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है तो चंद्रमा पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक जाता है, परिणामस्वरूप आंशिक या पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण सबसे प्रभावशाली माना जाता है, इस दौरान चंद्रमा का रंग पूरी तरह बदलकर लाल हो जाता है और धब्बे दिखाई देते हैं।
Chandra Grahan 2022 date and time: चंद्र ग्रहण 2022 कब लग रहा है?
ज्योतिष गणना के अनुसार साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण 16 मई 2022, सोमवार को सुबह 07 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगा। हालांकि भारत में इसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा।
ग्रहण के इन नियमों का पालन करना होता है जरूरी
कुछ नियम ऐसे होते हैं जिनका पालन करना सभी के लिए बेहद जरूरी होता है, जिसके कि चंद्र ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचा जा सके। ग्रहण के दौरान खाने पीने वाली चीजों पर पहले से ही तुलसी का पत्ता डाल कर रख दें। इससे आप उसका सेवन ग्रहण के दौरान और ग्रहण समाप्त होने के बाद भी कर सकते हैं। ग्रहण के दौरान भूलकर भी यात्रा ना करें ना ही घर से बाहर निकलें। ग्रहण में पूजा-पाठ पर भी सख्त मनाही होती है।
Chandra grahan 2022 time: 9 घंटे पहले लगता है सूतक काल
भारत में चंद्र ग्रहण का प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले जबकि चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। चंद्र ग्रहण से तमाम राशियों के जातकों के जीवन में परिवर्तन होता है।
Types of Chandra grahan: चंद्र ग्रहण के प्रकार
चंद्र ग्रहण तीन प्रकार का होता है। पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण यानी जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी पूर्ण रूप से आ जाती है, इस स्थिति में पृथ्वी चंद्रमा को पूर्ण रूप से ढक लेती है, इसे सुपर ब्लड मून भी कहा जाता है। दूसरा आंशिक चंद्र ग्रहण होता है, जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी पूर्ण रूप से ना आकर उसकी छाया चंद्रमा के कुछ हिस्सों पर पड़ती है तो इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है। वहीं तीसरा उपच्छाया चंद्र ग्रहण होता है, इस स्थिति में सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में ना होकर पृथ्वी की छाया चांद पर पड़ती है।
ग्रहण से बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है असर
चंद्र ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। क्योंकि इसका असर बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ता है।
ग्रहण के दौरान खाने-पीने की मनाही, जानें क्यों
ग्रहण मनुष्य के पाचन क्रिया को भी प्रभावित करता है। यही कारण है कि ग्रहण के दौरान खाने-पीने पर सख्त मनाही होती है। इतना ही नहीं चंद्र ग्रहण के दौरान पके हुए भोजन को भी नहीं खाया जाता है। अगर इसे ग्रहण के बाद खाना है तो इसमें तुलसी का पत्ता डाल दिया जाता है। क्योंकि ग्रहण के दौरान उत्पन्न हानिकारण किरणें भोजन और पानी को दूषित कर देती है। ऐसा खाना खाने से पाचन क्रिया पर असर पड़ता है और अपच की समस्या हो सकती है।
खुली आंखों से न देखें चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण का सबसे ज्यादा प्रभाव आंखो पर पड़ता है। इसलिए ग्रहण को नंगी या खुली आंखों से देखने पर मनाही होती है। हालांकि सूर्य ग्रहण की अपेक्षा चंद्र ग्रहण का दुष्प्रभाव आंखों पर कम पड़ता है। लेकिन फिर भी ग्रहण को खुली आंखों से देखने पर रेटिना को नुकसान पहुंच सकता है।
कैसे लगता है चंद्रमा को ग्रहण
विज्ञान में चंद्र ग्रहण को खगोलीय घटना माना जाता है। जिसके अनुसार, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तो सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा तक पहुंचने में बाधा उत्पन्न करती है।
2 घंटे से अधिक का होगा चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण की अवधि दो घंटा से अधिक होगी। चंद्र ग्रहण सुबह 07:02 पर लगेगा और दोपहर 12:20 पर समाप्त हो जाएगा। चंद्र ग्रहण का प्रभाव प्रकृति और अन्य संसाधनों के साथ मानव शरीर पर भी पड़ता है। इसलिए ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है।
चंद्र दोष दूर करने के लिए करें उपाय
अगर आपकी कुंडली में चंद्र दोष है तो सोमवार के दिन सफेद रंग की वस्तु जैसे वस्त्र, दही, चीनी, चावल आदि का दान करें और प्रतिदिन 108 बार ‘ॐ नम: शिवाय’ के मंत्र का जाप करें। दूध से बनी चीजों का दान करने से भी चंद्र दोष दूर होता है। दूध ये जुड़ा व्यापार न करें। रात को दूध पीकर न सोएं।
कुंडली में कमजोर चंद्र दोष
आपकी कुंडली में नौ ग्रहों में चंद्रमा की स्थिति कमजोर है तो स्वास्थ समस्याएं बनी रहती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र दोष से दिल संबंधी बीमारी, मिर्गी का रोग, फेफड़े से जुड़ी बीमारी, मानसिक तनाव, सर्दी-जुकाम, स्मरण शक्ति कमजोर पड़ना और बैचेनी जैसी कई तरह की बीमारियां होती हैं।
गोमती चक्र को एक डिब्बे में रखें
आप कीली कीली स्वाहा मंत्र का जाप करें। 54 बार जाप करने के बाद गोमती चक्र को एक डिब्बे में रख दीजिए फिर मूंग और हकीक के 5-5 दाने अपने हाथों में रखिए और उसी मंत्र का जाप कीजिए। यह उपाय करने के बाद दीये को प्रणाम कीजिए फिर तेल के डिब्बे को उसी डिब्बी में डाल दीजिए। अब इस डिब्बी को अपने काम करने की झगह पर रख दीजिए।
आर्थिक कष्टों के नाश का उपाय
आर्थिक कष्टों का नाश करने के लिए चंद्र ग्रहण की सुबह उठकर स्नान आदि कर लें। स्नान आदि करने के बाद भगवान का स्मरण करें और साफ वस्त्र पहन लें। फिर उत्तर दिशा की तरफ अपना मुंह करके चमेली के तेल का दिया जाए और दाहिने हाथ में रुद्राक्ष की माला के साथ बाए हाथ में पांच गोमती चक्र लीजिए।
चंद्र देव जी की आरती ( Chandra Dev ji ki aarti lyrics in hindi,)
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा।
चीटियों को खिलाएं पिसा हुआ चावल और आटा
घर की सुख-समृद्धि के लिए चंद्र ग्रहण पर चीटियों को पिसा हुआ चावल और आटा खिलाएं। इस उपाय से कुंडली में चंद्रमा शुभ स्थिति में मौजूद रहता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
तिजोरी में रखें चांदी का टुकड़ा
चंद्र ग्रहण के दिन, चांदी के एक टुकड़े को दूध और गंगाजल में मिलाकर चंद्रमा की छाया में रख दीजिए। इसके बाद चंद्र ग्रहण के बाद उसे तिजोरी में संभाल कर रख दीजिए। यह उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा हमेशा बनी रहेगी।
नौकरी ढूंढने में आ रही है बाधा
नौकरी ढूंढने में या ऑफिस में किसी भी प्रकार की बाधा आ रही है तो चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद मीठे चावल पकाइए फिर उसे कौवों को खिला दीजिए। यह उपाय करने से आपकी समस्या दूर हो जाएंगी। ऐसा कहा जाता है कि इस उपाय से दरिद्रता दूर होती है।
धन की समस्या से मुक्ति के उपाय
धन से जुड़ी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए चंद्र ग्रहण की रात में एक नए ताले को चांद की रोशनी में रख दें फिर सुबह उठकर उसे मंदिर में संभाल कर रख दें। यह उपाय करने से तमाम आर्थिक समस्या दूर होती है। कर्ज से छुटकारा पाने के लिए भी यह उपाय कारगर है।
बीमार व्यक्तियों को नियमों में छूट
जो व्यक्ति बीमार हैं चाहे वह किसी भी उम्र के हों। ऐसे लोगों को भी ग्रहण के दौरान सोने और खाने-पीने के नियमों में छूट होती है। इसलिए अगर आप या आपके घर पर कोई भी बीमार व्यक्ति है तो ग्रहण के दौरान पूरा आराम करने दें और समय पर खाना और दवाई जरूर लें।
बड़े-बुजुर्ग को न रखें भूखा
घर पर अगर बड़े-बुजुर्ग हैं तो उन्हें भी भूखा ना रखें। ग्रहण की अवधि लंबी हो तो उन्हें समय पर भोजन करने दें। क्योंकि उम्र ढलने के साथ शारीरिक क्षमता कमजोर हो जाती है। इसलिए शरीर में जब तक शक्ति है तब तक नियमों का पालन करना जरूरी है।
नवजात शिशु को भूखा न रखें
छोटे बच्चे ज्यादा देर तक भूखे नहीं रह सकते। क्योंकि बच्चे खेलते-कूदते रहते हैं। इसलिए उन्हें बड़े लोगों की अपेक्षा थोड़ी-थोड़ी देर में खाने-पीने की चीजें देनी चाहिए। इसके अलावा दूध पीते बच्चे या नवजात शिशु को भी ग्रहण के दौरान भूखा ना रखें और उन्हें प्रर्याप्त नींद लेने दें।
गर्भवती महिलाएं को मिली है छूट
चंद्र ग्रहण के दौरान खाने-पीने पर सख्त मनाही होती है। लेकिन यदि ग्रहण लंबा है तो गर्भवती महिलाएं खाना खा सकती हैं। गर्मी के मौसम में गर्भवती महिलाओं को ज्यादा देर तक बिना खाए-पिए नहीं रहना चाहिए। इससे पानी की कमी यानी निर्जलीकरण हो सकती है। इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में पानी या जूस वगैरह पीते रहें। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि ग्रहण के दौरान बहुत ज्यादा या भारी भोजन ना करें।
चंद्र ग्रहण के दिन ऐसे करें व्रत का पारण
चंद्र ग्रहण के दौरान, खाना बनाना या खाना, सोना, आदि वर्जित माना गया है। इस बीच लोग नुकीली चीजों को भी नहीं छूते हैं। चंद्र ग्रहण व्रत का पारण करने से पहले अपने घर को साफ सुथरा कर लें फिर स्नान आदि करके भगवान की पूजा करें। उसके बाद साफ रसोई में खाना बनाएं और व्रत का पारण करें।
घर में शांति बनाकर रखें शांति
चंद्र ग्रहण से पहले स्नान आदि अवश्य कर लें। चंद्र ग्रहण के समय अपने इष्ट देव या किसी भी भगवान की पूजा-अर्चना आप कर सकते हैं। चंद्र ग्रहण काल में घर में शांति बनाकर रखना लाभदायक होता है। चंद्र ग्रहण में दान करना बहुत फायदेमंद माना जाता है।
घर में करें गंगाजल का छिड़काव
ज्योतिषी बताते हैं कि चंद्र ग्रहण के बाद घर को साफ करके गंगाजल का छिड़काव करना शुभ होता है। चंद्र ग्रहण के दौरान किसी भी खाने-पीने की चीज पर तुलसी का पत्ता अवश्य रख दें। चंद्र ग्रहण काल में गर्भवती महिलाएं अपने पास नारियल का गोला अवश्य रखें। चंद्र ग्रहण काल में भोजन ना पकाना चाहिए और ना ही खाना चाहिए। इस दौरान पूजा पाठ करें और मन में सात्विक विचार रखें।
चंद्र ग्रहण का समय
सोमवार 16 मई 2022 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय समयानुसार, चंद्र ग्रहण सुबह 08 :59 बजे शुरू होगा और 10:23 पर समाप्त हो जाएगा। यह खग्रास चंद्र ग्रहण होगा, जो कि भारत में दिखाई नहीं देगा।
बुद्ध पूर्णिमा के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण
साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण वैशाख पूर्णिमा यानी बुद्ध पूर्णिमा के दिन लग रहा है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान कर पूजा-पाठ और दान करते हैं। लेकिन ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते। ऐसे में लोग असमंजस में हैं कि क्या इस दिन स्नान-दान जैसे कार्य किए जा सकेंगे या ग्रहण का प्रभाव होगा। आपको बता दें कि, ग्रहण का सूतक काल लगते ही धार्मिक गतिविधियों पर मनाही होती है।
कहां देखा जा सकेगा 2022 का पहला चंद्र ग्रहण
16 मई को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। लेकिन दक्षिणी और पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी-पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर, अंटार्कटिका और अटलांटिक जैसे देशों में यह चंद्र ग्रहण पूर्ण रूप से देखा जा सकेगा।
पूर्ण चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?
ग्रहण का लगना विज्ञान और धार्मिक दृष्टिकोन से महत्वपूर्ण माना जाता है। विज्ञान में चंद्र ग्रहण को एक खगोलीय घटना कहा जाता है। जिसके अनुसार सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा जब एक रेखा में आ जाते हैं तो चांद को पृथ्वी की छाया पूरी तरह से ढक लेती है। ऐसे में पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है। इस दौरान चंद्रमा लाल दिखाई पड़ता है। आसान भाषा में समझें तो, सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो चंद्रमा पर प्रकाश पड़ना बंद हो जाता है, इसे ही चंद्र ग्रहण कहते हैं। वहीं धार्मिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण को अशुभ माना जाता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है।
भारत में जानें क्यों मान्य नहीं होगा सूतक काल
वैसे तो साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में नहीं देखा जा सकेगा। इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।
चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्रियां ना करें ये काम
- 1. ग्रहण के दौरान भोजन करने की मनाही होती है। लेकिन गर्भवती महिला के ज्यादा देर भूखे रहने का असर शिशु के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। यदि ग्रहण की अवधि लंबी हो तो आप भूखे ना रहे जूस या पानी वगैरह पीते रहें। लेकिन बहुत ज्यादा या भारी भोजन ग्रहण के दौरान करने से बचें।
- 2. चंद्र ग्रहण के दौरान किसी भी तेज धार वाली वस्तु जैसे कैंची, पिन ,सुई, चाकू या छुरी का इस्तेमाल ना करें। ऐसा करने के जन्म के बाद बच्चे के शरीर में जन्मचिह्न आ सकते हैं।
- 3. ग्रहण के दौरान गर्भवती स्त्री को बाहर नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि ग्रहण की छाया के प्रभाव से गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है।
- 4. गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण के दौरान यात्रा करने से भी बचना चाहिए। इस समय यात्रा करना शुभ नहीं माना जात है।
चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद करें दान
ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव गर्भवती महिला पर पड़ता है। इसलिए ग्रहण समाप्त होने के बाद गर्भवती महिला को जरूर स्नान करना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के बाद दान करने का भी नियम है। दान करने से ग्रहण का दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है। आप अन्न, पैसा, कपड़ा किसी भी चीज का दान अपने सामार्थ्य अनुसार जरूर करें।
पूरे घर पर छिड़क दें गंगाजल
चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद घर की अच्छे से सफाई करें। अगर पूरे घर को साफ करना और धोना संभव ना हो आप पूरे घर पर गंगाजल छिड़क दें। घर की सफाई करने के बाद आप धूप-बत्ती भी करें। इससे ग्रहण के दौरान की सारी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। चंद्र ग्रहण ग्रहण समाप्त होने के तुरंत बाद स्नान करना चाहिए। वैसे तो ग्रहण के बाद गंगा स्नान का महत्व होता है। लेकिन अगर गंगा स्नान संभव ना हो आप नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं।
अशुभ माना जाता है चंद्र ग्रहण
धार्मिक दृष्टिकोण से चंद्र ग्रहण को अशुभ माना जाता है और इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। जिसका दुष्प्रभाव व्यक्ति और आसपास की चीजों पर भी पड़ता है। इसलिए जिस तरह चंद्र ग्रहण के दौरान कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है, ठीक उसी तरह चंद्र ग्रहण समाप्त होने के तुरंत बाद कुछ कामों को करना जरूरी होता है।
Lunar Eclipse 2022: भारत में नहीं पड़ेगा चंद्र ग्रहण का प्रभाव
साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण 16 मई को लगने जा रहा है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। हालांकि भारत में इसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। बता दें सूतक काल ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले लग जाता है।
ग्रहण काल के दौरान भूलकर ना करें ये कार्य
ग्रहण काल में खाना, सोना और यात्रा करना वर्जित माना जाता है। तथा इस दौरान सभी शुभ कार्यों के साथ पूजा पाठ व भजन कीर्तन की मनाही होती है। धार्मिक ग्रंथों की मानें तो ग्रहण काल में मनुष्य के साथ सभी देवतागण भी संकट में होते हैं। यही कारण है कि मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। ध्यान रहे सूतक काल के दौरान घर में ना तो खाना पकाना चाहिए और ना ही खाना चाहिए। रसोई में रखी चीजों में तुलसी का पत्ता डालकर रख दें, इससे भोजन पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता। साथ ही गर्भवती महिलाओं को सूतक काल में सावधान रहना चाहिए, कोशिश करें की घर से बाहर ना निकलें और चंद्रमा की रोशनी आप तक ना पहुंचे।
What Is Chandra Grahan or Lunar Eclipse: क्या है चंद्र ग्रहण
वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रहण एक खगोलीय घटना है, ग्रहण के दौरान ब्रह्मांड में कई अद्भुत घटनाएं घटित होती हैं। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है तो चंद्रमा पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक जाता है, परिणामस्वरूप आंशिक या पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है। पूर्ण चंद्र ग्रहण सबसे प्रभावशाली माना जाता है, इस दौरान चंद्रमा का रंग पूरी तरह बदलकर लाल हो जाता है और धब्बे दिखाई देते हैं।
Chandra Grahan Date and Time: जानें चंद्र ग्रहण का समय
Chandra Grahan or Lunar Eclipse 2022 Date and Time in India
चंद्र ग्रहण 2022 – 16 मई 2022, सोमवार
चंद्र ग्रहण 2022 आरंभ – 16 मई 2022, सुबह 7:02 बजे से
चंद्र ग्रहण की समाप्ति – 16 मई 2022, दोपहर 12:20 तक
विशाखा नक्षत्र में लगेगा चंद्र ग्रहण
ज्योतिष विद्या के अनुसार साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण विशाखा नक्षत्र में होगा। आरंभिक अवस्था में चंद्रमा तुला राशि में विराजमान रहेगा और समाप्ति के समय वृश्चिक राशि में होगा। यानी तीन बिंदु विशाखा नक्षत्र, तुला राशि और वृश्चिक राशि इससे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में इस राशि के जातकों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।
गर्भवती महिलाएं रखें खासा ध्यान
ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भ में पहल रहे बच्चों का खासा ध्यान रखना चाहिए। कोशिश करें कि इस दौरान घर से बाहर ना निकलें, क्योंकि इस दौरान सूर्य और चंद्रमा से निकलने वाली किरणें गर्भ में पहल रहे शिशु के लिए खतरनाक मानी जाती हैं, इससे बच्चे में कई तरह की शारीरिक विकृतियां पैदा हो सकती हैं।
इसे कहते हैं ब्लड मून
पूर्ण चंद्र ग्रहण को ब्लड मून भी कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा पूरा लाल रंग का हो जाता है। वैज्ञानिकीय गणना के अनुसार यह एक खगोलीय घटना है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा को पूर्ण रूप से ढ़क लेती है, जिसके कारण सूर्य की रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से टकराकर चंद्रमा पर पड़ती है और इसका रंग लाल रंग का हो जाता है। वास्तव में यह अद्भुत दृश्य होता है, लेकिन ध्यान रहे कभी भी चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए।
चंद्र ग्रहण के दिन बुद्ध पूर्णिमा और वैशाख पूर्णिमा का बन रहा संयोग
इस बार चंद्र ग्रहण के दिन बुद्ध पूर्णिमा और वैसाख पूर्णिमा का खास संयोग बन रहा है। ऐसे में इस दिन स्नान दान का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। मान्यता है कि ग्रहण काल के बाद किसी पात्र व्यक्ति या ब्राह्मण को दान करने से भगवान का आशीर्वाद सदैव अपने भक्तों पर बना रहता है और घर से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और सकारात्मकता का वास होता है। इसलिए चंद्र ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान आदि कर दान अवश्य करें।
इस राशि के जातक होंगे मालामाल
वहीं ज्योतिषशास्त्रों की मानें तो इस दिन तीन राशियों के जातक मालामाल हो जाएंगे। जी चंद्र ग्रहण मेष राशि, सिंह राशि और धनु राशि के जातकों के लिए काफी लाभकारी साबित होगा। इस राशि के जातकों को कारोबार में सफलता मिलेगी तथा नौकरी के क्षेत्र में अच्छी खबर सुनने को मिलेगी। साथ ही लंबे समय से लक्ष्य के प्रति कड़ी मेहनेत करने वाले छात्रों को लक्ष्य की प्राप्ति होगी।
इस राशि के जातक रहें सावधान
ज्योतिषशास्त्रों के मुताबिक साल का पहला चंद्र ग्रहण वृश्चिक राशि पर लगने जा रहा है। इन राशियों के जातकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। क्योंकि ग्रहण का सबसे ज्यादा नकारात्मक प्रभाव इन राशियों के जातकों पर देखने को मिल सकता है। जातकों को शारीरिक और मानसिक समस्याओं के साथ आर्थिक तंगी यानी व्यापार में घाटा, नौकरी में अड़चन अन्य का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस राशि के जातक सावधान रहें।
यहां लाइव देख सकेंगे चंद्र ग्रहण का पूरा नजारा
यदि आप चंद्र ग्रहण देखना चाहते हैं, तो आपको निराश होने की जरूरत नहीं है। नाशा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनल पर लाइव स्ट्रीमिंग करेगा। साथ ही टाइम्स नाउ नवभारत के डिजिटल साइट पर भी आप चंद्र ग्रहण का पूरा नजारा देख सकेंगे। इस दौरान चंद्रमा का रंग सफेद से पूरा लाल हो जाता है और धब्बे दिखाई देते हैं।
भूलकर भी ना करें ये कार्य
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ग्रहण काल के दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दें, भगवान की मूर्ती ना छुएं। मान्यता है कि ग्रहण काल में सभी देवी देवता संकट में होते हैं। साथ ही चंद्र ग्रहण की अवधि में यात्रा करने से बचना चाहिए। ध्यान रहे ग्रहण काल में भोजन करना भी वर्जित माना जाता है, इस दौरान भूलकर भी चूल्हा ना जलाएं और खाने पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता डालकर रख दें, इससे उन चीजों पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
वहीं ग्रहण के वक्त कांच की चीजों से दूरी बनाए रखें, शीशा नकारात्मक शक्तियों का द्वार माना जाता है इसलिए कांच की वस्तुओं से दूरी बनाए रखें। ग्रहण काल में किसी भी व्यक्ति से कोई भी चीज उधार या उपयोग के लिए नहीं लेना चाहिए। इस दौरान लोग कर्मकांड और टोटके करते हैं इसलिए इन चीजों से दूरी बनाए रखें। बता दें ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
ग्रहण काल में क्या करें
ग्रहण काल शुरू होने से पहले स्नान आदि कर अपने ईष्टदेव या देवी देवताओं की पूजा अर्चना करें। इस दौरान घर में एकांत जगह में बैठकर भगवान के नाम का जप करें या हनुमान चालीसा का पाठ करें। साथ ही ग्रहण काल की समाप्ति के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करें, मंदिर का कपाट खोलने के बाद सभी देवी देवताओं को स्नान कराएं और धूप दीप कर पूजा पाठ करें।
इस दिन लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण
साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण 16 मई 2022, सोमवार को लगने जा रहा है। भारतीय समयानुसार ग्रहण काल 16 मई 2022, सोमवार को सुबह 08 बजकर 59 मिनट से दोपहर 10 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। यानी ग्रहण काल की कुल अवधि 1 घंटे 24 मिनट होगी। हालांकि भारत में इसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। वहीं दक्षिणी अमेरिका, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में इस ग्रहण का प्रभाव देखा जा सकता है।
चंद्र ग्रहण के प्रकार, कब लगता है सूतक काल
चंद्र ग्रहण का वैज्ञानिक महत्व भी है। वैज्ञानिकीय दृष्टिकोण के अनुसार चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है तो चंद्रमा पूरी तरह या आंशिक रूप से ढ़क जाता है, परिणामस्वरूप आंशिक या पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है। बता दें चंद्र ग्रहण तीन प्रकार का होता है। पहला उपच्छाया ग्रहण, इस दौरान चंद्रमा के आकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, इस स्थिति में ग्रहण की पहचान करना भी मुश्किल होता है। जबकि आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी पूरी तरह ना आकर केवल इसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, इस दौरान सूतक काल का पालन करना होता है।
वहीं पूर्ण चंद्र ग्रहण की स्थिति में सूतक काल पूरी तरह मान्य होता है, इस स्थिति में पृथ्वी चंद्रमा को पूरी तरह ढक लेती है और चंद्रमा का रंग सफेद से लाल हो जाता है। बता दें इस बार पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि भारत में इसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा।
राहु और केतु अत्यंत प्रभावशाली हैं
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु और केतु को छाया ग्रह के नाम से जाना जाता है। ये दोनों ग्रह एक ही राक्षस के शरीर से जन्मे हैं, राक्षस के सिर वाला भाग राहु कहलाता है, जबकि धड़ वाला हिस्सा केतु के नाम से जाना जाता है। कुछ ज्योतिष इन्हें रहस्यवादी ग्रह मानते हैं, यदि किसी व्यक्ति के कुण्डली में राहु-केतु का वास हो जाए, तो उसके जीवन में भूचाल आ जाता है। यह इतने प्रभावशाली और ताकतवर हैं कि सूर्य और चंद्रमा ग्रहण भी इनके कारण ही लगता है।
इस दौरान संकट में होते हैं देवतागण
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार ग्रहण काल के दौरान मनुष्यों के साथ देवतागण भी संकट में होते हैं। यही कारण है कि इस दौरान मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा पाठ और भजन-कीर्तन की मनाही होती है। ग्रहण काल समाप्त होने के बाद पूरे घर को गंगाजल से स्वच्छ करें और मंदिर को साफ कर देवी देवताओं को स्नान करवाना चाहिए। तथा ग्रहण के प्रभान को कम करने के लिए दान करना शुभ माना जाता है।
इस कारण माना जाता है अशुभ
भगवान विष्णु ने राहु के दो टुकड़े कर दिए। जिससे ऊपर वाला भाग राहु कहलाया और नीचे वाला भाग केतु। इस घटना के बाद राहु ने चंद्रमा और सूर्य को अपना शत्रु मान लिया। इसलिए हर पूर्णिमा के दिन राहु-केतु चंद्रमा को घेर लेते हैं और उसकी रोशनी रोक देते हैं। जब वह इसमें सफल हो जाते हैं तो इसे ही चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इसी कारण ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है और ग्रहण लगने पर देवी-देवताओं की पूजा नहीं की जाती है।
राहु पर चलाया सुदर्शन चक्र
चंद्रमा और सूर्य ने राहु को अमृतपान करते हुए देख उन्होंने भगवान विष्णु को ये बात बता दी। राहु के अमृतपान करने की बात सुनते ही भगवान विष्णु क्रोधित हो गए और उन्होंने गुस्से में अपने सुदर्शन चक्र से राहु पर वार किया। लेकिन राहु अमृत पान कर चुका था, जिस कारण सुदर्शन चक्र का असर उस पर नहीं हुआ और वह फिर से जीवित हो गया।
देवताओं की पंक्ति में बैठ गया राहु
विष्णुजी ने देवताओं और असुरों को अमृतपान कराने के लिए अलग-अलग पंक्ति में बैठा दिया। विष्णुजी ने असुरों से बचा कर देवताओं को अमृतपान करा दिया। लेकिन राहु, देवताओं की पंक्ति में बैठ गया और अमृतपान कर लिया।
भगवान विष्णु ने किया स्त्री मोहिनी रूप धारण
पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश निकला तो, अमृतपान करने के लिए देवताओं और असुरों के बीच विवाद हो गया। इस समस्या के समाधान के लिए सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब भगवान विष्णु के सुंदर स्त्री मोहिनी का रूप धारण किया।

