अध्यात्म

Saraswati Mata Ka Gana: मां शारदे कहां तू वीणा बजा रही है...बसंत पंचमी पर सुनें मां सरस्वती के ये खूबसूरत भजन

Basant Panchami Song, Saraswati Puja Ka Gana (सरस्वती माता के गाने): बसंत पंचमी का त्योहार इस साल 2 और 3 फरवरीको मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर हम आपके लिए लेकर आए हैं सरस्वती माता के सुपरहिट भजनों का कलेक्शन।

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Basant Panchami Songs, Saraswati Puja Ka Gana

Basant Panchami Song, Saraswati Puja Ka Gana (सरस्वती माता के गाने): सनातन धर्म में बसंत पंचमी यानी सरस्वती पूजा के त्योहार का विशेष महत्व माना जाता है। ये त्योहार हर साल माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं और विधि विधान माता सरस्वती की पूजा करते हैं। इसके अलावा इस दिन सरस्वती माता के भजनों को भी खूब सुना-सुनाया जाता है। यहां आप देखेंगे सरस्वती माता के सदाबहार भजन।

मां शारदे कहां तू, वीणा बजा रही हैं (Maa Sharde Kaha Tu Veena Baja Rahi Hain)

श्लोक:

सरस्वती नमस्तुभ्यं, वरदे कामरूपिणी,

विद्यारम्भं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा।

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

किस भाव में भवानी,

तू मग्न हो रही है,

विनती नहीं हमारी,

क्यों माँ तू सुन रही है । ..x2

हम दीन बाल कब से,

विनती सुना रहें हैं,

चरणों में तेरे माता,

हम सर झुका रहे हैं,

हम सर झुका रहे हैं ।

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

अज्ञान तुम हमारा,

माँ शीघ्र दूर कर दो,

द्रुत ज्ञान शुभ्र हम में,

माँ शारदे तू भर दे । ..x2

बालक सभी जगत के,

सूत मात हैं तुम्हारे,

प्राणों से प्रिय है हम,

तेरे पुत्र सब दुलारे,

तेरे पुत्र सब दुलारे ।

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

हमको दयामयी तू,

ले गोद में पढ़ाओ,

अमृत जगत का हमको,

माँ शारदे पिलाओ । ..x2

मातेश्वरी तू सुन ले,

सुंदर विनय हमारी,

करके दया तू हर ले,

बाधा जगत की सारी,

बाधा जगत की सारी ।

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

माँ शारदे कहाँ तू,

वीणा बजा रही हैं,

किस मंजु ज्ञान से तू,

जग को लुभा रही हैं ॥

Saraswati Puja Ka Gana (सरस्वती पूजा गाना)

प्रार्थना/हे शारदे माँ (Hey Sharde Maa Lyrics)

शारदे माँ, हे शारदे माँ

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ

अज्ञानता से हमें तारदे माँ, हे शारदे माँ॥

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ

अज्ञानता से हमें तार दे माँ हे शारदे माँ॥

तू स्वर की देवी, ये संगीत तुझसे

हर शब्द तेरा है, हर गीत तुझसे

हम है अकेले, हम है अधूरे

तेरी शरण हम, हमें प्यार दे माँ

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ

अज्ञानता से हमें तार दे माँ॥

मुनियों ने समझी, गुणियों ने जानी

वेदों की भाषा, पुराणों की बानी

हम भी तो समझे, हम भी तो जाने

विद्या का हमको अधिकार दे माँ

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ

अज्ञानता से हमें तार दे माँ॥

तू श्वेतवर्णी, कमल पर विराजे

हाथों में वीणा, मुकुट सर पे साजे

मन से हमारे मिटाके अँधेरे

हमको उजालों का संसार दे माँ

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ

अज्ञानता से हमें तार दे माँ॥

शारदे माँ, हे शारदे माँ

अज्ञानता से हमें तार दे माँ

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ॥

हे सरस्वती माँ ज्ञान की देवी किरपा करो (Hey Saraswati Maa Gyan Ki Devi Kirpa Karo)

हे सरस्वती माँ ज्ञान की देवी किरपा करो

देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो

करुनामई है तू वरदानी कमल तेरे कर साजे है

आनंद मंगल कर देती है जिस घर मात विराजे है,

ज्ञान से तेरे सरस्वती माँ अँध्यारो का नाश हुआ

समृधि आई उस घर माँ जिस घर तेरा वास हुआ

अपनी महिमा से घर मेरा खुशियों से भरो

देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो

सात सुरों की देवी हो तुम सात सुरों में वास तेरा

सरगम से गूंजे ये धरती सरगम से आकाश तेरा

तेरी किरपा से सरस्वती माँ मंगल सब हो जाता है

जिसके कंठ विराजे माता बिगड़ा भग्य बन जाता है

मेरे भी सारे काज मात तूम पूरण करो

देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो

वीणा धारनी विपदा हारनी कितनी पावन हो माता

देव ऋषि तुम्हे नमन करे माँ दर्शन तेरा मन भाता

गुनी जनों की हो हित कारी सब को शरण लगाती हु

जिसकी वाणी में बस जाओ माला माल बनाती हो

हम दीं हीन पे मात मेरी तुम ध्यान धरो

देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो

Laveena Sharma
लवीना शर्माauthor

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर की रहने वाली हूं। पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट हूं। 10 साल से मीडिया में काम कर रही हूं। पत्रकारिता में करियर की शुरुआत न्यूज 24 से हुई। इसके बाद तमाम चैनलों में काम किया। जहां स्क्रिप्ट राइटिंग, एडिटिंग और एंकरिंग का अनुभव हासिल हुआ। रफ्तार यहीं नहीं रूकी अब चाह थी कुछ नया करने की जिसके लिए मैंने डिजिटल मीडिया में स्विच किया और मैं जनसत्ता से जुड़ गई। जनसत्ता में मैंने अध्यात्म सेक्शन लीड किया। इसके बाद पत्रिका में सेवाएं दी और अब timesnowhindi.com से जु़ड़ी हूं। यहां भी मैं अध्यात्म सेक्शन में कार्यरत हूं। भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्योतिष शास्त्र में मेरा शुरू से ही लगाव रहा है। मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा कंटेट लिखूं जिससे बड़े बुजुर्ग ही नहीं बल्कि आज के युवा भी कनेक्ट कर सकें।

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