अध्यात्म

Basant Panchami 2023: बसंत पंचमी पर सब कुछ होता है पीला−पीला, मन के विचारों में परिवर्तन के लिए कारगर है ये रंग

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 17, 2023, 12:00 AM IST

Basant Panchami 2023: ऋतुराज वसंत के आगमन का दिन होता है बसंत पंचमी। प्रकृति हर ओर से श्रंगारित होती है। 26 जनवरी को इस वर्ष बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाएगा। मां सरस्वती की वंदना का विशेष महत्व होता है इस दिन। बसंत पंचमी पर पीले रंग पुष्प, वस्त्र, भाेजन आदि होते हैं खास। आइये आपकाे बताते हैं पीले रंग के क्या होता है इतना खास।

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मन के विचारों में परिवर्तन के लिए कारगर है पीला रंग

KEY HIGHLIGHTS
  • 26 जनवरी को बसंत पंचमी का त्यौहार
  • मां सरस्वती की आराधना होती है इस दिन
  • पीत या पीले रंग का होता है विशेष महत्व

Basant Panchami 2023: 26 जनवरी को ऋतुराज बसंत के आगमन का दिन बसंत पंचमी का त्याैहार है। इस दिन धानी धरती पीत रंग से श्रंगारित होती है। खेतों में लहलहाती पीली फसल, बगिया में खिलते पीले फूल, पीले ही परिधान पहनें हर नारी और पुरुष, जैसे संदेश देते हैं कि पीत रंग से सजी ऋतु आ चुकी है। उल्लासित मन अब और झूम ले क्योंकि रंगों का पर्व फाग भी द्वार पर पहली दस्तक दे रहा है।

बसंत पंचमी पर्व की सुंदरता काे पीला रंग और भी दिव्य रूप दे देता है। लेकिन क्या पीले रंग के पीछे छुपे इसके महत्व के बारे में जानते हैं। आइये आपको सनातन धर्म के आधार पर बताते हैं कि धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से ये रंग इतना अहम क्यों है।

पीला रंग इतना अहम क्यों

भारतीय संस्कृति और अध्यात्म में रंगों का बहुत महत्व बताया गया है। रंग उमंग प्रदान करते हैं। वहीं हमारी प्रवृत्ति पर अंकुश भी लगाते हैं। हमें उत्तेजित भी करते हैं और हम में समभाव भी पैदा करते हैं। बात करते हैं पीला या केसरिया रंग की। पीत या पीले वस्त्र हमेशा शुद्धता, पवित्रता एवं सात्विकता के लिए होते हैं। पीले रंग के कारण आत्मबोध का ज्ञान होता है। पूजा के समय भी आराधना में पीला तिलक, पीले वस्त्र, स्वर्ण, हल्दी, पीले पुष्प आदि का समन्वय होता है। पीत वर्ण के कारण से मानसिक तनाव कम होता है। मानसिक संवेगों में समन्वय भाव से तरंगें चलती रहती हैं। अतः साधना में भी पीले उपवस्त्र या पीत शाल उपयोग में लाया जाता है। पीत रंग मार्ग प्रशस्ती के लिए आवश्यक तत्व है। विभिन्न संस्कारों में पीले रंग की वस्तुओं का समन्वय के साथ दीक्षा दी जाती है। पुस्तकों के आवरण या पृष्ठ में यदि पीली परत हो तो छात्रों की स्मृति के आयाम में वृद्धि होती है। पीला भाेजन हल्दी, केसर आदि शारीरिक शुद्धि एवं पुष्टता के लिए आवश्यक होते हैं। क्योंकि शरीर के प्रत्येक जोड़ में पीले इलास्टिन तंतुओं की उपस्थिति होती है।

पीला रंग करता है मानसिक परिवर्तन

जब भी पीली वस्तु के दर्शन होते हैं मानसिक विचार धारा में अनायास ही बौद्धिक परिवर्तन होना आरंभ हो जाता है। मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति को प्रथम भाव में पीली वस्तु से उत्तेजना होती है लेकिन धीरे धीरे वो शांत होने लगता है। जो लोग पीले पदार्थ से दूर भागते हैं वह शक करने वाले एवं मानसिक रूप से असंतुष्ट होते हैं। पीले रंग में विशिष्ट ओज क्षमता होने के कारण मानसिक विकृ्ति धारा वाले व्यक्ति को पीला रंग बिल्कुल पसंद नहीं आता। कभी कभी पीले रंग की उपस्थिति के कारण बौद्धिक क्षमता का अनायास प्रसारण होने लगता और अक्षम व्यक्ति भी गहरी आध्यात्मिक अवधारणा की चर्चा कर जाता है। पीले रंग पर दृष्टि मात्र से बुद्धि चक्र में परिवर्तन के भाव जाग्रत होते हैं।

(डिस्क्लेमर: यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्‍स नाउ नवभारत इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है।)

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