Shiv Chalisa Path: 14 जुलाई से सावन का महीना शुरू होने वाला है। सावन का महीना 12 अगस्त तक रहेगा। इस बार सावन के सोमवार में चार सोमवार पड़ रहे हैं। जिसमें से पहला सोमवार 18 जुलाई को पड़ेगा। सावन का महीना शिव भक्तों के लिए सबसे खास महीना माना जाता है। भगवान भोलेनाथ को भी सावन अति प्रिय हैं। भगवान भोलेनाथ सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता है। मात्र एक लोटा जल से भी भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है। सावन के महीने में शिव भक्त तरह तरह से भगवान शिव को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। सावन के महीने में शिव चालीसा पाठ का विशेष महत्व है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में नियमित रूप से शिव चालीसा का पाठ करने से भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। इसके अलावा व्यक्ति के जीवन से सारे दुख कष्ट दूर हो जाते हैं। आइए जानते हैं शिव चालीसा कैसे करनी चाहिए व इसका
क्या महत्व है।
शिव चालीसा का पाठ
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाए। मुण्डमाल तन छार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
॥दोहा॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥
जानिए, कैसे करें शिव चालीसा का पाठ
शिव चालीसा का पाठ करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। स्नान करने के बाद साफ कपड़ा धारण करें। शिव चालीसा का पाठ करने के लिए अपना मुंह पूर्व दिशा में रखें और साफ आसन पर बैठ जाएं। पाठ शुरू करने से पहले गाय के घी का दीपक जलाएं और मंदिर में तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर उसमें थोड़ा गंगाजल मिलाकर रखें। शिव चालीसा का पाठ शुरू करने से पहले भगवान श्री गणेश का श्लोक करें और उन्हें नमन करें। उसके बाद शिव चालीसा का पाठ बोल बोल कर पढ़ें। ताकि सबको सुनाई दें। भगवान शिव की चालीसा का तीन बार पाठ करना शुभ माना जाता है।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

