Annapurna Stotram: नियमित करें अन्नपूर्णा स्त्रोत का पाठ, घर पर नहीं होगी अन्न-धन की कमी

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 14, 2022, 06:38 PM IST

Annapurna Stotram: मां अन्नपूर्णा को अन्न की देवी कहा गया है। मां अन्नपूर्णा की कृपा से कोई व्यक्ति भूखा नहीं सोता और घर पर कभी भी अन्य-धन की कमी नहीं होती। प्रतिदिन अन्नपूर्णा स्त्रोत का पाठ करने से मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद बना रहता है।

Annapurna Stotram: नियमित करें अन्नपूर्णा स्त्रोत का पाठ, घर पर नहीं होगी अन्न-धन की कमी

Annapurna Stotram Path: मां जगदंबा के विभिन्न रूपों में उनका एक रूप अन्नपूर्णा भी है। मां अन्नपूर्णा को शास्त्रों में अन्न की देवी कहा गया है। मान्यता है कि जिस घर पर मां अन्नपूर्णा का आशीर्वाद होता है, उस घर पर कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोता। मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से घर पर कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती। इसलिए हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर पर अन्नपूर्णा देवी की कृपा बनी रहे। मां अन्नपूर्णा को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन उनकी पूजा घर पर जरूर करनी चाहिए। इसके साथ ही अगर अन्नपूर्णा स्त्रोत का पाठ किया जाता है तो घर पर कभी भी भोजन की कमी नहीं होती। मां अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से अन्न का भंडार सदा भरा रहता है। जानते हैं मां अन्नपूर्णा स्त्रोत का पाठ और इससे जुड़ी विधि के बारे में।

अन्नपूर्णा स्त्रोत

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौंदर्यरत्नाकरी।

निर्धूताखिल-घोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी।

प्रालेयाचल-वंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी।

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपुर्णेश्वरी।।

नानारत्न-विचित्र-भूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी।

मुक्ताहार-विलम्बमान विलसद्वक्षोज-कुम्भान्तरी।

काश्मीराऽगुरुवासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी।

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।।

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्माऽर्थनिष्ठाकरी।

चन्द्रार्कानल-भासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी।

सर्वैश्वर्य-समस्त वांछितकरी काशीपुराधीश्वरी।

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।।

कैलासाचल-कन्दरालयकरी गौरी उमा शंकरी।

कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओंकारबीजाक्षरी।

मोक्षद्वार-कपाट-पाटनकरी काशीपुराधीश्वरी।

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।।

दृश्याऽदृश्य-प्रभूतवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी।

लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपांकुरी।

श्री विश्वेशमन प्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी।

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।।

उर्वी सर्वजनेश्वरी भगवती माताऽन्नपूर्णेश्वरी।

वेणीनील-समान-कुन्तलहरी नित्यान्नदानेश्वरी।

सर्वानन्दकरी दृशां शुभकरी काशीपुराधीश्वरी।

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।।

आदिक्षान्त-समस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी।

काश्मीरा त्रिजलेश्वरी त्रिलहरी नित्यांकुरा शर्वरी।

कामाकांक्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरी।

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।।

देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुंदरी।

वामस्वादु पयोधर-प्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी।

भक्ताऽभीष्टकरी दशाशुभकरी काशीपुराधीश्वरी।

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।।

चर्न्द्रार्कानल कोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरी।

चन्द्रार्काग्नि समान-कुन्तलहरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी।

माला पुस्तक-पाश-सांगकुशधरी काशीपुराधीश्वरी।

शिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।।

क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरी।

साक्षान्मोक्षरी सदा शिवंकरी विश्वेश्वरी श्रीधरी।

दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी।

भिक्षां देहि कृपावलंबनकरी माताऽन्नपूर्णेश्वरी।।

अन्नपूर्णे सदा पूर्णे शंकरप्राणवल्लभे !

ज्ञान वैराग्य-सिद्ध्‌यर्थं भिक्षां देहिं च पार्वति।।

माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः।

बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्‌।।

अन्नपूर्णा स्तोत्र पाठ की विधि

सुबह स्नानादि के बाद रोजाना की तरह घर के मंदिर में पूजा करें। इसके बाद अन्नापूर्णा स्तोत्र का पाठ करें। इसके लिए मां अन्नपूर्णा की तस्वीर में धूप दीप दिखाएं और भोग अर्पित करें। मां अन्नापूर्णा को भोग के रूप में अन्न अर्पित किए जाते हैं। आप चावल, धान, गेहूं जैसे अन्न पूजा में चढ़ा सकते हैं। इसके बाद अन्नापूर्णा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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