Indira Ekadashi 2022: इस साल कब है इंदिरा एकादशी? जानें इसका महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 14, 2022, 03:12 PM IST

Indira Ekadashi 2022: 21 सिंतबर को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, उपासना से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और हमारा जीवन भी खुशहाल रहता है। इस बार इंदिरा एकादशी पर शिव योग बन रहा है जो पूजा के लिए बहुत ही शुभ है।

Indira Ekadashi 2022: इस साल कब है इंदिरा एकादशी? जानें इसका महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

Indira Ekadashi 2022 Date: आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाता है। पितृपक्ष के दौरान आने वाली इस एकादशी को भगवान विष्णु की विधिवत पूजा बहुत ही फलदायी मानी जाती है। ऐसा कहते हैं कि इस एकदशी पर श्री हरि की उपसना से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। जीवन में सृख-समृद्धि और मत्यु के बाद मोक्ष पाने के लिए भी इस व्रत को बहुत उत्तम माना जाता है। इस बार इंदिरा एकादशी का व्रत 21 सितंबर दिन बुधवार को रखा जाएगा। आइए आपको इसका मुहूर्त और पूजन विधि बताते हैं।

इंदिरा एकादशी की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि मंगलवार, 20 सितंबर को रात 09 बजकर 26 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन यानी बुधवार, 21 सितंबर को रात 11 बजकर 34 मिनट पर इसका समापन होगा। उदिया तिथि के चलते इंदिरा एकादशी का व्रत बुधवार, 21 सितंबर को ही रखा जाएगा।

पूजन विधि
इंदिरा एकादशी पर सवेरे-सवेरे स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें और सच्ची श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा करें। भगवान विष्णु को उनकी प्रिय चीजें अर्पित करें। उन्हें फल, फूल और मिठाई चढ़ाएं। घी का दीपक प्रज्वलित करें और भगवान की आरती उतारें। इसके बाद श्री हरि से मंगलकारी जीवन की प्रार्थना करें। भगवान को चढ़ाया हुआ प्रसाद लोगों में वितरित करें।

पूजा का शुभ मुहूर्त
इंदिरा एकादशी पर सुबह 06 बजकर 09 मिनट से सुबह 09 बजकर 11 मिनट के बीच श्री हरि की पूजा का अबूझ मुहूर्त है। यदि आप इस शुभ मुहूर्त में पूजा नहीं कर पाते हैं तो सुबह 10 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 14 मिनट तक पूजा के लिए दूसरा शुभ मुहूर्त रहेगा। इस दिन सुबह 09 बजकर 13 मिनट से शिव योग भी लग जाएगा। आप इस मुहूर्त में भी विष्णु की पूजा कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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