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भारत-अमेरिका ट्रेड डील: रिश्तों पर जमी बर्फ पिघली, इस बार क्या होगा खास और भारत को क्या मिलेगा?

भारत और अमेरिका के बीच पिछले एक साल से अटकी ट्रेड डील पर कभी भी सहमति का ऐलान हो सकता है। अगर यह ट्रेड डील होता है तो यह भारतीय शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ही अच्छी खबर होगी। भारतीय इकोनॉमी को इस ट्रेड डील से बड़ा बूस्ट मिलेगा। आइए इस ट्रेड डील के हर पहलु को समझते हैं।

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (AI Image)
Authored by: आलोक कुमार
Updated Oct 1, 2026, 11:37 IST
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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच ट्रेड डील, रक्षा, एनर्जी और टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। पीएम मोदी ने एक्स पर बताया कि दोनों नेता वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। वहीं, ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिकी दौरे पर हैं। आइए समझते हैं कि इस बार अमेरिका के साथ होने वाला ट्रेड डील में क्या होगा खास और भारत को क्या मिलेगा फायदा?

ट्रेड डील पर काफी सहमति बनी

बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की है। गोयल ने बुधवार को मिल्वॉकी में जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक से अलग ग्रीर से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने को लेकर सार्थक बातचीत हुई।

गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि बातचीत का मकसद भारत और अमेरिका दोनों के लिए फायदेमंद समझौते को जल्द पूरा करना है। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फोन पर हुई बातचीत के बाद हुई है।

जय शंकर ने भी दिए थे संकेत

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी हाल ही में कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अब लगभग सहमति बन चुकी है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ नीति में हालिया बदलावों के कारण कुछ मुद्दों पर बातचीत अभी जारी है।भारत की अर्थव्यवस्था में छोटे किसान और छोटे उत्पादक बड़ी भूमिका निभाते हैं, इसलिए व्यापार समझौते में कई जटिल पहलुओं पर सावधानी से बातचीत करनी पड़ी। जयशंकर ने कहा था कि डील को अंतिम रूप देने से दोनों देशों के रिश्तों में आए कुछ तनाव कम हो सकते हैं।

फरवरी से अटका हुआ है मामला

भारत और अमेरिका ने इस साल फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के लिए एक रूपरेखा तैयार करने की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिका की टैरिफ व्यवस्था में बदलाव के बाद यह ट्रेड डील अटक गया।

वाणिज्य मंत्री गोयल ने 24 सितंबर को कहा था कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता तय हो चुका है, लेकिन इसे लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि अमेरिकी बाजार में भारत को उसके प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले उचित अवसर मिले। भारत के प्रमुख प्रतिस्पर्धियों में चीन, बांग्लादेश और आसियान देशों के समूह के कई देश शामिल हैं।

अमेरिका से MFN का दर्जा चाह रहा भारत

भारत अमेरिका के साथ ट्रेड डील में MFN यानी Most-Favoured-Nation का दर्जा चाह रहा है। MFN का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका भारत को कोई खास छूट देगा। इसका सीधा सा नियम यह है कि अमेरिका अपने सभी MFN व्यापारिक साझीदारों के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार करेगा। किसी एक देश पर बेवजह ज्यादा टैरिफ (शुल्क) लगाकर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

भारत ऐसा क्यों चाह रहा?

मान लीजिए भारत को किसी प्रोडक्ट पर अमेरिका में 15% टैरिफ (Tariff) मिलता है। कुछ समय बाद अमेरिका किसी दूसरे कंपीटिंग देश को उसी प्रोडक्ट पर पर 10% टैरिफ कर देता है। ऐसी स्थिति में भारतीय निर्यातक कंपटीटिव नहीं रहेंगे। लेकिन, Forward-MFN पर भारत को समान टैरिफ ट्रीटमेंट मिल पाएगा। ट्रंप प्रशासन के आने के बाद अमेरिका ने भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ और कुछ दंडात्मक शुल्क लगाए थे तथा GSP (Generalised System of Preferences) यानी विशेष व्यापार छूट वापस ले ली थी।

प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले मिले समान अवसर

इस डील में भारत चाहता है कि अगर आने वाले समय में अमेरिका किसी दूसरे देश को भारत से बेहतर टैरिफ ट्रीटमेंट देता है या अपनी टैरिफ पॉलिसी में ऐसा बदलाव करता है, जिससे भारतीय एक्सपोर्ट की प्रतिस्पर्धा खत्म हो, तो भारत को भी उस बदलाव के अनुरूप राहत मिल सके। हालांकि अभी यह केवल बातचीत का हिस्सा है और इसका अंतिम रूप तय नहीं हुआ है।

ट्रेड डील हुआ तो भारत को क्या फायदा मिलेगा?

अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में से एक है, और प्रस्तावित ट्रेड डील से टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, फार्मा और फुटवियर जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को बेहतर बाजार पहुंच तथा शुल्क संबंधी स्पष्टता मिलेगी। इस ढांचे के तहत जेनेरिक दवाओं, जेम्स-डायमंड और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर पारस्परिक टैरिफ हटाने के साथ-साथ डेटा सेंटर GPU जैसे टेक उत्पादों में व्यापार व तकनीकी सहयोग बढ़ाने का उल्लेख है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन मजबूत होगी और अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को नया बूस्ट मिलेगा।

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