Pratyusha Banerjee Sucide Case: टीवी एक्ट्रेस प्रत्युषा बनर्जी (Pratyusha Banerjee) के निधन से जुड़ा करीब 10 साल पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रत्युषा को सीरियल ‘बालिका वधू’ (Balika Vadhu) में आनंदी के किरदार से घर-घर पहचान मिली थी। अप्रैल 2016 में उनकी मौत के बाद उनके तत्कालीन बॉयफ्रेंड राहुल राज सिंह (Rahul Raj Singh) पर आत्महत्या के लिए उकसाने समेत कई आरोप लगाए गए थे। इस मामले में पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट भी दाखिल की थी और राहुल ने खुद को केस से डिस्चार्ज किए जाने की मांग की थी। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा। अब 30 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने इस मामले में राहुल राज सिंह की याचिका पर फैसला सुनाते हुए उन्हें राहत दी है।
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल राज सिंह को किया डिस्चार्ज
पीटीआई के मुताबिक, बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल राज सिंह की रिवीजन याचिका मंजूर कर ली है। यह याचिका डिंडोशी सेशंस कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी, जिसमें राहुल की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई थी। सेशंस कोर्ट ने अगस्त 2023 में उनकी अर्जी ठुकरा दी थी। इससे पहले पुलिस ने 2018 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी। राहुल राज सिंह पर आत्महत्या के लिए उकसाने, मारपीट और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। ये कार्रवाई प्रत्युषा बनर्जी की मां की शिकायत के बाद बांगुर नगर पुलिस ने की थी। राहुल पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए थे। जुलाई 2016 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी। इसके बाद उन्होंने केस से डिस्चार्ज किए जाने की मांग की और कहा कि उनके खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला चलाने के लिए जरूरी सबूत मौजूद नहीं हैं।
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कोर्ट ने कपल की आखिरी बातचीत को माना अहम
जस्टिस Dige के सामने इस मामले में राहुल सिंह और प्रत्युषा बनर्जी की मौत से कुछ समय पहले हुई रिकॉर्डेड बातचीत एक अहम बिंदु रही। राहुल के वकील के मुताबिक, इस बातचीत से पता चलता है कि राहुल प्रत्युषा को कोई बड़ा कदम उठाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। बताया गया कि उन्होंने प्रत्युषा से कहा था कि उन्होंने अपनी कार वापस मोड़ ली है और उनसे मिलने आ रहे हैं। वकीलों ने दलील दी कि ये बातचीत इस आरोप से मेल नहीं खाती कि राहुल ने जानबूझकर प्रत्युषा को आत्महत्या के लिए उकसाया था। उन्होंने बातचीत के उन हिस्सों का भी जिक्र किया, जिसमें प्रत्युषा अपनी परेशानी के बारे में बात करते हुए अपने माता-पिता समेत कई लोगों का जिक्र करती हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि एफआईआर बिना किसी सुसाइड नोट के दर्ज की गई थी और राहुल के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने में जल्दबाजी की गई।
