अध्यात्म

अपरा एकादशी की व्रत कथा, आज की एकादशी की कथा, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष ग्यारस की कहानी

Aaj ki Ekadashi ki Vrat Katha (Apara Ekadashi Vrat katha): आज 13 मई 2026, बुधवार को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष ग्यारस पर कौन सी एकादशी का व्रत है। पढ़ें अपरा एकादशी की व्रत कथा।

Image

अपरा एकादशी की व्रत कथा

Aaj ki Ekadashi ki Vrat Katha (Apara Ekadashi Vrat katha): आज 13 मई को अपरा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को सौ गायों के दान के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त पीले वस्त्र धारण कर भगवान को पीले फल, मिठाई और तुलसी दल अर्पित करते हैं तथा श्रद्धा भाव से आरती करते हैं। अपरा एकादशी व्रत में कथा का पाठ करना भी बेहद जरूरी माना गया है। कथा सुनने और पढ़ने के बाद ही पूजा पूर्ण मानी जाती है। आइए जानते हैं अपरा एकादशी (Apara Ekadashi) की पावन व्रत कथा।

अपरा एकादशी की व्रत कथा - Apara Ekadashi Vrat Katha

महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा, “हे जनार्दन! ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी का क्या नाम है और उसका क्या महत्व है? कृपया उसकी कथा और महिमा बताइए।”

तब भगवान श्रीकृष्ण मुस्कुराकर बोले, 'राजन! तुमने समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए अत्यंत उत्तम प्रश्न किया है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की यह पावन एकादशी ‘अपरा एकादशी’ कहलाती है। यह व्रत मनुष्य के बड़े से बड़े पापों का नाश करने वाला और अपार पुण्य देने वाला माना गया है। जो व्यक्ति इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत करता है, उसे अनेक तीर्थों के पुण्य के समान फल प्राप्त होता है।'

भगवान श्रीकृष्ण ने आगे बताया कि अपरा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। चाहे कोई व्यक्ति भूलवश गलत कार्यों में पड़ गया हो, दूसरों की निंदा करता हो, छल-कपट करता हो या अपने कर्तव्यों से विमुख हो गया हो, इस व्रत के प्रभाव से उसे भी पापों से मुक्ति मिल सकती है। यह एकादशी आत्मशुद्धि और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम मानी गई है।

भगवान ने कहा, “जो पुण्य मकर संक्रांति के समय प्रयाग में स्नान करने से मिलता है, जो फल काशी में शिवरात्रि व्रत से प्राप्त होता है, गया में पितरों का श्राद्ध करने से जो लाभ मिलता है, वही पुण्य अपरा एकादशी का व्रत करने से भी मिलता है। सूर्यग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में दान और यज्ञ करने का जो महत्व है, वह भी इस एकादशी के प्रभाव के सामने कम नहीं माना गया है।”

उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा विशेष फलदायी होती है। भक्तों को पीले वस्त्र धारण कर भगवान को पीले फल, मिठाई और तुलसी दल अर्पित करना चाहिए। पूरे दिन उपवास रखकर विष्णु मंत्रों का जाप करना और रात में भजन-कीर्तन करना अत्यंत शुभ माना गया है। व्रत के अंत में अपरा एकादशी कथा सुनने या पढ़ने से व्रत पूर्ण होता है।

इसके बाद युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से अगली एकादशी के बारे में पूछना चाहा। तब भगवान ने कहा कि उसके विषय में महर्षि वेदव्यास विस्तार से बताएंगे। वेदव्यास जी ने समझाया कि एकादशी के दिन अन्न का त्याग करना चाहिए और द्वादशी तिथि में स्नान एवं पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन ग्रहण करना चाहिए।

यह कथा सुनकर भीमसेन ने हंसते हुए कहा, “हे पितामह! मेरे लिए एकादशी का उपवास करना बहुत कठिन है। मेरे भाई, माता कुंती और द्रौपदी सभी मुझे व्रत रखने के लिए कहते हैं, लेकिन मुझसे भूख सहन नहीं होती।”

तब सभी ने भीमसेन को समझाया कि श्रद्धा और संयम से किया गया व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है और जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

और पढ़ें
End of Article