अध्यात्म

Aaj Kaun Sa Vrat Hai: आज ही क्यों है कालाष्टमी, इस शुभ मुहूर्त के बिना भी होगी पूजा, दूर करें कंफ्यूजन

Aaj Kaun Sa Vrat Hai: जिन लोगों को तिथि को लेकर कंफ्यूजन है, उनकी जानकारी के लिए बता दें कि 18 जून दिन बुधवार को ही कालाष्टमी मनाई जाएगी। आज के दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है। लेकिन कालाष्टमी की पूजा शाम के समय होती है। कालाष्टमी पर काल भैरव की पूजा होती है और काले कुत्ते को भोजन कराने का भी विधान है।

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आज ही क्यों मनाई जाएगी कालाष्टमी

Aaj Kaun Sa Vrat Hai: कालाष्टमी का व्रत भक्त जन काल भैरव की कृपा पाने के लिए करते हैं। आषाढ़ के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। हालांकि इस बार सप्तमी तिथि को लेकर कंफ्यूजन है कि यह 18 या 19 जून को। अपना असमंजस अभी दूर करें। कालाष्टमी इस बार 18 जनू को मनाई जारही है।

18 जून को बुधवार के दिन को कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का भी योग बन रहा है। पंचांगानुसार, 18 जून को दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आरंभ होगी जो 19 जून को सुबह 11 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी। कालाष्टमी की पूजा शाम में होती है, इसलिए व्रत 18 जून को रखा जाएगा। हालांकि उदया तिथि 19 जून की बन रही है।

बुधवार के दिन कोई अभिजीत मुहूर्त नहीं है। इस दिन राहुकाल का समय सुबह 12:22 से दोपहर 02:07 तक रहेगा।

वैसे कालाष्टमी का व्रत सप्तमी तिथि के दिन भी हो सकता है। धार्मिक मूलग्रन्थ के अनुसार जिस दिन अष्टमी तिथि रात्रि को प्रबल होती है उस दिन इसका व्रत किया जाना चाहिए। कालाष्टमी के लिए व्रत के दिन का चयन करने के लिए दृक पंचांग सुनिश्चित करता है कि प्रदोष के बाद कम से कम एक घटी के लिए अष्टमी प्रबल होनी चाहिए।

कालाष्टमी का महत्व क्या है

कालाष्टमी भगवान कालभैरव को समर्पित है। इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने से भय, बाधा, और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है। विशेषकर रात्रि में भैरव चालीसा, भैरव स्तोत्र या ओम कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। भगवान काल भैरव को उड़द दाल, काले तिल, और मिठाई का भोग लगाएं साथ ही कालाष्टमी के दिन, काले कुत्ते को भोजन कराना भी शुभ माना जाता है, क्योंकि कुत्ते को काल भैरव का वाहन है।

बुधवार के दिन के व्रत की जानकारी

वेदों में बुधवार के दिन व्रत रखने का प्रावधान है। आप चाहे तो सुख-शांति बुद्धि, समृद्धि और अच्छा स्वास्थ्य बनाए रहने के लिए बुधवार के दिन व्रत भी रख सकते हैं, लेकिन इस व्रत की शुरुआत किसी माह के शुक्ल पक्ष के बुधवार से ही कर सकते हैं, यह व्रत 7, 11 या 21 बुधवार तक रखा जाता है। वहीं व्रत रखने के लिए आप सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और फिर गणेश मंदिर में जाकर भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें हरी मूंग और दूर्वा चढ़ाएं। इसके अलावा, आप ॐ गं गणपतये नमः या ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः मंत्र का जाप भी कर सकते हैं, साथ ही भागवत पुराण का पाठ करना शुभ माना जाता है। भगवान गणेश को हलवा, बेसन के लड्डू या पंजीरी का भोग लगाएं और पूरे दिन निराहार रहें या फलाहार करें। इनपुट - आईएएनएस

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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