4 November Ka Panchang: 04 नवंबर 2025, मंगलवार का दिन, हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि से शुरू होगा, जो रात 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू होगी। यह दिन कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या और आध्यात्मिक कार्यों के लिए विशेष है।
आज के पंचांग से आप जान सकते हैं कि 4 नवंबर के दिन का शुभ और अशुभ काल क्या है। आज नक्षत्र रेवती दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, फिर अश्विनी नक्षत्र प्रभावी होगा। योग में वज्र दोपहर 3 बजकर 43 मिनट तक रहेगा, इसके बाद सिद्धि योग शुरू होगा। करण में गर दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक, वणिज रात 10 बजकर 36 मिनट तक और इसके बाद विष्टि करण रहेगा। पंचांग के माध्यम से आप दिन के शुभ और अशुभ काल का पता लगा सकते हैं।
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
सूर्य आज सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर उदय होगा और शाम 5 बजकर 34 मिनट पर अस्त होगा। चंद्रमा दोपहर 4 बजकर 30 मिनट पर उदय होगा और 05 नवंबर सुबह 6 बजकर 8 मिनट पर अस्त होगा। दिन की अवधि 10 घंटे 58 मिनट 27 सेकंड रहेगी, जबकि रात की अवधि 13 घंटे 02 मिनट 16 सेकंड होगी। मध्याह्न दोपहर 12 बजकर 4 मिनट पर होगा।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण
आज की तिथि शुक्ल चतुर्दशी रात 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगी, इसके बाद शुक्ल पूर्णिमा शुरू होगी। नक्षत्र रेवती दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, फिर अश्विनी नक्षत्र लगेगा। रेवती का पहला पाद सुबह 7 बजकर 15 मिनट तक और दूसरा पाद दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। अश्विनी का पहला पाद शाम 5 बजकर 52 मिनट तक, दूसरा पाद रात 11 बजकर 9 मिनट तक और तीसरा पाद 05 नवंबर सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। योग में वज्र दोपहर 3 बजकर 43 मिनट तक रहेगा, फिर सिद्धि योग शुरू होगा। करण में गर दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक, वणिज रात 10 बजकर 36 मिनट तक और इसके बाद विष्टि करण दिन की समाप्ति तक रहेगा।
चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर
विक्रम संवत 2082 कालयुक्त, शक संवत 1947 विश्वावसु और गुजराती संवत 2082 पिंगल है। बृहस्पति संवत्सर कालयुक्त 25 अप्रैल 2025 को दोपहर 3 बजकर 7 मिनट तक रहेगा, फिर सिद्धार्थी शुरू होगा। चंद्र मास कार्तिक है, जो पूर्णिमांत और अमांत दोनों में गणना होता है। प्रविष्टे/गते 19 है।
राशि और नक्षत्र
चंद्र राशि मीन दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगी, फिर मेष राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य राशि तुला में है और सूर्य स्वाती नक्षत्र में पूरे दिन रहेगा। अश्विनी नक्षत्र साहस और नई शुरुआत की ऊर्जा देगा।
ऋतु और अयन
ऋतु शरद (वैदिक) और हेमंत (द्रिक) है। अयन दक्षिणायन है। मौसम ठंडा रहेगा, रात में ठंडक बढ़ सकती है।
04 नवंबर का शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 से 5:43 बजे तक (ध्यान और पूजा के लिए उत्तम)
- प्रातः संध्या: सुबह 5:17 से 6:35 बजे तक (स्पिरिचुअल कार्यों के लिए शुभ)
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 से दोपहर 12:26 बजे तक (महत्वपूर्ण कार्यों के लिए फेवरेबल)
- विजय मुहूर्त: दोपहर 1:54 से 2:38 बजे तक (नए काम शुरू करने के लिए अच्छा)
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:34 से 6:00 बजे तक (पूजा और फैमिली टाइम के लिए शुभ)
- सायाह्न संध्या: शाम 5:34 से 6:52 बजे तक (भक्ति कार्यों के लिए बेस्ट)
- अमृत काल: सुबह 10:25 से 11:51 बजे तक (शुभ कार्यों के लिए अनुकूल)
- निशिता मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 05 नवंबर सुबह 12:31 बजे तक और 05 नवंबर सुबह 3:20 से 4:45 बजे तक (रात के पूजा के लिए अच्छा)
- अमृत सिद्धि योग / सर्वार्थ सिद्धि योग: दोपहर 12:34 बजे से 05 नवंबर सुबह 6:36 बजे तक (हर काम में सक्सेस)
- रवि योग: सुबह 6:35 से दोपहर 12:34 बजे तक (सूर्य से जुड़े कामों के लिए शुभ)
04 नवंबर का अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 2:49 से 4:11 बजे तक (बड़े फैसले या नए काम से बचें)
- यमगण्ड: सुबह 9:20 से 10:42 बजे तक (जोखिम भरे कामों से बचें)
- आडल योग: सुबह 6:35 से दोपहर 12:34 बजे तक (अशुभ)
- दुर्मुहूर्त: सुबह 8:47 से 9:31 बजे तक और रात 10:47 से 11:39 बजे तक (काम शुरू करने से बचें)
- गुलिक काल: दोपहर 12:04 से 1:27 बजे तक (सावधानी बरतें)
- वर्ज्य: 05 नवंबर सुबह 6:09 से 7:33 बजे तक
- भद्रा: रात 10:36 बजे से 05 नवंबर सुबह 6:36 बजे तक
- गण्ड मूल: पूरे दिन
- पञ्चक: सुबह 6:35 से दोपहर 12:34 बजे तक
- बाण: रोग दोपहर 3:06 बजे तक
आनंदादि और तमिल योग
आनंदादि योग में शुभ दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, फिर अमृत शुरू होगा। तमिल योग में सिद्ध दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, फिर अमृत शुरू होगा। जीवनम में पूर्ण जीवन और नेत्रम में दो नेत्र रहेगा।
निवास और शूल
होमाहुति चंद्र को पूरे दिन दी जाएगी। दिशा शूल उत्तर दिशा में है, इस दिशा में यात्रा से बचें। चंद्र वास उत्तर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक, फिर पूर्व रहेगा। अग्निवास पाताल रात 10 बजकर 36 मिनट तक, फिर पृथ्वी पर रहेगा। भद्रावास स्वर्ग रात 10 बजकर 36 मिनट से पूर्ण रात्रि तक रहेगा। राहु वास पश्चिम में रहेगा। शिववास भोजन में रात 10 बजकर 36 मिनट तक, फिर श्मशान में रहेगा। कुंभ चक्र पश्चिम दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक, फिर उत्तर में रहेगा।
