Panchang 28 April 2025: चंद्र दर्शन दिवस पर कितने बजे दिखेगा चांद, पंचांग से जानिए चंद्रोदय समय, शुभ मुहूर्त और राहुकाल
- Authored by: सुजीत जी महाराजEdited by: लवीना शर्मा
- Updated Apr 28, 2025, 05:54 AM IST
Aaj Ka Panchang 28 April 2025: आज वैशाख शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। आज चंद्र दर्शन दिवस भी है जो अमावस्या के अगले दिन मनाया जाता है। इस दिन कई लोग उपवास रखते हैं और शाम में चंद्र दर्शन के बाद भोजन ग्रहण करते हैं। चलिए आपको बताते हैं आज के सभी शुभ-अशुभ मुहूर्त।
Aaj Ka Panchang 28 April 2025
Aaj Ka Panchang 28 April 2025: आज परम पवित्र वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। आज भगवान शिव जी की के साथ साथ माता दुर्गा जी की उपासना नियमपूर्वक करते हैं। शिवपुराण का नित्य पाठ कर सकते हैं। प्रति सप्ताह सोमवार व्रत पुण्य प्राप्ति का सुअवसर देता है। चन्द्रमा व गुरु के बीज मंत्र का जप करें। आज सप्त अन्न का दान करना बहुत फलित होता है। किसी पवित्र नदी में स्नान करें। आज चंद्र दर्शन दिवस है ऐसे में कई लोग इस दिन उपवास भी रखेंगे। ये उपवास रात में चांद के दर्शन करके खोला जाता है। चलिए आपको बताते हैं आजा के सभी शुभ-अशुभ मुहूर्त।
आज का पंचांग 28 अप्रैल 2025 (Aaj Ka Panchang 28 April 2025)
संवत---पिङ्गला
विक्रम संवत 2082
माह-वैशाख,शुक्ल पक्ष
तिथि -प्रतिपदा 09:11 pm तक फिर द्वितीया
पर्व-सोमवार व्रत,प्रतिपदा
दिवस -सोमवार
सूर्योदय-05:43am
सूर्यास्त-6:54pm
नक्षत्र- भरणी09:36 pm तक फिर कृतिका
चन्द्र राशि - स्वामी ग्रह-गुरु
सूर्य राशि- मेष
करण-- किशतुधन 11:08 am तक फिर बव
योग- आयुष्मान 08:05 pm तक फिर बव
आज चांद दर्शन का समय (Chandra Darshan Time Today)
06:55 PM से 07:43 PM
आज के शुभ मुहूर्त 28 अप्रैल 2025
अभिजीत-11:54 am से 12:45 pmतक
विजय मुहूर्त-02:21 pm से 03:24 pm तक
गोधुली मुहूर्त--06:23 pm से 07:22 pm तक
ब्रम्ह मुहूर्त-4:05 am से 05:09 am तक
अमृत काल-06:02am से 07:43 am तक
निशीथ काल मुहूर्त-रात्रि 11:41 से 12:21 तक रात
संध्या पूजन-06:21 pm से 07:09 pm तक
दिशा शूल- पूर्व दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त--राहुकाल-प्रातःकाल 07:30 बजे से 09 बजे तक
आज के उपाय- आजशिवलिंग पूजन बहुत फ़लदायी होता है। मन का निर्मल व सात्विक होना बहुत ही आवश्यक है। इस माह मंदिरों में भंडारे व अन्न दान की व्यवस्था कराएं। विहंगों को दाना -पानी दें।गाय को पालक व गुड़ खिलाएं। गौ शाला जाएं, वहां गौ माता को रोटी, गुड़, चारा, पालक इत्यादि खिलाने से अखण्ड पुण्य की प्राप्ति होती है। चींटी को शक्कर दें। कुत्ते को भी रोटी दें। परम ब्रम्ह शिव साकार व निराकार दोनों हैं। वह किसी भी बड़े कार्य को निर्विध्न रूप से से पूर्ण करवाते हैं। अमावस्या को पीपल की उपासना की जाती है। हर सप्ताह नियमित सोमवार व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न रहते हैं। सोमवार को प्रदोष काल में सायंकाल मन्दिर जाकर दीपक जलाएं। दुर्गासप्तशती में लिखित सप्तश्लोकी दुर्गा का 09 बार पाठ करें।
क्या न करें-चन्द्रमा मन का कारक ग्रह है। मन में छल, कपट, ईर्ष्या व द्वेष न हो।