आज का इफ्तार का टाइम क्या है (Aaj ka iftar ka Time kya hai) 9 March 2026, aaj roja kab kholna hai (Aaj Roja Iftar Kitne Baje hai): रमजान का महीना मुसलमानों के लिए इबादत, सब्र और आत्मसंयम का समय होता है। इस पूरे महीने में रोजेदार सुबह सेहरी करके रोजा शुरू करते हैं और फिर पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद मगरिब की नमाज के साथ इफ्तार किया जाता है। साल 2026 में रमजान फरवरी के तीसरे सप्ताह में शुरू हुआ था और अब यह अपने मध्य दौर में चल रहा है। आज यानी 9 मार्च 2026 को रमजान का 19वां रोजा रखा जा रहा है। ऐसे में रोजेदारों के लिए अपने शहर के अनुसार इफ्तार का सही समय जानना जरूरी होता है, ताकि वे सही वक्त पर रोजा खोल सकें। जानें आज इफ्तार का व्रत कितने बजे तोड़ना है, आज रोजा कब खोलना है।
आज 9 मार्च 2026 को इफ्तार का समय क्या है
| शहर | आज का इफ्तार समय (अनुमानित) |
| दिल्ली | शाम 6:27 बजे के बाद |
| नोएडा | शाम 6:27 बजे के बाद |
| चंडीगढ़ | शाम 6:29 बजे के बाद |
| लखनऊ | शाम 6:13 बजे के बाद |
| कानपुर | शाम 6:16 बजे के बाद |
| जयपुर | शाम 6:34 बजे के बाद |
| भोपाल | शाम 5:35 बजे के बाद |
| पटना | शाम 5:56 बजे के बाद |
| कोलकाता | शाम 6:45 बजे के बाद |
| हैदराबाद | शाम 6:26 बजे के बाद |
| चेन्नई | शाम 6:21 बजे के बाद |
| बेंगलुरु | शाम 6:31 बजे के बाद |
| मुंबई | शाम 6:48 बजे के बाद |
| अहमदाबाद | शाम 6:48 बजे के बाद |
इफ्तार की दुआ क्या है
इफ्तार के समय अक्सर यह दुआ पढ़ी जाती है - अल्लाहुम्मा लका सुम्तु वा अला रिज्किका अफ्तर्तु।
इफ्तार के समय पढ़ी जाने वाली दुआ का अर्थ है कि ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोजा रखा और तेरी ही दी हुई रोजी से इफ्तार कर रहा हूं। इस दुआ को पढ़ने के बाद रोजा पूरा होता है और फिर इफ्तारी ली जा सकती है।
रोजा कब और कैसे खोला जाता है?
इस्लामिक परंपरा के अनुसार रोजा फज्र की नमाज से शुरू होकर मगरिब की नमाज तक रखा जाता है। जैसे ही सूरज ढलता है, मगरिब का समय शुरू हो जाता है और उसी समय रोजेदार इफ्तार करते हैं। सुन्नत के अनुसार रोजा खजूर या पानी से खोलना बेहतर माना जाता है। इसके बाद मगरिब की नमाज अदा की जाती है और फिर भोजन किया जाता है।
इफ्तार का महत्व क्या है
रमजान में इफ्तार का समय आध्यात्मिक रूप से भी बहुत खास माना जाता है। पूरे दिन रोजा रखने के बाद जब रोजेदार इफ्तार करते हैं, तो उस समय की गई दुआ को बहुत अहम माना जाता है। इस्लामी मान्यता के अनुसार इफ्तार के वक्त अल्लाह से की गई दुआ कबूल होने की उम्मीद ज्यादा होती है। इसलिए मुसलमान इस समय अपने परिवार, समाज और पूरी दुनिया की भलाई के लिए दुआ करते हैं।
