अध्यात्म

आज एकादशी कितने बजे तक है? आज कौन-सी एकादशी का व्रत है? विष्णु जी की पूजा कब करनी है, जानें सही समय और मुहूर्त

आज एकादशी का शुभ दिन है और आज कि एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहते हैं। पापांकुशा एकादशी चौबीस एकादशियों में से एक विशेष और अत्यंत पुण्यदायी एकादशी मानी जाती है। यहां से आप जान सकते हैं कि आज एकादशी कितने बजे तक है और कितने बजे तक आप एकादशी की पूजा कर सकते हैं।

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आज एकादशी कितने बजे तक है? (pic credit: Canva)

आज पापांकुशा एकादशी का शुभ दिन है। हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर इसे सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और भगवान विष्णू की पूजा करते हैं। साथ ही इस दिन एकादशी की कथा और आरती भी की जाती है। ये एकादशी का व्रत आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लेकर आती है। एकादशी की पूजा सही मुहूर्त में करना बेहद जरूरी है, तभी इसका संपूर्ण फल मिलता है। आज पापांकुशा एकादशी कितने बजे तक है और इसकी पूजा कितने बजे तक होगी, ये आप यहां से जानें।

आज एकादशी कितने बजे तक है?

आज (3 अक्टूबर 2025 को) एकादशी तिथि शाम 6 बजकर 32 मिनट तक रहेगी, जिसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी। यानी आप आज शाम में 6 बजकर 32 मिनट तक ही भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।

आज के शुभ मुहूर्त-

  • अभिजीत मुहूर्त- 11:46AM से 12:34PM तक
  • अमृत काल- 10:56PM से 12:30PM तक (4 अक्टूबर)
  • विजय मुहूर्त- 2:08PM से 2:55PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त- 6:05AM से 6:29AM तक

इस समय भूलकर भी न करें एकादशी की पूजा-

आज सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक राहुकाल है और इस समय एकादशी की पूजा नहीं करनी चाहिए। वहीं, सुबह 7 बजकर 44 मिनट से सुबह 9 बजकर 12 मिनट तक गुलिक काल और दोपहर 3 बजकर 7 मिनट से दोपहर 4 बजकर 36 मिनट तक यमगण्ड रहेगा तो इस समय पर भी विष्णू जी की पूजा नहीं करनी है।

Srishti
सृष्टिauthor

सृष्टि टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की फीचर डेस्क से जुड़ी कंटेंट राइटर हैं, जो मुख्य रूप से धर्म और लाइफस्टाइल सेक्शन के लिए लिखती हैं। सृष्टि को आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और साहित्य में गहरी रुचि है। यही वजह है कि उनके लेखों में परंपरा, आस्था और जीवनशैली की सहज समझ खूबसूरती से दिखाई देती है। वह धार्मिक कथाओं, ग्रंथों से जुड़े विषयों, आध्यात्मिक ट्रेंड्स और समकालीन जीवनशैली पर 5,000 से अधिक लेख लिख चुकी हैं। मॉडर्न लाइफस्टाइल और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाते हुए वह ऐसे कंटेंट गढ़ती हैं, जो प्रेरक होने के साथ-साथ जानकारीपूर्ण भी होता है।

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