अध्यात्म

27 October Ka Panchang: 27 अक्टूबर के दिन छठ पूजन का क्या है शुभ मुहूर्त, पंचांग से जानिए सूर्यास्त की टाइमिंग, नक्षत्र, योग और करण

27 October Ka Panchang: 27 अक्टूबर को कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस दिन छठ महापर्व के चलते सूर्यास्त के समय संघ्या अर्घ्य दिया जाएगा। पंचांग के माध्यम से आप सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक का समय जान सकते हैं। इसके साथ ही शुभ व अशुभ काल के बारे में भी जान सकते हैं।

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27 अक्टूबर का पंचांग

27 October Ka Panchang: 27 अक्टूबर 2025, सोमवार का दिन, हिंदू पंचांग के अनुसार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है, जो पूजा-पाठ और आध्यात्मिक कार्यों के लिए अनुकूल है। यह दिन छठ महापर्व का हिस्सा है, जब सूर्य उपासना विशेष फलदायी होती है। इस दिन व्रती महिलाएं संध्या अर्घ्य अर्पित करेंगी। पंचांग के माध्यम से दिन के शुभ-अशुभ समय, तिथि, नक्षत्र, योग, करण और अन्य ज्योतिषीय जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके साथ ही सूर्यास्त का समय भी आप पंचांग के माध्यम से जान सकते हैं।

सूर्योदय और सूर्यास्त व चंद्रोदय, चंद्रास्त का समय

सूर्य आज सुबह 6:30 बजे उदय होगा और शाम 5:40 बजे अस्त होगा। चंद्रमा सुबह 11:35 बजे उदय होगा और रात 9:43 बजे अस्त होगा। दिन की अवधि 11 घंटे 10 मिनट 24 सेकंड रहेगी, जबकि रात की अवधि 12 घंटे 50 मिनट 17 सेकंड रहेगी। मध्याह्न दोपहर 12:05 बजे होगा।

तिथि, नक्षत्र, योग और करण

आज की तिथि शुक्ल षष्ठी है, जो पूर्ण रात्रि तक रहेगी। नक्षत्र मूल पूरे दिन प्रभावी रहेगा, जो दोपहर 1:27 बजे तक रहेगा, फिर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा। मूल नक्षत्र का तीसरा पाद सुबह 6:49 बजे तक, चौथा पाद दोपहर 1:27 बजे तक, पूर्वाषाढ़ा का पहला पाद शाम 8:04 बजे तक, दूसरा पाद रात 2:40 बजे, 28 अक्टूबर तक, तीसरा पाद प्रभावी रहेगा। योग में अतिगण्ड सुबह 7:27 बजे तक रहेगा, इसके बाद सुकर्मा योग शुरू होगा। करण में कौलव शाम 7:05 बजे तक रहेगा, फिर तैतिल करण पूर्ण रात्रि तक रहेगा।

चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर

आज विक्रम संवत 2082 कालयुक्त है, शक संवत 1947 विश्वावसु है और गुजराती संवत 2082 पिंगल है। बृहस्पति संवत्सर कालयुक्त है, जो 25 अप्रैल 2025 को दोपहर 3:07 बजे तक रहेगा, फिर सिद्धार्थी शुरू होगा। चंद्र मास कार्तिक है, जो पूर्णिमांत और अमांत दोनों में गणना होता है। प्रविष्टे/गते 11 है।

राशि और नक्षत्र

चंद्र राशि धनु में है। सूर्य राशि तुला में है और सूर्य स्वाती नक्षत्र के पहले पाद में है। मूल नक्षत्र का प्रभाव संतुलन और महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित करेगा, लेकिन जल्दबाजी से बचना होगा। पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में सकारात्मकता बढ़ेगी।

ऋतु और अयन

ऋतु शरद है, जो द्रिक और वैदिक दोनों गणनाओं में लागू है। अयन दक्षिणायन है, जो सूर्य की दक्षिणी गति को दर्शाता है। यह मौसम सुखद रहेगा, लेकिन रात में ठंडक बढ़ सकती है।

27 अक्टूबर के दिन का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:47 बजे से 5:38 बजे तक, ध्यान और पूजा के लिए उत्तम।
  • प्रातः संध्या: सुबह 5:13 बजे से 6:30 बजे तक, आध्यात्मिक कार्यों के लिए शुभ।
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक, महत्वपूर्ण कार्यों के लिए अनुकूल।
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 1:56 बजे से 2:41 बजे तक, नए कार्य शुरू करने के लिए अच्छा।
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:40 बजे से 6:06 बजे तक, पूजा और परिवार के लिए शुभ।
  • सायाह्न संध्या: शाम 5:40 बजे से 6:57 बजे तक, भक्ति कार्यों के लिए उपयुक्त।
  • अमृत काल: शाम 6:57 बजे से 8:45 बजे तक, शुभ कार्यों के लिए अनुकूल।
  • निशिता मुहूर्त: रात 11:39 बजे से 12:31 बजे, 28 अक्टूबर तक, रात्रिकालीन पूजा के लिए अच्छा।
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: रात 1:27 बजे से सुबह 6:30 बजे, 28 अक्टूबर तक, सभी कार्यों में सफलता।
  • रवि योग: रात 1:27 बजे से सुबह 6:30 बजे, 28 अक्टूबर तक, सूर्य से संबंधित कार्यों के लिए शुभ।

27 अक्टूबर के दिन का अशुभ समय

  • राहुकाल: सुबह 7:53 बजे से 9:17 बजे तक, इस दौरान बड़े फैसले या नए काम शुरू करने से बचें।
  • यमगण्ड: सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:05 बजे तक, जोखिम भरे कार्यों के लिए ठीक नहीं।
  • गुलिक काल: दोपहर 1:29 बजे से 2:52 बजे तक, सावधानी बरतें।
  • दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:27 बजे से 1:12 बजे तक, रात 11:58 बजे से 1:44 बजे, 28 अक्टूबर तक, कार्य शुरू करने से बचें।
  • वर्ज्य: दोपहर 11:41 बजे से 1:27 बजे तक, शुभ कार्यों से बचें।
  • विंछुड़ो: रात 1:27 बजे से सुबह 6:30 बजे, 28 अक्टूबर तक, अशुभ माना जाता है।
  • गण्ड मूल: सुबह 6:30 बजे से दोपहर 1:27 बजे तक।

आनंदादि और तमिल योग

आनंदादि योग में लुम्बक दोपहर 1:27 बजे तक रहेगा, जो अशुभ है, इसके बाद उत्पात योग शुरू होगा। तमिल योग में मरण दोपहर 1:27 बजे तक रहेगा, जो अशुभ है। जीवनम में अर्ध जीवन और नेत्रम में एक नेत्र रहेगा।

निवास और शूल

होमाहुति बुध को दी जाएगी। दिशा शूल पूर्व दिशा में है, इस दिशा में यात्रा से बचें। चंद्र वास पूर्व में है। अग्निवास आकाश में है। राहु वास उत्तर-पश्चिम में है। शिववास नंदी पर है। कुंभ चक्र पूर्व में दोपहर 1:27 बजे तक अशुभ माना जाता है, फिर दक्षिण में। बाण मृत्यु दोपहर 3:02 बजे से पूर्ण रात्रि तक।

Mohit Tiwari
मोहित तिवारीauthor

मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।

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